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चोट लगने पर कंधे में महसूस होती है कमजोरी और नहीं उठा पाते हाथ

हैल्थ रिपोर्टर जयपुर कंधे में चोट लगने की कई वजह हो सकती है उनमें से एक वजह एथलेटिक्स में बार बार सिर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 04:50 AM IST

चोट लगने पर कंधे में महसूस होती है कमजोरी और नहीं उठा पाते हाथ
हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



कंधे में चोट लगने की कई वजह हो सकती है उनमें से एक वजह एथलेटिक्स में बार बार सिर के ऊपर हाथ ले जाने वाली गतिविधियां भी हो सकती हैंै। कंधे में चोट कई प्रकार की हो सकती है।

पहला अस्थिरता - इस चोट में कभी कभी कंधे के जोड़ गिरने या बाहरी ताकत से अपनी सामान्य स्थिति से बाहर आ जाता है।

इंपिगमेंट - इस चोट में कंधे की ब्लेड के दो हिस्सों से बंधे की मांसपेशियों के अधिक रगड़ के कारण होता है।

रोटेटर कफ की चोट - रोटेटर कफ कंधे के सबसे जरूरी हिस्सों में से एक है। यह कंधे की हड्डियों पर कंट्रोल रखता है। इसमें चोट लगने पर दर्द, शरीर से हाथ दूर लेने की क्षमता की कमी और कमजोरी महसूस होती है। चोट लगने पर सबसे पहले बर्फ से सेक करें। पेन किलर और पट्टे के पहनने से दर्द में आराम मिल सकता है। लैब्रम, लिंगामेंट और कैप्सूल की मरम्मत करके इसे ठीक किया जाता है। इसमें जोड़ के कैप्सूल को लेबरम से जोड़ा जाता है। इस सर्जरी के बाद कंधे को कुछ सप्ताह के लिए नहीं हिलाएं। ऑर्थोस्कोपी की मदद से रोटेटर कफ को ट्रीट किया जाता है। पूरा ठीक होने में 4 से 6 हफ्ते लग सकते है। सर्जरी के बाद फिजियोथैरपी की अहम भूमिका होती है।

-डॉ. जय महेश्वरी, ऑर्थोपेडिक सर्जन, जयपुर

इलाज

कंधे में चोट लगने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ साथ फीजियोथैरेपी करवाएं, लेकिन कुछ केस में उपचार के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है ।

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