सांभर / 15 किमी. क्षेत्र में घायल व मृत देशी विदेशी पक्षियों के लिए सर्चिंग, 5 दिन में मिले 25 प्रजातियों के 8,065 शव, 165 को बचाया

वन एवं पर्यावरण मंत्री ने लिया जायजा वन एवं पर्यावरण मंत्री ने लिया जायजा
पक्षियों को तलाशने के लिए सर्च अभियान पक्षियों को तलाशने के लिए सर्च अभियान
राहत कार्य में जुटे सिविल डिफेंस के कार्यकर्ता राहत कार्य में जुटे सिविल डिफेंस के कार्यकर्ता
झील के आसपास राहत कार्य में जुटे सिविलडिफेंस कर्मी झील के आसपास राहत कार्य में जुटे सिविलडिफेंस कर्मी
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वन एवं पर्यावरण मंत्री ने लिया जायजावन एवं पर्यावरण मंत्री ने लिया जायजा
पक्षियों को तलाशने के लिए सर्च अभियानपक्षियों को तलाशने के लिए सर्च अभियान
राहत कार्य में जुटे सिविल डिफेंस के कार्यकर्ताराहत कार्य में जुटे सिविल डिफेंस के कार्यकर्ता
झील के आसपास राहत कार्य में जुटे सिविलडिफेंस कर्मीझील के आसपास राहत कार्य में जुटे सिविलडिफेंस कर्मी

  • 7 हजार 829 शवों को इकट्‌ठा कर दफनाया गया
  • वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई ने लिया जायजा
  • सर्च अभियान में सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों सहित 150 कर्मचारी जुटे

दैनिक भास्कर

Nov 15, 2019, 09:32 PM IST

जयपुर. देश की सबसे बड़ी नमक की झील सांभर में देशी विदेशी पक्षियों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। 11 नवंबर से 15 नवंबर के बीच अब तक 25 देशी विदेशी प्रजातियों के 8 हजार 65 शव मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें 7 हजार 829 शवों को इकट्‌ठा कर विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी में जमीन में दफना दिया गया है। वहीं, करीब 165 पक्षियों को रेस्क्यू कर बचाया गया है। उनका मेडिकल टीम उपचार भी कर रही है।

 

वहीं, मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरूवार रात को एक मीटिंग बुलाई। इसके बाद शुक्रवार को खुद वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई अपने महकमे के अधिकारियों के साथ सांभर पहुंचे। उन्होंने वहां चल रहे राहत कार्य का जायजा लिया। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन में और तेजी आ गई। सांभर लेक के करीब 15 किलोमीटर के इलाके में घायल व मृत पक्षियों के लिए सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है।

 

जिसमें सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ, नगरपालिका और पशुपालन विभाग के 150 से भी अधिक स्वयंसेवकों, कर्मचारी-अधिकारी हिस्सा ले रहे है। वहीं, पक्षियों की मौत का मामला सामने आने पर 10 नवंबर को पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने इलाके का दौरा किया था। तब बीमार पक्षियों में limb paralysis and diarrhoea के लक्षण मिलने और इससे मौत होने की संभावना जताई गई थी।

 

वहीं, अब बीकानेर में RAJUVAS से आए विशेषज्ञ डॉ. ए.के. कटारिया ने Botulism नामक बीमारी से पक्षियों की मौत होने की पूर्ण संभावना जताई है। उन्होंने ही पक्षियों के शवों को जल्द से जल्द दफनाने का सुझाव दिया। डॉ. कटारिया का कहना है कि शव कम होने व तापमान के कम होने पर बॉटुलिज्म का प्रभाव कम हो जाएगा।

 

पक्षियों की मौत का कारण जानने के लिए इंडियन वेटेनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बरेली को भी नमूने भेजे गए है। इसके अलावा पशु चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा एकत्र नमूनों को राष्ट्रीय उच्च् सुरक्षा पशु रोग केंद्र, भोपाल भेजा गया था। 14 नवंबर को आई रिपोर्ट के मुताबिक पक्षियों में बर्ड फ्लू नहीं पाया गया।

 

इसी तरह, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की एक्सपर्ट डॉ. अंजू बड़ोद के अनुसार पानी में नमक की सांद्रता ज्यादा होने के अलावा कोई मिलावट नहीं पाई गई है। इसके अलावा मौत के कारणों के परीक्षण के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के विशेषज्ञ भी 13 नवंबर को सांभर पहुंच गए थे। इसके अलावा सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री से डॉ. मुरलीधरन व उनकी टीम भी पहुंची है।

 

यही नहीं, मामले में राज्य पशुपालन विभाग ने केंद्रीय पशुपालन विभाग से मदद मांगी है। फिलहाल क्षेत्र में 12 पशु चिकित्साधिकारी व दो सहायकों को तैनात किया गया है। वहीं, नागौर व अजमेर के जिला कलेक्टर तथा इन जिलों के वन व पशु अधिकारियों को याहां कार्रवाई के लिए पाबंद किया गया है। 

 

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