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डाइजेस्टिव सिस्टम खराब होना भी एंग्जाइटी डिसऑर्डर का लक्षण

हैल्थ रिपोर्टर जयपुर एंग्जाइटी सिर्फ हमारी मेंटल हैल्थ को ही प्रभावित करती है, ज्यादातर लोगों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 04:50 AM IST

डाइजेस्टिव सिस्टम खराब होना भी एंग्जाइटी डिसऑर्डर का लक्षण
हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



एंग्जाइटी सिर्फ हमारी मेंटल हैल्थ को ही प्रभावित करती है, ज्यादातर लोगों में यही धारणा है, लेकिन यह सही नहीं है। एंग्जाइटी से फिजिकल हैल्थ भी खराब होती है। इसका शॉर्ट और लोंग टर्म पर असर देखा जा सकता है। बॉडी में इसके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। इसमें डाइजेस्टिव प्रॉब्लम सहित इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है। यह कार्डियोवैस्क्ुलर, यूरिनरी और रेस्पिरेटरी सिस्टम के फंक्शन को भी प्रभावित करता है। इससे होने वाले डिसऑर्डर की वजह से नर्वसनैस और ड़र महसूस होता है। कई लोग स्ट्रेस में परफोर्मेंस दे पाते हैं, लेकिन लंबे समय तक अनावश्यक तनाव एंग्जाइटी पैदा करने से यह गुड एक्शन को बैड एक्शन में बदल देता है।

शरीर में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अल्सर और हार्ट डिजीज की संभावना बढ़ जाती है। लगातार चिंता करने पर सबसे ज्यादा असर इम्यूनिटी सिस्टम पर पड़ता है इससे हमारा नॉर्मल सिस्टम खराब हो जाता है और कई तरह की बीमायां शरीर में पैदा हो जाती हैं। एंग्जाइटी में ब्रीदिंग और रेस्पिरेटरी बदलाव होते हैं। ब्रीदिंग बहुत तेज हो जाती है। एंग्जाइटी से हार्ट रेट में बदलाव आने पर सर्कुलेशन प्रभावित होता है। लंबे समय तक एंग्जाइटी रहने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इम्यून सिस्टम कमजोर बनता है।

लंबे समय तक एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर रहने से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, इससे जल्दी-जल्दी इंफैक्शन होने की संभावना बढ़ती है

सामान्य एंग्जाइटी डिसऑर्डर के लक्षण

पिछले छह महीने से बिना किसी कारण ज्यादा एंग्जाइटी होना।

सोशल एंग्जाइटी : सामाजिक स्थितियों में निर्णय लेने में डरना या फिर बेइज्जत होना।

सेपरेशन एंग्जाइटी : घर से दूर रहने का डर।

फोबिया : किसी विशेष एक्टीविटी और परिस्थिति में डर महसूस होना।

गंभीर बीमारी को लेकर डर।

ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर बार.बार ऐसे विचार पैदा होना जिनसे विशेष तरह का व्यवहार बनता है।

पोस्ट.ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर ट्रोमा होने पर सीवियर एंग्जाइटी।

कैसे पहचानें एंग्जाइटी डिसऑर्डर

एंग्जाइटी महसूस होने पर शारीरिक और साइकोलॉजिकल बदलाव आना शुरू हो जाते हैं। इसमें नर्वसनैस,टेंशन और भय महसूस करना। सीवियर केसों में हार्ट बीट बढ़ना, तेज सांस चलना, पसीना आना, कंपकंपाना, थकान, कमज़ोरी, नींद में रहना, कंसंट्रेशन में परेशानी, नौशिया, डाइजेस्टिव इश्यूज, बहुत ज्यादा ठंडा और गर्म महसूस करना, छाती में दर्द।

उपचार

एंग्जाइटी को बीमारी में तब्दील होने से रोका जा सकता है। इसके लिए नियमित रूप से वॉक और मेडिटेशन करें। फाइबर रिच फूड लें, ज्यादा मिर्च मसाले वाला खाना अवॉइड करे। अपनी पसंद की एक्टिविटी में करीब 45 मिनट से 1 घंटे का समय जरूर दें। इसके बावजूद स्ट्रेस कंट्रोल नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से ट्रीटमेंट लें।

-डॉ ललित बत्रा, मनोचिकित्सक, एसएमएस, जयपुर

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