राजस्थान / ड्रग विभाग ने नकली दवाएं पकड़ीं, एफआईआर कराई, पुलिस आज तक किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी

Dainik Bhaskar

Apr 13, 2019, 11:39 AM IST



डेमो पिक। डेमो पिक।
X
डेमो पिक।डेमो पिक।
  • comment

  • किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी
  • यदि पूछताछ होती तो दलाल और बनाने वाले पकड़े जाते

जयपुर। प्रदेश के हजारों मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के विक्रेता कई सालों बाद भी ऐश की जिंदगी जी रहे हैं। वजह है- पुलिस की ओर से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ड्रग विभाग की ओर से एफआईआर कराने के बाद भी पुलिस ने पिछले तीन सालों में किसी ऐसे विक्रेता को गिरफ्तार नहीं किया जिसके खिलाफ नामजद नकली दवाएं बेचने की एफआईआर कराई गई। इसलिए ना तो पुलिस और ना ही ड्रग विभाग उन बड़े दलालों और विक्रेताओं तक नहीं पहुंच सका, जो नकली दवाएं बनाकर देशभर में बेचने का काम करते हैं। यहां तक कि नकली दवा के कई कारोबारियों ने तो नाम बदल कर ड्रग लाइसेंस ले लिए और फिर से काम शुरू कर दिया। ऐसे में ड्रग विभाग भी मजबूर हो गया है और दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

 

 

केस एक - 12 नवम्बर 2017 को मालवीय नगर में 50 लाख रुपए से अधिक की नशीली और नकली दवाएं पकड़ी गईं। मामले में ड्रग विभाग ने एफआईआर कराई, लेकिन पुलिस ने हरीश चंचलानी को गिरफ्तार तो दूर, कभी पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया। पिछले दो सालों से वह नए लाइसेंस से बिजनेस चलाने लगा है।

 

केस दो - फिल्म कॉलोनी में 2017 में शिप्रा मेडिकल वाले से स्किन लाइट (इंफेक्शन सम्बन्धी) की नकली दवा पकड़ी। कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया गया, लेकिन पुलिस ने यहां भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसके मालिक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आज तक पुलिस गिरफ्त से दूर है।

 

केस तीन - आदिनाथ सोना मेडिकल स्टोर से जिफी नामक नकली एंटीबायोटिक पकड़ी गई। अशोक नगर थाने में सचिन गोयल, प्रतीक गोयल, तुषार गोयल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस मौके तक तो पहुंची, लेकिन फिर उसके हाथ खाली ही रहे। वर्ष 2017 में एफआईआर होने के बाद से अब तक पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई है।

केस चार- कमला एंटरप्राइजेज से देहरादून से लाई गई नकली दवाएं बेची जा रही थीं। 2018 में नकली एंटीबायोटिक पकड़े जाने के बाद श्याम नगर थाने में विनोद शर्मा के खिलाफ एफआईआर कराई गई लेकिन पुलिस उसे आज तक पकड़ना तो दूर, ढूंढ तक नहीं पाई है।

 

पत्नी से काम शुरू कराया, वह भी पकड़ी गई
 

मालवीय नगर में पकड़ा गया हरीश चंचलानी इतना शातिर है कि वह अपनी पत्नी के नाम से अजमेर में काम करने लगा। विभाग की टीम को पता चला तो उन्होंने अजमेर के हरीश मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई की और एंटी अल्सर की पेंटासिड नकली दवा पकड़ी, लेकिन पुलिस ने इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की।

 

पुलिस को लगता है हम क्यों करें, श्रेय नहीं मिलेगा
 

पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह यह मानी जाती है कि उन्हें लगता है कार्रवाई के समय साथ क्यों नहीं लिया गया। कार्रवाई के बाद एफआईआर और अन्य लिखित कार्रवाई और जिम्मेदारी वे ही क्यों लें। यदि दोषियों पर कार्रवाई होती भी है तो सारा श्रेय ड्रग विभाग को ही मिलेगा। इसलिए अति गंभीर मामले में भी पुलिस दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। हालांकि कई बार पुलिस दोषियों के ठिकानों और घरों तक पहुंची भी, लेकिन वहां उन्हें सालों तक सफलता हाथ नहीं लग पाई।

 

रिपोर्ट : संदीप शर्मा

COMMENT
Astrology
Click to listen..
विज्ञापन

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543
विज्ञापन