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वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम 2% आरक्षण कोटे से बाहर, पांच साल पुरानी सरकारी भूल खिलाड़ियों पर भारी

पांच साल पहले कार्मिक विभाग की अधिसूचना में हुई एक खामी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 05:00 AM IST

पांच साल पहले कार्मिक विभाग की अधिसूचना में हुई एक खामी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को नौकरी की दौड़ से बाहर कर दिया है। हकीकत यह है कि अधिसूचना के प्रावधानों के तहत स्कूल स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेले खिलाड़ी तो कांस्टेबल और एलडीसी की भर्ती में नौकरी के हकदार हैं, लेकिन उससे उच्च स्तर की प्रतियोगिता खेलने वाले बाहर हो गए हैं। दरअसल कार्मिक विभाग की 1997 में जारी अधिसूचना में तो लिपिक स्तर पर आरक्षण कोटे में विश्व के विश्वविद्यालयों खेलों को शामिल किया हुआ था। इसके बाद 2013 में जारी अधिसूचना में इसका कोई जिक्र ही नहीं किया गया। हाल ही कांस्टेबल के 11,255 पदों की भर्ती में इसी आधार पर इन खिलाड़ियों को नौकरी के पात्र नहीं माना गया। पुलिस विभाग का कहना है कि वर्ल्ड यूनिवर्सिटी खेल को कर्मचारी चयन बोर्ड ने नियमावली में शामिल नहीं किया है और न ही लिखा है कि वर्ल्ड यूनिवर्सिटी खेल नेशनल ओलंपिक एसोसिएशन के अधीन आते हैं। वहीं कर्मचारी चयन बोर्ड भर्तियों में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स को नेशनल ओलंपिक एसोसिएशन के अधीन माने बैठा है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि यह प्रतियोगिता इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स फैडरेशन के अधीन आती है। कर्मचारी चयन बोर्ड इन्हें नेशनल ओलंपिक एसोसिएशन के अधीन मान कर एलडीसी की 13 हजार पदों की भर्ती में जगह दे देता है, तो कोई भी अभ्यर्थी अदालत में चुनौती दे सकता है। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम को पात्रता से बाहर करने के संबंध में कार्मिक विभाग तो विधि विभाग को जिम्मेदार बता रहा है, जबकि विधि विभाग खेल परिषद को। खामियाजा पिछले पांच साल से भर्तियों में खिलाड़ियों को उठाना पड़ रहा है। वहीं हरियाणा व दिल्ली समेत अन्य राज्यों में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स को अलग से प्रदर्शित कर खिलाड़ियों को नौकरी में लाभ दिया जा रहा है।

बिगइश्यू

राजस्थान को छोड़ अन्य राज्यों में खेल कोटे के आरक्षण में शामिल है वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम, यहां तो कर्मचारी चयन बोर्ड ही नियम को लेकर गफलत में

जानिए...क्या कहते हैं जिम्मेदार विभाग

कर्मचारी चयन बोर्ड : विशेषाधिकारी बद्रीनारायण का कहना है कि जो भी अंतरराष्ट्रीय खेल है वो इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन से मान्य है। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल है, तो यह आरक्षण कोटे में आ रहा है।

पुलिस : आएएसी के डिप्टी कमांडेंट राम सिंह और स्टाफ अफसर तेज कुमार पाठक का कहना है कि पुलिस विभाग को जो नियमावली कर्मचारी चयन बोर्ड ने दी है, उसके अनुसार वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम के प्रमाण-पत्र को मान्य नहीं किया जाएगा। इस प्रतियोगिता को 2013 के बाद बाहर क्यों किया है वो नहीं पता।

राज्य क्रीड़ा परिषद : सचिव नारायण सिंह का कहना है कि वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के खिलाड़ियों को आरक्षण मिलना चाहिए। हमारे सामने प्रकरण आएगा तो हम इसे लागू कराएंगे।

यह खिलाड़ियों की पीड़ा

अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता को बाहर किया है। जबकि राज्य स्तर के खेलों को आरक्षण कोटे में लिए हुआ है। मुझे कई भर्तियों में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम प्रतियोगिता के प्रमाण-पत्र का लाभ नहीं मिला है। राजस्थान यह प्रतियोगिता खेले करीब 25 खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्हें सरकारी नौकरी का इंतजार है। -अमन कड़वा, अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी खिलाड़ी

खिलाड़ियों ने बताया है कि उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है। मेरे ध्यान में है कि यह प्रतियोगिता कुछ साल पहले आरक्षण में शामिल थी। हम कोशिश करेंगे की सरकार जल्द इस खेल को जोड़े। -लिम्बाराम, अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी कोच

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