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हवेली संगीत : पं. चंद्र प्रकाश ने किशनगढ़ शैली में किया कृष्ण की सुंदरता का बखान

City Reporter

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 05:01 AM IST
हवेली संगीत : पं. चंद्र प्रकाश ने किशनगढ़ शैली में किया कृष्ण की सुंदरता का बखान
City Reporter
जेकेके में दाे दिवसीय हवेली संगीत अाैर व्याख्यान समाराेह शुरू हुअा। पहले दिन किशनगढ़ के वरिष्ठ हवेली संगीत गायक पं. चंद्र प्रकाश अाैर मुंबई के माेटा मंदिर से अाए पं. तिलक गाेस्वामी ने हवेली संगीत शैली के पदाें से भगवान श्रीकृष्ण अाैर उनकी लीलाअाें का वर्णन किया। इसमें पं. चंद्र प्रकाश ने पहली बार राजस्थानी भाषा में राजा नगधर जी अाैर किशनगढ़ की भाषा में संत नागरीदास के लिखे पदाें का गायन किया। उन्हाेंने राजस्थानी भाषा में श्रीकृष्ण के रास का पद अाैर किशनगढ़ शैली में श्रीकृष्ण के साैंदर्य का वर्णन करता पद राज रसियाे है नखरालाे सुनाया।

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हवेली संगीत से भी पुराना है राजस्थानी पदों का इतिहास

चंद्र प्रकाश ने सिटी भास्कर काे बताया कि राजस्थानी अाैर किशनगढ़ की भाषा के पदाें का इतिहास हवेली संगीत के इतिहास से भी पुराना माना जाता है। ये काल 15वीं शताब्दी से पहले का है जबकि हवेली संगीत का विकास इसी शताब्दी से माना जाता है।

पं. तिलक गाेस्वामी ने सुनाए ये पद

पं. तिलक गाेस्वामी ने दस रागाें के समन्वय से बने अष्टछाप कवियाें के पद, राग वृंदावनी सारंग अाैर ताल चाैताल की रचना सारंग नयनी रे से कार्यक्रम की शुरुअात की।

शास्त्रीय संगीत का शुद्ध रूप हवेली संगीत : गाेकुलाेत्सव

‘भारतीय शास्त्रीय संगीत में हवेली संगीत का योगदान’ विषय पर हुए टॉक सैशन में पद्मभूषण गाेकुलाेत्सव महाराज ने कहा कि हवेली संगीत शास्त्रीय संगीत का शुद्ध रूप है। इसमें मंदिरों में गाए गए कई अालाप, गायन और पद शामिल हैं।

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