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लो फ्लोर हड़ताल / एमडी - सातवें वेतन के अलावा ड्राइवर-कंडक्टर की सभी मांगे मान लीं



शहर की लाइफ लाइन लो फ्लोर बसों की हड़ताल से लाखों लोग रोज परेशान हो रहे है। शहर की लाइफ लाइन लो फ्लोर बसों की हड़ताल से लाखों लोग रोज परेशान हो रहे है।
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शहर की लाइफ लाइन लो फ्लोर बसों की हड़ताल से लाखों लोग रोज परेशान हो रहे है।शहर की लाइफ लाइन लो फ्लोर बसों की हड़ताल से लाखों लोग रोज परेशान हो रहे है।

यूनियन बोली, मांगे मान लीं तो प्रशासन ने अभी तक कार्यालय आदेश जारी क्यों नहीं किए ? 
 

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 05:33 PM IST

जयपुर। 22 दिन से चल रही लो फ्लोर बसों के ड्राइवर-कंडक्टरों की हड़ताल में नया मोड आ गया है। जेसीटीएसएल प्रशासन हड़ताल के पांच दिन बाद ही सातवें वेतन को छोड़कर कर्मचारियों की सभी मांगे मानने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि प्रशासन ने यूनियन पदाधिकारियों के साथ लिखित में अभी तक कोई समझौता नहीं किया।

लिखित में नहीं हुआ समझौता

  1. तो हड़ताल 14 दिन पहले ही खत्म हो जाती

    लिखित में समझौता हो जाता तो लो फ्लोर बसों में सफर कर रहे कर्मचारियों को इतनी परेशानी नहीं होती। हड़ताल करीब 14 दिन पहले ही खत्म हो जाती। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन ने लिखित में समझौता किया नहीं है।

  2. हड़ताल खत्म करने के लिए दबाव बना रहे हैं। समझौता में सातवें वेतन पर सहमति नहीं बनी थी तो जेसीटीएसएल प्रशासन को बाकी मांगों के कार्यालय आदेश जारी करने चाहिए थे। अब प्रशासन आचार संहिता का हवाला देकर कर्मचारियों से बात तक नहीं कर रहा है।

  3. ये मांगे बोर्ड से स्वीकृत हो गई, लिखित में समझौते की जरूरत नहीं - एमडी

    लिखित में समझौते नहीं होने पर जेसीटीएसएल के एमडी सुरेश कुमार ओला का कहना है कि हड़ताली कर्मचारियों की सातवें वेतन के अतिरिक्त मेडिकल सुविधा, परिवार के सदस्यों के फ्री पास की सुविधा, अनुकंपा नियुक्ति लागू हो गई, जिन्हें नौकरी से हटा दिया था, उन्हें वापस ले लिया, निलंबित चल रहे ड्राइवर-कंडक्टरों को जांच विचाराधीन रखते हुए भाल कर दिया, पहले वेतन में चार माह का गेप चल रहा था, उसे दो माह कर दिया गया है।

     

     

  4. ये सभी मांगे कर्मचारियों की मांग ली है। ऐसे में कर्मचारी यूनियन के साथ लिखित में समझौता करने की जरूरत ही नहीं है। अनुकंपा नियुक्ति की मांग पर तो दो कर्मचारियों को नियुक्ति भी मिल चुकी है।

  5. मांगे मानीं तो कार्यालय आदेश जारी क्यों नहीं किए - यूनियन

    जेसीटीएसएल एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष विपिन चौधरी का कहना है कि जेसीटीएसएल प्रशासन मांगे मानने का दावा कर रही है। सातवें वेतन को छोड़ कर बाकी मांगे मान ली तो अब तक कार्यालय आदेश जारी क्यों नहीं। कार्यालय आदेश मिल जाएंगे तो यूनियन हड़ताल खत्म कर देगी।

  6. प्रशासन हड़ताल पर चल रहे कर्मचारियों से वार्ता करने की अपेक्षा दबाव बना रहा है। प्रशासन अभी भी यूनियन पदाधिकारियों से आचार संहिता के दायरे में रह वार्ता करता है तो यूनियन हड़ताल खत्म करने के लिए राजी है।
     

    कंटेंट : नरेश वशिष्ठ

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