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लोगों की मांग, फूड की कीमत हो रिवाइज

City Reporter

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 05:01 AM IST
City Reporter
सिनेमा ओनर्स मुद्दे पर कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जयपुराइट्स चाहते हैं कि अंदर मिलने वाले खाने पीने की रेट को रिवाइज किया जाए। कीमतें फिक्स हों, जिसमें सिनेमा वालों का मुनाफा भी शामिल हो जाए। साथ ही पेशेंट्स, सीनियर सिटीजंस और बच्चों की खास जरूरतों और परेशानियों को देखते हुए खाना अलाउड होना चाहिए। जिससे तीन घंटे हॉल में बिताने वाले पेशेंट्स, बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी न हो। उल्लेखनीय है अभी जयपुर में मौजूद एक ही चेेन के अलग-अलग मल्टी प्लैक्स में भी कोल्डड्रिंक और खाने की चीजों की कीमतों में फर्क है। वहीं सिंगल स्क्रीन और स्वयं की प्रोपर्टी में सिनेमा चलाने वालों के यहां खाने-पीने के आइटम्स की कीमतें कम हैं। ऐसे में कुछ सिनेमा ओनर्स भी मल्टी प्लैक्स की कीमतों को रिवाइज करने के पक्ष में हैं।

क्या चाहते हैं : 28 नहीं 5-10 परसेंट हो टैक्स

लोगों और सिनेमा ओनर्स का कहना है टिकट पर लगने वाला 28 प्रतिशत जीएसटी को कम करते हुए गवर्नमेंट लोगों काे राहत दे। इससे टिकट की रेट कम हो जाएगी और फूड की कीमत तय होने से लोगों की जेब पर भार कम पड़ेगा। लग्जरी टैक्स को 5-10 परसेंट स्लैब पर लाने की जरूरत है।

नाराजगी : 10 गुना रेट लेना गलत

आंत्रप्रिन्योर रमेश कुमार कहते हैं उन्होंने 180 रु.की टिकट खरीदी। इंटरवेल में नाचोज के 200 रुपये चुकाने पड़े। 180 रुपये का पॉपकॉर्न लिया। इनकी एमआरपी 20 से 50 रु. के बीच है लेकिन इन्हें कई गुना बढ़ा कर बेचा जा रहा है । किसी भी फूड आइटम का 10 गुना तक रेट लेना गलत है।

मजबूरी : राइट टू लाइफ का हनन:

बनीपार्क निवासी एस एन शर्मा कहते हैं, हमारी जॉइंट फैमिली है तो मैंबर्स भी ज्यादा हैं। एक बार मूवी देखने जाने पर टिकट से तीन गुना तो खाने पीने पर खर्च हो जाता है। ऐसी मनमानी राइट टू लाइफ का हनन है।

कोर्ट व सरकार के फैसले के बाद डिसीजन लिया जा सकेगा। सिर्फ सिनेमा को ही कंट्रोल नहीं किया जा सकता, बल्कि अन्य जगहों पर भी कंट्रोल करना होगा। कोर्ट में 3 सितंबर को सुनवाई है जिसके बाद फैसला लिया जाएगा।

-नितिन एन दतर, एग्जीक्यूटिव कमेटी मैंबर ऑफ सिनेमा ऑनर्स एग्जीबिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया

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