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झोलाछाप लिख रहे एंटीबायोटिक दवाओं की हेवी डोज

हल्का सा बुखार हुआ हो या फिर खांसी-जुकाम, हर कोई कैमिस्ट से या फिर किसी झोलाछाप डॉक्टर से दवा लेकर जल्द ठीक होने की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 16, 2018, 03:05 AM IST

हल्का सा बुखार हुआ हो या फिर खांसी-जुकाम, हर कोई कैमिस्ट से या फिर किसी झोलाछाप डॉक्टर से दवा लेकर जल्द ठीक होने की कोशिश करता है। इस दौरान जो दवा दी जा रही है काफी स्ट्रांग एंटीबॉयोटिक्स होती है। अगली बार जब कोई तकलीफ होती है तो सरकारी अस्पताल की दवा काम ही नहीं करती है। इसके बाद फिर से स्ट्रांग एंटीबॉयोटिक्स लेनी पड़ती है, जिसका लोगों की सेहत पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसा ही खुलासा सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों द्वारा किया जा रहा है, जो बार-बार दवा देने के बाद भी ठीक नहीं हो पाते।

मरीजों के साथ हो रहे इस तरह के खिलवाड़ को लेकर भास्कर में खबरें प्रकाशित की गई, लेकिन विभाग केवल नोटिस ही थमा रहा है। ऐसे में झोलाछापों के हौंसले बुलंद हो रहे हैं। (शेष पेज 15)

खतरे में सेहत

ओमप्रकाश राव | मित्रपुरा

हल्का सा बुखार हुआ हो या फिर खांसी-जुकाम, हर कोई कैमिस्ट से या फिर किसी झोलाछाप डॉक्टर से दवा लेकर जल्द ठीक होने की कोशिश करता है। इस दौरान जो दवा दी जा रही है काफी स्ट्रांग एंटीबॉयोटिक्स होती है। अगली बार जब कोई तकलीफ होती है तो सरकारी अस्पताल की दवा काम ही नहीं करती है। इसके बाद फिर से स्ट्रांग एंटीबॉयोटिक्स लेनी पड़ती है, जिसका लोगों की सेहत पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसा ही खुलासा सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों द्वारा किया जा रहा है, जो बार-बार दवा देने के बाद भी ठीक नहीं हो पाते।

मरीजों के साथ हो रहे इस तरह के खिलवाड़ को लेकर भास्कर में खबरें प्रकाशित की गई, लेकिन विभाग केवल नोटिस ही थमा रहा है। ऐसे में झोलाछापों के हौंसले बुलंद हो रहे हैं। (शेष पेज 15)

स्ट्रांग दवाओं के बाद केस बिगड़ने पर सरकारी अस्पताल की दवा नहीं करती काम

केस-1

मझेवला गांव निवासी श्योपाल पुत्र रामजीलाल गुर्जर ने बुखार आने पर झोलाछाप चिकित्सक के पास इंजेक्शन लगावाया था, जिसके बाद अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद इलाज के लिए उसे अन्यत्र ले जाना पड़ा।

केस-2

बोरदा निवासी रामफूली प|ी रामलाल गुर्जर के झोलाछाप द्वारा इंजेक्शन लगाने से तबीयत बिगड़ गई थी। उसे महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा और वह करीब एक वर्ष तक उसे चारपाई पर ही रहना पड़ा था।

जिले में 7 माह में एक कार्रवाई, वो भी अभी तक पूरी नहीं

जिले में बढ़ते झोलाछाप की संख्या को लेकर और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ को लेकर भास्कर में खबरें प्रकाशित हुई। खबरों के बाद खाद्य विभाग और सीएमएचओ ने मित्रपुरा कस्बे के नजदीकी जस्टाना गांव में करीब 7 माह पूर्व एक मात्र झोलाछाप चिकित्सक पर कार्रवाई की, जो भी अभी तक पूरी नहीं हुई है। झोलाछाप चिकित्सक पर कार्रवाई कर खाद्य विभाग के नियंत्रक विनय कुमार विजय ने चिकित्सक का पूरा सामान तो जब्त कर लिया था, लेकिन दूसरे विभाग के अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलने के कारण संबंधित चिकित्सक पर प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।

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