नीट पीजी / सिर्फ राजस्थान में मेडिकल कॉलेज कराता है नीट काउंसलिंग, बाकी राज्यों में चिकित्सा शिक्षा विभाग

NEET Counseling only provides medical colleges in Rajasthan, Medical Education Department in other states
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NEET Counseling only provides medical colleges in Rajasthan, Medical Education Department in other states

  • डेंटल कॉलेज से विवाद के बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज को दिया था जिम्मा
  • एसएमएस के प्रिंसिपल ने ठुकराया नीट काउंसलिंग चेयरमैन का पद

दैनिक भास्कर

Feb 09, 2020, 02:03 AM IST

जयपुर (संदीप शर्मा). नीट काउंसलिंग काे लेकर एसएमएस मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल अाैर स्वास्थ्य विभाग के बीच विवाद जारी है। एसएमएस मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल डाॅ. सुधीर भंडारी के काउंसलिंग से इनकार कर दिया है, लेकिन नीट काउंसलिंग को लेकर राजस्थान में यह विवाद नया नहीं है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से पहले आरयूएचएस के डेंटल कॉलेज में काउंसलिंग कराई गई थी। यह भी विवादों में आई। इसके बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज को नीट काउंसलिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई। देश में राजस्थान के अलावा अन्य किसी भी राज्य में कोई भी मेडिकल कॉलेज नीट काउंसलिंग नहीं कराता। बाकी राज्यों में चिकित्सा शिक्षा विभाग ही काउंसलिंग का काम देखता है। यदि यह विवाद की स्थिति बनी रही तो सरकार के सामने तीन स्थितियां होंगी, जिनके बाद ही बेहतर तरीके से काउंसलिंग हो सकेगी। इनमें अन्य किसी को चेयरमैन बनाने और सरकार स्तर पर काउंसलिंग कराना जैसे निर्णय हो सकते हैं।

सरकार के पास ये 3 विकल्प

  1. यदि एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल नीट काउंसलिंग के चेयरमैन पद को स्वीकार नहीं करते हैं तो सरकार उनके स्थान पर किसी भी एडिशनल प्रिंसिपल को यह काम सौंपकर काउंसलिंग करा सकती है।
  2. अन्य राज्यों की तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग को काउंसिलंग की जिम्मेदारी सौंप सकती है। हालांकि इसमें मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स व स्टाफ की मदद ली जा सकती है।
  3. डेंटल या आरयूएचएस को एक बार फिर से काउंसलिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। 

काउंसलिंग के लिए डॉक्टर एक्सपर्ट नहीं, हमें बाद में कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं : भंडारी
नीट काउंसलिंग के लिए डॉक्टर्स एक्सपर्ट नहीं होते हैं। वैसे भी केवल राजस्थान में ही मेडिकल कॉलेज काउंसलिंग कराते हैं, अन्य कहीं भी नहीं। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि 38 मेडिकल कॉलेजों के मेंबर कमेटी में होते हैं, लेकिन जब भी कोई फैसला लिया जाता है तो उसे गवर्नमेंट मेंबर बदल देते हैं। ऐसा कई बार हुआ है। ऐसे में बेहतर यह हो सकता है कि खुद चिकित्सा शिक्षा विभाग यह कराए ताकि अच्छे तरीके से काउंसलिंग हो सके। नीट काउंसलिंग के दौरान और बाद में बाद में कई केस होते हैं जिनमें डॉक्टर्स को सालों तक कोर्ट के चक्कर लगाते रहना पड़ता है। हम खुद यह पूरा सिस्टम नहीं समझते हैं। और सरकार चाहे तो किसी भी मेडिकल कॉलेज स्तर पर भी यह करा सकती है। 

एसएमएस के प्रिंसिपल ने ठुकराया नीट काउंसलिंग चेयरमैन का पद
एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी ने नीट काउंसलिंग के चेयरमैन पर बने रहने से मना कर दिया था। भंडारी ने कहा था कि काउंसलिंग का काम मेडिकल शिक्षा निदेशालय का है। वहीं चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया का भी कहना था कि नीट पीजी काउंसलिंग तो जयपुर में ही होगी। हालांकि कहां होगी- यह तय नहीं। सवाल यह उठा कि यदि एसएमएस में काउंसलिंग नहीं हुई तो यह जिम्मेदारी कौन लेगा। 

एसएमएस 2 बार करा चुका काउंसलिंग
वर्ष 2015, 2016 और 2017 में डेंटल कॉलेज में नीट की काउंसलिंग हुई। आरयूएचएस ने यह काउंसलिंग कराई थी। इसके बाद वर्ष 2018 और 2019 में एसएमएस मेडिकल कॉलेज को काउंसलिंग का जिम्मा दिया गया था। इस बार यहां भी विवाद हो गया।

आज तक कोर्ट में चल रहे केस 
वर्ष 2015 से चलने वाली नीट काउंसलिंग के दौरान और बाद में जो भी केस हुए, उनमें बोर्ड सदस्यों और चेयरमैन को जाना पड़ता है। अभी तक 35 से अधिक केस चल रहे हैं और हर तारीख पर जाना पड़ता है।

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