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यह डिमेंशिया, डिप्रेशन से बचाएगा, कमजोर नहीं बनेगी याददाश्त

हैल्थ रिपोर्टर जयपुर ब्रेन को एक्टिव बनाए रखने के लिए इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। ऐसा करने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 04:50 AM IST

यह डिमेंशिया, डिप्रेशन से बचाएगा, कमजोर नहीं बनेगी याददाश्त
हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



ब्रेन को एक्टिव बनाए रखने के लिए इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। ऐसा करने से याददाश्त कमजोर नहीं पड़ेगी। वहीं,डिमेंशिया से भी बचाव होगा। इसे एक्टिव रखने से ब्रेन में न्यूरॉन्स की संख्या बढ़ती है। साथ ही इनकी इंटरकनेक्टिविटी बढ़ने से ब्रेन के फंक्शन बेहतर बनते है। अभी तक हुई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि एक्सरसाइज और ट्रेड मिल पर चलने वाले लोगों में ब्रेन से जुड़ी हुई बीमारियां होने का रिस्क कम हो जाता है। वे काफी हद तक डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचे रहते हैं। व्यक्ति की एवरेज ऐज बढ़ने से दुनियाभर में डिमेंशिया के केस बढ़ रहे हैं। इससे बचने के लिए ब्रेन को अलग-अलग तरह की एक्टीविटीज में व्यस्त रखें। आजकल की लाइफस्टाइल में ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस बढ़ रहा है।

रूटीन डाइट में प्रोसेस्ड फूड और मीठा ज्यादा शामिल करने पर डायबिटीज होने से ब्रेन सिकुड़ रहा है,क्योंकि सामान्य व्यक्ति की तुलना में इस बीमारी से ग्रसित लोगों का दिमाग जल्दी सिकुड़ता है। इससे टॉक्सिन रिलीज होने से डिमेंशिया हो सकता है। शुगर ही नहीं अल्कोहल की वजह से भी दिमाग में सिकुड़न हो सकती है। ब्लड में शुगर की ज्यादा मात्रा से टॉक्सिन बनते हैं। इससे ब्रेन की सैल्स डैमेज होने से डिमेंशिया और डिप्रेशन हो सकता है।

एक्सरसाइज के अलावा क्या करें

मेडीटेरेनियन डाइट लें, जिसमें एनिमल और डेयरी फैट कम होना चाहिए। ऐसी डाइट लेने से लंबे समय तक ब्रेन के फंक्शन मेंटेन रहते हैं। हाल में इसके सबूत में मिले हैं। डाइट में माइक्रो और मैक्रो न्यूट्रिएंट्‌स शामिल करें।

60 साल की उम्र के बाद डिमेंशिया की संभावना बढ़ती है।

रिलेशनशिप का स्टेटस भी प्रभावित करता है ब्रेन का स्ट्रक्चर

ब्रेन को एक्टिव बनाए रखने में रिलेशनशिप का अहम रोल है। अच्छे संबंधों से जिंदगी में खुशियां आती हैंै। वहीं, यह ब्रेन के स्ट्रक्चर को भी प्रभावित करता है। एक एवरेज ब्रेन 100 बिलियन न्यूरॉन्स से बनता है। न्यूरॉन्स से निकलने वाले इलेक्ट्रोकैमिकल सिग्नल्स के जरिए भावनाएं और मैमोरी होती है। हमारे इमोशन ब्रेन के स्ट्रक्चर को सही शेप देते हैं। स्टडी में पाया गया कि तलाकशुदा, विडो और सिंगल की तुलना में शादीशुदा लोगों में संतुष्टि का लेवल 45.3 परसेंट तक ज्यादा है। सिंगल की बजाय रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के ब्रेन स्ट्रक्चर अलग-अलग तरह के होते हैं।

याददाश्त बढ़ाने के लिए द्विभाषी बने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाएं

जो लोग बाइलिंगुअल होते हैं या फिर किसी तरह का म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाते हैं, इससे भी ब्रेन का फंक्शन बेहतर बनता है। यही वजह है कि बाइलिंगुअल और म्यूजिशियन की याददाश्त तेज होती है। वे फोन नंबर की लिस्ट जल्दी याद कर पाते हैं। स्टडी में 19 से 35 साल की उम्र के लोगों के ब्रेन फंक्शन को स्कैन किया गया। यह रिसर्च एनल्स ऑफ द न्यू यॉर्क एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित हुई है। रिसर्च में पाया गया कि जिन पार्टिसिपेंट्स को दो भाषाओं की नॉलेज है या फिर वे म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाते हैं, वे ज्यादा बेहतर तरीके से चीजों को रिकॉल कर पाते हैं। -डॉ. दिनेश खंडेलवाल, न्यूरोलॉजिस्ट, एसएमएस, यजपुर

रिस्क फैक्टर

सेडेन्टरी लाइफ स्टाइल, डिप्रेशन, स्ट्रेस, प्रोसेस्ड फूड खाना, विटामिन बी-12 की कमी। यह भी नुकसानदायक है।

रिसर्च का दावा

एजुकेटेड लोगों में डिमेंशिया की रिस्क कम

कम पढ़े हुए लोगों की तुलना में ज्यादा एजुकेटेड लोगों में डिमेंशिया की संभावना कम रहती है। ज्यादा पढ़े हुए लोग ब्रेन का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। ब्रेन के बाएं हिस्से से लिखने-पढ़ने की एक्टिवीटीज होती हैंै। ब्रेन का दायां हिस्सा नॉन-वर्वल एक्टिवीटीज के लिए पहचाना जाता है। उदाहरण के लिए म्यूजिक सीखने या प्ले करने पर ब्रेन का दायां हिस्सा एक्टिव रहेगा। ब्रेन के जिस हिस्से को एक्टिव करेंगे, वो ही एक्टिव रहेगा। उम्र बढ़ने के साथ न्यूरॉन्स की एक्टीविटी बढ़ती है, लेकिन आईक्यू लेवल में बदलाव नहीं आता है।

स्लीप ऐप्निया से याददाश्त होती है कमजोर

स्लीप ऐप्निया में ब्रेन तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है। इससे याददाश्त कमजोर होती है। कभी-कभी हैड इंजरी के कारण भी ऐसा होता है। हैड इंजरी में न्यूरॉन्स जल्दी डैमेज होते हैं। ब्रेन को ज्यादा से ज्यादा यूज करें। इंफेक्शन से बचें। खेलते हुए या अन्य एक्टिविटी के दौरान सिर भिड़ने से कम्प्रेशन सिंड्रोम हो सकता है। इस सिंड्रोम में कॉग्नेटिव फंक्शन कम हो जाएंगे। यानी व्यक्ति की सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता कम होगी।

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