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अफगानिस्तान में जर्नलिस्ट देश के लिए मिटने का जज्बा रखने वाले सैनिकों जैसे हैं-लोतफुल्लाह

City Reporter

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 04:50 AM IST
अफगानिस्तान में जर्नलिस्ट देश के लिए मिटने का जज्बा रखने वाले सैनिकों जैसे हैं-लोतफुल्लाह
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अफगानिस्तान के पहले 24/7 प्राइवेट चैनल टोलो के हैड लोतफुल्लाह निजाफिजादा ने अफगानिस्तान में पत्रकारिता की स्वतंत्रता के बारे में दैनिक भास्कर की न्यूज एडिटर डॉ. प्रेरणा साहनी से बात करते हुए कहा कि नब्बे के दशक में तालिबान के कारण म्यूजिक और टीवी प्रतिबंधित थे ।लेकिन आज पत्रकारिता काफी हद तक स्वतंत्र है।अफगानी पत्रकार पैशन और देशभक्ति के जज्बा रखने वाले सैनिकों जैसे समर्पित हैं जो सूचना नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव लाने के लिए जान हथेली पर रखकर काम करते हैं।तालिबान ने खबरों की वजह से सुसाइड बम के जरिए 7 रिपोर्टर्स को मार डाला और 17 को घायल कर दिया लेकिन चैनल बंद करने की जगह उन्होंने एक साथ फैसला लिया कि वो आतंक के दबाव में खबरों को बंद नहीं करेंगे नहीं तो अफगानिस्तान को ये ताकतें तोड़ देंगी।लोतफुल्लाह का कहना था कि हालांकि दो तिहाई कवरेज युद्ध की ही होती है लेकिन लोगों में उम्मीद की रोशनी जगाने के लिए पॉजिटिव खबरों और यूथ के टैलेंट को प्रमोट किया जाता है। नए पत्रकारों को सरहदों में बंधकर नहीं बल्कि ग्लोबल सोच के साथ साझे मुद्दों पर काम करना चाहिए। पड़ोसी देशों की गलतियां को विवाद का मुद्दा बनाकर टीआरपी बढ़ाना आसान है लेकिन अलगाव की इन खाइयों का भरना जर्नलिस्ट का दायित्व है।

Session : Inside an Afgan Newsroom

Speakers : Lotfullah & Prerna Sahani

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