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  • Now The Marketing Companies Along With The Manufacturer Will Be Responsible For Adulteration In Medicine, The Central Government Made The Law

दवा में मिलावट के लिए अब निर्माता के साथ मार्केटिंग कंपनियां भी जिम्मेदार होंगी, केंद्र सरकार ने बनाया कानून

4 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • ड्रग टेक्निकल एडवायजरी बोर्ड की सिफारिश पर केन्द्र ने यह कानून बनाया, निर्माता कंपनियों की ही जवाबदेही तय थी
  • दवाओं में मिलावट पर 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान रखा है, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट में बदलाव का नोटिफिकेशन जारी किया है
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जयपुर (सुरेन्द्र स्वामी). दवाओं में मिलावट या क्वालिटी खराब पाए जाने पर अब निर्माता के साथ-साथ मार्केटिंग करने वाली कंपनियां  भी जिम्मेदार होंगी।  दवाओं में मिलावट पर 3 से 5 साल तक की  सजा का प्रावधान रखा है। ड्रग्स  एंड कॉस्मेटिक एक्ट में बदलाव का नोटिफिकेशन जारी किया है। अभी तक केवल निर्माता कंपनियों की ही जवाबदेही तय थी। अगले साल मार्च 2021 से यह नियम लागू हो जाएगा। 


नए नियमों के तहत छोटी कंपनियों से दवा बनवाने वाली बड़ी कंपनियां भी जिम्मेदारी होंगी। स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ.मनदीप भंडारी की अोर से गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है। ड्रग टेक्नीकल  एडवायजरी बोर्ड  (डीटीएबी) ने  वर्ष 2018 में ही दवा बनवाने वाली  के साथ-साथ मार्केटिंग करने वाली कंपनियों को भी जिम्मेदार मानने की सिफारिश की थी। राजस्थान फार्मास्यूटिकल मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कालानी नए कानून के तहत अब मार्केटिंग कंपनियां भी अब दवा क्वालिटी के लिए जिम्मेदार होगी। इस कानून को देखते हुए अब मार्केटिंग कंपनियों को भी अपना क्वालिटी एश्योरेंस सिस्टम को विकसित करना चाहिए।    

मरीजों को फायदा मिलेगा
सरकार ने दवा कंपनियों को एक साल का मौका दिया है। दवाओं को लेकर हर बार शिकायत या विवाद सामने आते रहे हैं। कभी मिलावट या कभी नकली की शिकायत देखने को मिलती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए कानून से दवाअों की क्वालिटी अच्छी होने से मरीजों को फायदा मिलेगा। राजस्थान समेत देशभर में 60 से 70 फीसदी से ज्यादा दवाएं एेसी है, जो छोटी-छोटी कंपनियां बनाती है। बड़ी कंपनियां दवा का भंडारण नियमानुसार नहीं करने से दवाएं खराब हो जाती है। जिसकी सजा दवा तैयार करने वाली छोटी कंपनियों को भुगतना पड़ता है। 

मौजूदा कानून 
जो कंपनियां दवाएं बनाती हैं, वही जिम्मेदार मानी जाती हैं। इसी का फायदा बड़ी कंपनियां उठाती थीं। जो लाइसेंस लेकर खुद मार्केटिंग करती थीं। जबकि मैन्युफैक्चरिंग किसी छोटी कंपनी से कराती थीं और बच निकलती थी। लेकिन अब नए कानून के तहत दवाओं की क्वालिटी खराब पाए जाने पर तीन से पांच साल की सजा हो सकती है। ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा ने बताया कि केन्द्र सरकार की ओर से नए नियमों के तहत अब निर्माता के साथ-साथ मार्केटिंग कंपनियां भी जिम्मेदारी होगी। ये नियम मार्च -2021 से प्रभावी होंगे।- 



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