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ठाकुरजी को चांदी के झूले में झुलाया

श्रावण माह में मंदिरों में कई आयोजन हो रहे हैं। कहीं झूला झांकी सजाई जा रही है तो कहीं झूला उत्सव मनाया जा रहा है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 05:00 AM IST

ठाकुरजी को चांदी के झूले में झुलाया
श्रावण माह में मंदिरों में कई आयोजन हो रहे हैं। कहीं झूला झांकी सजाई जा रही है तो कहीं झूला उत्सव मनाया जा रहा है। कई मंदिरों में ठाकुरजी को नौका विहार कराया जा रहा है। आराध्यदेव गोविंद देवजी मंदिर में शुक्रवार को झूला झांकी सजाई गई। हरे रंग की पोशाक धारण कर ठाकुरजी चांदी के झूले में झूलते हुए नजर आए। महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से ठाकुरजी को झूला झुलाया। गोविंददेवजी मंदिर में झूला झांकी के आयोजन 26 अगस्त राखी पर्व तक चलेंगे।

बाईजी मंदिर में सजी नौका विहार झांकी : बड़ी चौपड़ स्थित लक्ष्मी नारायण बाईजी मंदिर में नौका विहार की झांकी सजाई गई। मंदिर महंत पुरुषोत्तम भारती के सानिध्य में सुबह ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक कर ऋतु पुष्पों से आकर्षक शृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर के गर्भगृह में नौका विहार की झांकी सजाई गई। ठाकुर लक्ष्मीनारायण और लक्ष्मीजी नाव में बैठे हुए नजर आए। शालिगरामजी को धातु की नाव में विराजमान किया गया। शनिवार को झूला महोत्सव मनाया जाएगा। ठाकुरजी फूलों के झूले में विराजमान होंगे।

रियासत काल से सजाई जा रही हैं ठाकुरजी की झांकियां

यहां रियासत काल से ही ऋतु के अनुसार ठाकुरजी की झांकियां सजाई जाती रही हैं। सावन में वर्षा होने के बाद जब नदी, तालाब और सरोवर पानी से लबालब हो जाते थे, तब ठाकुरजी को तालाब में नौका विहार करवाया जाता था। ठाकुरजी के प्रतीक के रूप में शालिगरामजी को नौका में विराजमान कर सरोवर में घुमाया जाता था। हालांकि, अब ऐसा नहीं होता। इसी वजह से मंदिर के गर्भ गृह में ही नौका विहार की झांकी सजाकर इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है।

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