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8 साल, 2 कानून, फिर भी 7 हजार स्कूलों में फीस कमेटी नहीं, 48% तक फीस वृद्धि

बड़ा सवाल : जिन स्कूलों में फीस कमेटी है वहां भी अभिभावकों को राहत क्यों नहीं

विनोद मित्तल | Last Modified - Apr 17, 2018, 12:11 AM IST

  • 8 साल, 2 कानून, फिर भी 7 हजार स्कूलों में फीस कमेटी नहीं, 48% तक फीस वृद्धि
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    ये स्कूल हैं या बिजनेस मशीन!

    जयपुर. निजी स्कूलों में मनमानी रोकने के लिए लागू राजस्थान फीस विनियमन एक्ट 2016 भी बढ़ती फीस से राहत नहीं दिला पाया है। एक्ट में अभिभावकों के हाथों में ही स्कूल की फीस तय करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन ना तो स्कूलों में फीस कमेटी बनी और ना ही अभिभावकों को कमेटी के बारे में कोई जानकारी दी गई। हालत यह है कि निजी स्कूलों में 10 प्रतिशत से लेकर 48 फीसदी तक की फीस बढ़ोतरी कर दी गई। प्रदेश के 7 हजार निजी स्कूलों में तो फीस कमेटी ही नहीं बनी।


    - सत्र प्रारंभ होते ही अभिभावकों के आंदोलनों से साबित हो गया है कि फीस एक्ट से कोई राहत नहीं मिली है। प्रदेश में वर्तमान में 33091 निजी स्कूल आरटीई पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। इनमें से केवल 25697 निजी स्कूलों ने ही फीस कमेटी का गठन किया है। शेष 7394 निजी स्कूलों में तो फीस कमेटी ही नहीं बनी। फीस कमेटी गठन की जानकारी भी निजी स्कूल संचालक छुपा जाते, लेकिन सरकार ने इसे आरटीई से जोड़ दिया। इस कारण उन्हें फीस कमेटी के गठन और फीस तय करने की जानकारी देनी पड़ रही है।


    - गौरतलब है कि आठ सालों में दो कानून लाए जाने के बावजूद फीस पर सरकार लगाम नहीं लगा सकी है। पहली बार 2010 में सरकार ने तीन साल में कुल 33 फीसदी से अधिक फीस बढाने पर रोक लगाई थी। 2013 में तत्कालीन गहलोत सरकार ने राजस्थान विद्यालय (फीस के संग्रहण का विनियमन) अधिनियम लागू किया। राज्यस्तरीय फीस निर्धारण कमेटी के गठन का प्रावधान किया गया था। 1 जुलाई 2016 को भाजपा सरकार ने महाराष्ट्र पैटर्न पर नया फीस कानून लागू किया। इसमें स्कूल स्तर पर फीस निर्धारण कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया था।

    सरकार. फीस एक्ट का उल्लंघन तो कीजिए शिकायत
    फीस एक्ट का कहीं उल्लंघन हो रहा है तो शिकायत की जा सकती है। संभाग और राज्य स्तरीय कमेटी बनाई गई है। जिला शिक्षा अधिकारी को भी शिकायत की जा सकती है। - वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्यमंत्री

    अभिभावक. विभाग स्कूलों पर सख्ती करे तभी राहत मिलेगी
    निजी स्कूल अभिभावकों को राहत नहीं दे रहे हैं। फीस एक्ट का पालन नहीं करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग को सख्ती बरतनी चाहिए।
    - दिनेश कांवट, संयोजक, पैरेंट्स वेलफेयर

    स्कूल. अभिभावक समितियों के जरिए ही तय की फीस
    स्कूल स्तरीय फीस कमेटी में तय फीस ही स्कूलों में ली जा रही है। अभिभावकों ने खुद यह फीस तय की है। कोई विरोध करता है तो गलत है। वैसे शिकायत का विकल्प खुला है।

    - अनिल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, स्कूल शिक्षा परिवार

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    न सरकार को, न हमें...सबसे पवित्र पेशे को धोखा दे रहे हैं स्कूल
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