राजस्थान / सियार का शिकार करते हुए गांव में घुसा पैंथर, 7 घंटे बाद किया पेड़ पर ट्रैंक्यूलाइज

पैंथर के पेड़ पर होने की सूचना पर वहां ग्रामीण एकत्र हो गए। पैंथर के पेड़ पर होने की सूचना पर वहां ग्रामीण एकत्र हो गए।
पेड़ पर बैठा पैंथर। पेड़ पर बैठा पैंथर।
पैंथर को बेहोश करने के बाद जाल में लेते हुए। पैंथर को बेहोश करने के बाद जाल में लेते हुए।
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पैंथर के पेड़ पर होने की सूचना पर वहां ग्रामीण एकत्र हो गए।पैंथर के पेड़ पर होने की सूचना पर वहां ग्रामीण एकत्र हो गए।
पेड़ पर बैठा पैंथर।पेड़ पर बैठा पैंथर।
पैंथर को बेहोश करने के बाद जाल में लेते हुए।पैंथर को बेहोश करने के बाद जाल में लेते हुए।

  • तीन दिन पहले ही जयपुर शहर में घुस आए पैंथर को 21 घंटे बाद किया था रेस्क्यू
  • दो सियार मारकर उन्हें पेड़ पर ले गया पैंथर, एक घंटे की मशक्कत के बाद किया रेस्क्यू

दैनिक भास्कर

Dec 17, 2019, 04:39 PM IST

बांदीकुई (दौसा)। बांदीकुई के गुडलिया कस्बे के पास मंगलवार को ग्रामीण के पेड़ पर पैंथर देखकर होश उड़ गए। पैंथर के गांव में आने की सूचना आग की तरह फैली और देखते ही देखते वहां बड़ी संख्या मे ग्रामीण एकत्र हो गए। जयपुर से वन विभाग की टीम को बुलाया गया है। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले जयपुर शहर में भी पैंथर घुस आया था जिसे रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया था।

गुडलिया कस्बे के पास ढाणी में एक ग्रामीण खेतों के पास शौच के लिए गया था। उसकी नजर बड़े पीपल के पेड़ पर गई तो देखा वहां कोई जानवर लटका हुआ था। उसने देखा दो मृत सियार पेड़ की एक डाल से लटका था। उसने पास जाकर देखा तो डाली पर पास में ही एक बड़ा पैंथर मौजूद था। पैंथर से नजरे मिलने पर ग्रामीण के होश उड़ गए। वह वहां से गांव की ओर भाग तथा ग्रामीणों के पैंथर के होने की बात बताई। इस पर

लाठियों से लैस होकर ग्रामीण वहां पहुंचे तो देखा की पैंथर पेड़ पर ही मौजूद था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस व वन विभाग को दी। 

जयपुर से पहुंची वन विभाग की टीम

जयपुर से पहुंची वन विभाग की टीम ने करीब एक घंटे में पैंथर को रेस्क्यू किया। बेहोशी का इंजेक्शन लगते ही पैंथर धीरे-धरी पेड़ से उतरने लगा। पैंथर पर जैसे-जैसे मूर्छा छाती गई वह पेड़ से उतरता रहा। पेड़ से उतरने के बाद वह करीब 100 मीटर तक इधर-उधर घूमता रहा और फिर बेहोश हो गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने जाल डालकर उसे पिंजरे में ले लिया।  

पास में ही है सरिस्का का जंगल

ग्रामीणों के अनुसार उनकी ढाणी के आगे पांच किलोमीटर की दूरी पर ही सरिस्का का जंगल है। ग्रामीणों का मानना है कि पैंथर जंगल से निकल आया और सियार का शिकार कर पेड़ पर ले गया। पैंथर वहीं पेड़ पर सियार को खा रहा था। आमतौर पर पैंथर पेड़ पर ही अपने शिकार को मारकर ले जाता है और फिर आराम से खाता है।

न्यूज व फोटो : अनिल भट्ट, देवकृष्ण पारीक

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