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मुनि तरुण सागर का बखान शब्दों में नहीं हो सकता, न ही कल्पनाओं में

शहर एक बार फिर मुनि तरुण सागर के नाम से गुंजायमान हुआ। अवसर था मुनिश्री की रचित अंतिम कृति कड़वे प्रवचन भाग 10 के...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 04:20 AM IST
Jaipur - मुनि तरुण सागर का बखान शब्दों में नहीं हो सकता, न ही कल्पनाओं में
शहर एक बार फिर मुनि तरुण सागर के नाम से गुंजायमान हुआ। अवसर था मुनिश्री की रचित अंतिम कृति कड़वे प्रवचन भाग 10 के विमोचन का। गणिनी आर्यिका र| गौरवमती माताजी ससंघ सानिध्य में जनकपुरी ज्योति नगर के दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में विमोचन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मुनि को विनयांजलि अर्पित की। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राष्ट्र संत मुनि तरुण सागर महाराज का देवलोक गमन हो गया था। यह पहला अवसर रहा है जब मुनिश्री की अनुपस्थिति में उनके कड़वे प्रवचन की श्रंखला का विमोचन समाज के लोगों को कांटों भरा सफर के सामान लग रहा था।

विमोचन से पूर्व मुनि भक्त प्रो.रमेश शाह व डॉ.विनोद शाह परिवार ने चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इस दौरान मंदिर समिति अध्यक्ष प्रदीप चांदवाड़, मंत्री जितेंद्र मोहन जैन, प्रमोद बाकलीवाल आदि मौजूद थे।

मुनिश्री ने जयपुर प्रवास के दौरान की थी कृति की कल्पना : इस कृति की विशेषता यही है कि इसकी कल्पना मुनिश्री ने जयपुर प्रवास के दौरान इसी वर्ष की थी। यह जयपुर में ही प्रकाशित हुई है। इसके प्रथम प्रकाशन की 20 हजार कॉपियां प्रकाशित की गई हैं। वैसे तो कड़वे प्रवचन के सभी 9 भाग अति विख्यात हैं लेकिन इस बार की कृति मुनिश्री के देवलोक गमन के बाद ऐतिहासिक हो गई है।

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