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रेस्ट हाउस का किराया 3 स्टार होटल से ज्यादा, 5 माह में कोई टूरिस्ट नहीं ठहरा

इसका हाल तब ऐसा है जब सीएम ने इसे जल्द ही डवलप करने के लिए कहा था

Bhaskar News | Last Modified - May 02, 2018, 05:43 AM IST

रेस्ट हाउस का किराया 3 स्टार होटल से ज्यादा, 5 माह में कोई टूरिस्ट नहीं ठहरा
  • नंबर गेम: अफसरों ने खुद के नंबर बढ़ाने के लिए बगैर किसी प्लानिंग के पुराने स्ट्रक्चर पर ताबड़तोड़ 70 लाख खर्च कर डाले
    नाकामी: खूबसूरत रेस्ट हाउस तैयार हुआ तो खुद चलाने के बजाए पीपीपी मोड पर देना फाइनल किया

जयपुर. हाथी गांव जैसी खूबसूरत-प्राकृतिक लोकेशन पर 5 महीने से तैयार थ्री स्टार सरीखे रेस्ट हाउस को मेहमानों का इंतजार है। रेस्ट हाउस को बनाने के लिए जल्दबाजी में जिस कदर पैसा खर्च हुआ, अब उसका उपयोग लेने में उतनी दी देरी हो रही है। पुराने स्ट्रक्चर को चमकाने के लिए 70 लाख रुपए खर्च कर वन विभाग खुद चलाने से बैकफुट पर आ गया। जबकि इसकी लोकेशन और सुविधाओं के लिए वन विभाग विभाग प्रति रूम किराया 7 हजार रुपए करने जा रहा था। हालांकि फिर इसे पीपीपी मोड पर चलाना तय हुआ। क्योंकि यहां टूरिस्ट लाने के लिए मार्केटिंग जैसे काम वो नहीं कर सकता। इस काम के लिए जो टेंडर किया गया, उसमें विभाग की उम्मीदों को तब बड़ा झटका लगा जब किसी ने भी इसे लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब वन विभाग स्पष्ट तौर पर निर्णय नहीं ले पा रहा कि आखिर इसका उपयोग कैसे तय कराया जाए? अनिर्णय और अनुपयोग की स्थिति तब है, जबकि मुख्यमंत्री ने खुद यहां विजिट कर टूरिज्म के लिहाज से इसे जल्द काम लेने की बात कही थी।


मोटे तौर पर फिर से टेंडर लगाने पर विचार है, जिसके लिए शर्तों में और शिथिलता दी जाएगी। इस बीच खूबसूरत रेस्ट हाउस को व्यवस्थित बनाए रखना भी मुश्किल हो रहा है। वन विभाग की सोच इस तरह के काम से मेल खाती नजर नहीं आ रही है, जिसके चलते वो किसी होटेलियर या बिजनस मेन को ही रेस्ट हाउस की जिम्मेदारी देना चाह रहे हैं। जबकि इससे पहले विभाग के पास खुद के कई रेस्ट हाउस हैं। हालांकि उनकी हालत और चलाने का नजरिया किसी से छिपा नहीं है।

रेस्ट हाउस में 4 टैंट और 6 कमरों को सालाना 5 लाख में देते, अब और क्या रियायत देंगे?
- दिल्ली रोड पर कुंडा से महज आधा किलोमीटर दूरी पर बने हाथी गांव जैसी लोकेशन पर तैयार खूबसूरत रेस्ट हाउस के टेंडर में किसी का दिलचस्पी नहीं दिखाना विभाग की भी समझ से परे है। टेंडर शर्तों के मुताबिक 4 कमरों, बड़े चौक, बरामदे, पार्किंग वाले रेस्टहाउस के लिए सालाना 5 लाख रुपए किराया रखा गया था। इसमें भी छूट देते हुए 4 अतिरिक्त टेंट लगाने सहित दूसरी ओर खाली पड़े 6 कमरों को गार्ड, स्टोर रूम के तौर पर दिया जा रहा था। लोकेशन ऐसी कि पास ही कुंड में हाथियों को नहाते हुए देखना और सवारी का लुत्फ। इसके बावजूद किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई तो अब वन विभाग और क्या रियायत देगा, यह देखने वाली बात है।

रेस्ट हाउस के लिए टेंडर में कोई नहीं आया तो हम दुबारा से टेंडर करेंगे। डीएफओ को इसके लिए कहा हुआ है, वो ही आगे की प्लानिंग बताएंगे।
-अरिंदम तोमर, एपीसीसीएफ


हमने हाथी गांव वाले रेस्ट हाउस के लिए जो टेंडर किया, उसके लिए क्वेरीज तो खूब आई, लेकिन किसी फर्म ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस तरह के रेस्ट हाउस की मार्केटिंग कर टूरिस्ट लाने का काम विभाग के बजाए संबंधित फील्ड के लोग ही कर सकते हैं, जिसके लिए री-टेंडर करने को लिखा है।
-सुदर्शन शर्मा, डीएफओ

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Web Title: rest haaus ka kiraayaa 3 staar hotl se jyada, 5 maah mein koee turist nahi thharaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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