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ये हैं राजस्थान के सुपर डॉग्स, 40 रेप-मर्डर केस के खोल चुके राज

येे वही नस्ल है जिसने ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में खोज निकाला था। दो साल पहले राजस्थान पुलिस क्राइम केसेज सॉल्व...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 08, 2018, 05:00 AM IST

ये हैं राजस्थान के सुपर डॉग्स, 40 रेप-मर्डर केस के खोल चुके राज
येे वही नस्ल है जिसने ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में खोज निकाला था। दो साल पहले राजस्थान पुलिस क्राइम केसेज सॉल्व करने के लिए लैब्राडॉर डॉग की मदद लेती थी लेकिन स्पेशल डीजीपी एनआर के. रेड्डी के सुझाव पर अब बेल्जियम मेलिनवाह डॉग्स के साथ क्राइम केसेज को सॉल्व कर रही है।

राजस्थान पुलिस की टीम में शामिल 27 बेल्जियन मेलिनवाह डॉग्स की खूबी और ट्रेनिंग का लाइव डेेमो राजस्थान पुलिस अकेडमी ग्राउंड्स में हुए डॉग शो में किया गया। इसी ब्रीड के लीमा और चार्ली को मिल चुका है डीजी डिस्क टाइटल। राजस्थान देश का पहला राज्य है, जिसने इन डॉग्स पुलिस में शामिल किया है। ये डॉग्स रेप और मर्डर के अब तक करीब 40 केस सॉल्व करने में मदद कर चुके हैं। भरतपुर की 9 साल की बच्ची का रेप और मर्डर का केस भी इसकी मदद से सुलझाया गया।

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आतंकी ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में जिसने खोज निकाला था ये वही नस्ल...

व्हाइट हाउस से एयरफोर्स में मेलिनवाह

अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास व्हाइट हाउस, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस, रूसी नौ सेना, रॉयल आस्ट्रेलियन एयरफोर्स सहित विश्व के श्रेष्ठ रक्षा और पुलिस संस्थानों में इस ब्रीड को काम में लिया जा रहा है। खास बात है कि इनका नाम रखने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है।

इसलिए लैब्राडॉर की जगह आए मेलिनवाह

लैब्राडॉर का वजन ज्यादा होता है और इस वजन की वजह से उसकी दौड़ने और काम करने की क्षमता कम होती है। ऐसे में ये 10 साल से पहले ही रिटायर कर दिए जाते थे। इस वजह से इनकी जगह स्पेशल डीजीपी एनआर के. रेड्डी ने बेल्जियम मेलिनवाह डॉग्स रखने का सुझाव दिया। यूएस, कैनेडा, हांगकांग, बेल्जियम, जर्मनी, नीदरलैंड्स आदि देशों में इन्हें पर्सनल प्रोटेक्शन, पुलिस वर्क, सर्च और रेस्क्यू के लिए काम में लिया जाता है।

फोटो: मनोज श्रेष्ठ

लाइव एक्शन... बम और नारकोटिक्स का सुराग दूर से ही लगा लेते हैं

40गुना ज्यादा है इसकी सूंघने की क्षमता एक आम आदमी के मुकाबले, खास तौर पर किसी बम या नारकोटिक्स का सुराग ये दूर से ही लगा लेते हैं

बैंगलुरू में कराई गई इन डॉग्स की ट्रेनिंग

स्टैमिना गजब का होता है और इन्हें काम करना पसंद होता है

मूलत: मेशेलिन शहर की इस ब्रीड में बम और नारकोटिक्स को सूंधकर पहचानने की क्षमता होती है

इन्हें अपराधियों को पकड़ने के अलावा पेट्रोलिंग ,सर्च और रेस्क्यू मिशन में भी यूज किया जाता है

इनकी उम्र 12 साल होती है ये 10 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं।

राजस्थान पुलिस ने बैंगलुरू में इन डॉग्स की ट्रेनिंग करवाई है।

ये डॉग्स अपने हैंडलर के अलावा किसी की बात नहीं मानते।

5

लाख रु.

कीमत वाले इन डॉग्स ने चाय के कप के साथ बैलेंस बनाने का एक्ट दिखाया। ये ही नहीं अपने हैंडलर के साथ वे पीटी करते भी नजर आए।

ये अफसर रहे मौजूद

डीजीपी ओपी गलहोत्रा, शासन सचिव गृह रोहित कुमार, बीएल सोनी, गोविंद गुप्ता, हेमन प्रियदर्शी, जयपुर पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल आदि।

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