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राजस्थान / 41 साल पहले रखा राजनीति में कदम; छात्र नेता से लोकसभा अध्यक्ष पद तक पहुंचे ओम बिड़ला



ओम बिड़ला अपने परिवार के साथ। ओम बिड़ला अपने परिवार के साथ।
ओम बिड़ला की बड़े बेटी की शादी में पहुंचे थे तमाम नेता। ओम बिड़ला की बड़े बेटी की शादी में पहुंचे थे तमाम नेता।
ओम बिड़ला पिता के साथ। ओम बिड़ला पिता के साथ।
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ओम बिड़ला अपने परिवार के साथ।ओम बिड़ला अपने परिवार के साथ।
ओम बिड़ला की बड़े बेटी की शादी में पहुंचे थे तमाम नेता।ओम बिड़ला की बड़े बेटी की शादी में पहुंचे थे तमाम नेता।
ओम बिड़ला पिता के साथ।ओम बिड़ला पिता के साथ।

  • ओम बिड़ला ने पांच चुनाव लड़े हैं और पांचों ही जीते
  • वे तीन बार विधायक रह चुके हैं और दूसरी बार सांसद बने हैं

Dainik Bhaskar

Jun 19, 2019, 01:03 PM IST

कोटा. भाजपा सांसद ओम बिड़ला 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष बन गए हैं। वे राजस्थान की कोटा-बूंदी लोकसभा सीट से सांसद हैं। बुधवार सुबह से ही बिड़ला के घर में बधाई देने वालों का आना जारी है। इस दौरान उनके पिता ने कहा कि बेटे ने देश में बहुत नाम किया। वह खुशी शब्दों में जाहिर नहीं कर सकते। 41 साल की राजनीति में लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचे ओम बिड़ला के पिता एक सरकारी कर्मचारी रहे हैं। ओम ने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी। जिसके बाद वे पार्टी में लगातार अहम पदों पर रहे।

ओम बिरला का जन्म श्रीकृष्ण बिड़ला और शकुंतला बिड़ला के घर 4 दिसम्बर 1962 कोटा में हुआ था। उनके पिता सरकारी कर्मचारी रहे हैं। वे सेल टैक्स विभाग से रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोटा से ही पूरी की। इसके बाद महर्षि दयानन्द कॉलेज से बीकॉम और एमकॉम की डिग्री ली। उन्होंने राजनैतिक जीवन की शुरुआत छात्रसंघ चुनाव से की। इस दौरान ओम बिड़ला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुमानपुरा के छात्र अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ वे कोटा के राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय के संयुक्त सचिव भी रहे।

 

पिछले 30 साल से संगठन में सक्रिय

उन्होंने अब तक पांच चुनाव लड़े हैं और पांचों ही जीते हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं और दूसरी बार सांसद बने हैं। वे 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनाव में काेटा-बूंदी सीट से पहली बार सांसद बने। इसके बाद अब 2019 में इसी सीट से सांसद बने। इससे पहले 2003, 2008 और 2013 में कोटा से ही विधायक चुने गए थे। उन्हाेंने छात्रसंघ राजनीति से कैरियर की शुरुआत की। इसके बाद 1992 से 97 तक प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे। बाद में राजस्थान और राष्ट्रीय स्तर पर कोऑपरेटिव मूवमेंट से भी जुड़े। बिरला 2003 में पहली बार कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल काे हराकर विधायक चुने गए। 

 

1977 में मल्टीपरपज स्कूल के अध्यक्ष बने, मंत्री की कार के आगे लेटकर सुर्खियां बटोरी
मल्टीपरपज स्कूल के प्रेसीडेंट बने। उसी साल पहला आंदोलन कोटा के उद्योगों से निकलने वाले धुएं और बेरोजगारी के मुद्दे पर किया। इसी दौरान उन्हाेंने तत्कालीन यूडीएच मंत्री भंवरलाल शर्मा का रास्ता रोक दिया और उनकी कार के आगे लेट गया। यहीं से उनके राजनीतिक आंदोलन की विधिवत शुरुआत भी हो गई।

 

1982-83 कॉमर्स कॉलेज का चुनाव 2 वोट से हारे

कॉमर्स कॉलेज के प्रेसीडेंट का 1982-83 का चुनाव ओम बिरला 2 वोट से हार गए थे। इस चुनाव में करण सिंह जीते थे, जो बाद में छबड़ा से कांग्रेस विधायक रहे। करण सिंह गर्व से कहते हैं-मैं एकमात्र व्यक्ति हूं, जिसने बिरला को हराया था। हालांकि मुझे खुशी है कि मेरा दोस्त यहां तक पहुंच रहा है।

 

1993 बूंदी से टिकट कटा, 1998 में नैनवां से लड़ने का मौका छोड़ा

उन्हें 1993 में बूंदी से विधानसभा टिकट दिया गया तो स्थानीय नेताओं से विरोध शुरू कर दिया और पार्टी को टिकट बदलना पड़ा। इसके बाद 1998 में बूंदी जिले की ही नैनवां सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला, लेकिन इसे बिरला ने ठुकरा दिया, क्योंकि वहां उनका कोई जनाधार नहीं था।

 

2003 पहली बार कोटा सीट से विधायक बने

पहला विधानसभा चुनाव 2003 में कोटा विधानसभा से लड़ा और कद्‌दावर नेता शांती धारीवाल को हराया। 2008 और 2013 में कोटा दक्षिण से जीते। 2014 का लोकसभा चुनाव तत्कालीन सांसद इज्यराजसिंह को हराकर जीता। 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी रामनारायण मीणा को शिकस्त दी।

 

6 भाई और तीन 3 बहने हैं ओम बिड़ला के
ओम बिड़ला का परिवार काफी बड़ा है। उनके 6 भाई और तीन बहने हैं। सन् 1991 में ओम बिरला की शादी अमिता बिड़ला के साथ हुई। जिनकी दो बेटियां आकांक्षा और अंजली हैं। जिसमें से बड़ी बेटी का नाम आकांक्षा है। जो सीए कर चुकी हैं। साथ ही उनकी शादी भी हो चुकी है। छोटी बेटी अंजली बिड़ला फिल्हाल आरएएस की तैयारी में जुटी है। 

राजनीतिक सफर के दौरान इन अहम पदों पर भी रहे

 

  • 17वीं लोकसभा में कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान सांसद हैं।
  • 2014-2019 में भी 16वीं लोकसभा में कोटा-बूंदी से सांसद रहे।
  • 2003, 2008 व 2013 में 12वीं, 13वीं एवं 14वीं राजस्थान विधानसभा में कोटा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार सदस्य
  • भारतीय जनता युवा मोर्चा के छः वर्ष तक राष्ट्रीय उपाध्यक रहे।
  • भारतीय जनता युवा मोर्चा राजस्थान प्रदेश के लगातार छः वर्ष प्रदेशाध्यक्ष रहे।
  • भारतीय जनता युवा मोर्चा के लगातार 4 वर्ष जिलाध्यक्ष रहे।
  • पूर्व उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लि. नई दिल्ली
  • पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लि, जयपुर।
  • पूर्व निदेशक, कोल इंडिया लि., नई दिल्ली
  • पूर्व निदेशक, नेहरू युवा केंन्द्र, नई दिल्ली
  • पूर्व अध्यक्ष, कोटा सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार लि., कोटा।
  • पूर्व संयुक्त सचिव, राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय, कोटा।
  • पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुमानपुरा, कोटा।
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