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सियासत शुरू; 5 अप्रैल को वोटिंग, 7 को रिजल्ट; मेयर 16 को चुना जाएगा... विपक्ष ने 9 दिन का हिसाब मांगा

एक वर्ष पहले
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विधायक व पूर्व महापौर अशोक लाहोटी और शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष  प्रताप सिंह- फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
विधायक व पूर्व महापौर अशोक लाहोटी और शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष  प्रताप सिंह- फाइल फोटो।
  • पूर्व महापौर लाहौटी ने कहा- चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा, पार्षद खरीद के लिए 9 दिन दिए
  • कांग्रेस जिला अध्यक्ष बोले- आयोग अपने हिसाब से ही चलता है, राजनीति चमकाने को बेतुके बयान ठीक नहीं

जयपुर. चुनाव आयोग की ओर से तीन नगर निगमों के चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के साथ ही राजनीति पार्टियों ने आराेप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिया है। बीजेपी नेता परिणाम के बाद मेयर चुनाव के लिए दिए गए 9 दिन काे सही नहीं बता रहे हैं। इन नेताओं का आराेप है कि चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम का रहा है। पार्षदों की खरीद फारोख्त के लिए 9 दिन का समय दिया गया है। अभी तक कभी इतना समय नहीं दिया गया, वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर नहीं अपने हिसाब से काम करता है।

पहली बार मेयर चुनाव के लिए 9 दिन :
विधायक व पूर्व महापौर अशोक लाहोटी ने कहा कि चुनाव का परिणाम 7 अप्रैल को ही आ जाएगा। लेकिन पहली बार महापौर का चुनाव 9 दिन बाद यानी 16 अप्रैल को कराया जा रहा है। कांग्रेस सरकार खरीद-फरोख्त व सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर अपने महापौर बनाना चाहती है। नाम वापसी के लिए भी तीन दिन का समय जान-बूझकर दिया गया है। फिर उपमहापौर का चुनाव एक दिन में कैसे होगा और उसमें नाम वापसी के लिए केवल 2 घंटे और 2 घंटे ही मतदान के लिए दिए गए हैं। निर्वाचन विभाग राज्य सरकार की कठपुतली की तरह काम कर रहा है। वह सरकार के दबाव में है।

लाहाेटी मानसिक संतुलन खाे चुके हैं:
शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष  प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि लाहोटी का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है। चुनाव आयोग सरकार के निर्देशों से नहीं चलता। आयोग अपने हिसाब से काम करता है। राजनीति के लिए गलत बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। एेसे बयान का काेई महत्त्व ही नहीं है। कांग्रेस के लिए ताे चाहे परिणाम के दूसरे दिन ही मेयर का चुनाव करा लाे। दाेनाें निगम में कांग्रेस का ही मेयर बनेगा। हमें ताे पता भी नहीं था कि अाज निगम चुनाव कार्यक्रम घोषित हाे जाएंगे। राज्य निर्वाचन अायाेग के अफसरों की नियुक्ति भाजपा सरकार के समय हुई थी। पंचायतीराज चुनाव के समय चुनाव अायाेग अाैर कांग्रेस सरकार के बीच हुए मतभेद जगजाहिर है। 

बाड़ाबंदी में ऐसे हारी थी बीजेपी
पिछले बोर्ड के 5 साल में 3 महापौर बने थे। अशोक लाहोटी के विधायक बनने और मेयर पद से इस्तीफा देने के बाद अजमेर रोड स्थित एक रिसोर्ट में पार्षदों की बाड़ाबंदी की गई थी। शहर की सरकार बनाने के लिए विष्णु लाटा ने बाड़े की दीवार लांघी थी। बीजेपी से बागी लाटा ने महापौर का चुनाव लड़ा। कांग्रेस के समर्थन व बीजेपी के 20 पार्षदों की क्रॉस वोटिंग से लाटा मेयर बने थे। क्रॉस वोटिंग के लिए 4 पार्षदों ने लॉबिंग की थी।

बीजेपी-कांग्रेस नेता हुए आमने-सामने इस मामले में
जयपुर में दाे निगम ग्रेटर व हेरिटेज की वोटिंग 5 अप्रैल काे होगी। 7 अप्रैल काे परिणाम जारी हाेंगे। परिणाम के 9 दिन बाद 16 अप्रैल काे मेयर के चुनाव हाेने हैं। डिप्टी मेयर के चुनाव 17 अप्रैल काे हाेने हैं। बीजेपी नेताओं का अाराेप है कि चुनाव अायाेग ने सरकार के इशारे पर 9 दिन दिए हैं ताकि इस दाैरान पार्षदों की खरीद-फराेख्त हाे सके। वहीं, डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए एक दिन का समय दिया हैं। एक ही दिन में नामांकन, नाम वापसी, मतदान व परिणाम करवाया जा रहा है।

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