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जिस खबर को लिखने में डर महसूस हो उसे सबसे पहले लिखें

City Reporter

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 04:50 AM IST
जिस खबर को लिखने में डर महसूस हो उसे सबसे पहले लिखें
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पत्रकार की सांसो में भी खबरें सांसे लेती है। खबर लिखने से पहले जीना पड़ता है आैर महसूस करना पड़ता है ताकि जब वो पाठकों तक पहुंचे तो उस सच से रूबरू हो सके। पत्रकारों को जिस खबर को लिखने से पहले डर लगे, उसी खबर को सबसे पहले लिखना चाहिए। ‘द प्राइस यू पे टू बी ए जर्नलिस्ट’ सेशन में दैनिक भास्कर राजस्थान के स्टेट एडिटर एल.पी. पंत ने ये बात कही। ये मौका था, शुक्रवार से होटल फेयरमॉन्ट में शुरू हुए तीन दिवसीय टॉक जर्नलिज्म कार्यक्रम का। वहीं ‘पैनल डिस्कशन ऑन चैलेंजेस इन कवरिंग नॉर्थ-ईस्ट’ जर्नलिस्ट तुलिका ने कहा, नॉर्थ ईस्ट में अभी भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की कमी है। मेनस्ट्रीम मीडिया में अभी भी सिर्फ यहां की कन्ट्रोवर्सी और मर्डर की खबरें दिखा रहे हैं।

पत्रकार नहीं, उनकी खबरें ही बोलती है

टीवी मीडिया में सिर्फ एंकर बोलते है जबकि प्रिंट मीडिया में पत्रकार नहीं उनकी खबरें बोलती हंै। खबर लिखते हुए एक पत्रकार के ट्रॉमा का अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन जब वो खबर को महसूस करता है तभी अखबार में उसकी खबर पढ़कर पाठक उस खबर की बेचेनी को समझ पाता है। हम रोजाना मारपीट, लड़ाई झगड़े, दंगे और बच्चियों के साथ रेप की खबरें अपने साथ घर ले जाते हैं। अपने हाथ धोकर ही बच्चों को छूने की हिम्मत जुटाते हैं, इस डर से कि इन खबरों का रंग कहीं उनके सपनों को डरा न दे।

Session : The price you pay to be a journalist

Speaker : LP Pant

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