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जयपुर / दिवाली के बाद दोगुना हुआ पॉल्यूशन लेवल, आदर्श नगर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर सबसे खराब

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 12:18 AM IST


ये फोटो जेएलएन मार्ग की है। िदवाली की रात पटाखों के कारण बढ़े पॉल्यूशन की है। धुआं इतना अधिक था कि हर ओर अंधेरे की चादर िबछ गई थी। ये फोटो जेएलएन मार्ग की है। िदवाली की रात पटाखों के कारण बढ़े पॉल्यूशन की है। धुआं इतना अधिक था कि हर ओर अंधेरे की चादर िबछ गई थी।
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ये फोटो जेएलएन मार्ग की है। िदवाली की रात पटाखों के कारण बढ़े पॉल्यूशन की है। धुआं इतना अधिक था कि हर ओर अंधेरे की चादर िबछ गई थी।ये फोटो जेएलएन मार्ग की है। िदवाली की रात पटाखों के कारण बढ़े पॉल्यूशन की है। धुआं इतना अधिक था कि हर ओर अंधेरे की चादर िबछ गई थी।

  • कुछ दिन पहले शहर की हवा में पीएम-10 व पीएम-2.5 की मात्रा का लेवल मध्यम था, जो बढ़कर चिंताजनक स्थिति में पहुंचा
  • डॉक्टरों का मानना है कि हवा में पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा बढ़ने से अस्थमा व फेफड़े के रोगियों के स्वास्थ्य काे ज्यादा खतरा

जयपुर. दीपावली के बाद शहर में पॉल्यूशन का ग्राफ दुगुना तक बढ़ गया है। तीन दिन पहले शहर की हवा में पीएम-10 व पीएम-2.5 की मात्रा का लेवल मध्यम था जो अब बढ़कर चिंताजनक स्थिति तक पहुंच गया। पॉल्यूशन लेवल मॉनिटरिंग के लिए शहर में तीन जगह ऑटोमेटिक पॉल्यूशन स्टेशन हैं। आदर्श नगर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर सबसे खराब स्थिति तक पहुंच गया।

 

आदर्श नगर में  6 नवंबर को पीएम-10 की मात्रा 135 था जो 9 नवंबर को बढ़कर 282 तक पहुंच गई। पीएम-10 की यह मात्रा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। पुलिस कमिश्नरेट और शास्त्री नगर क्षेत्र में भी पर्टिकुलेट मेटर सामान्य स्तर से दुगुना तक पहुंच गया। डॉक्टरों का मानना है कि हवा में पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा बढ़ने से अस्थमा व फेफड़े के रोगियों के स्वास्थ्य काे ज्यादा खतरा रहता है।

 

 

jaiur pollution

 

दिवाली पर पटाखे जलाने से और वाहनों की धुंआ से एयर क्वालिटी खराब हुई है। हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड व कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से पॉल्यूशन का लेवल बढ़ा है। इससे अस्थमा, सीओपीडी, आईएलडी, आईपीएफ सहित फेफड़े के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस नली में सूजन बढ़ जाती है।  प्रदूषण से आंखों मे जलन, चमड़ी में खुजली, नाक में सूजन व छींके आना, सूखी खांसी, छाती में दर्द व गले में खरखराहट रहती है। इसके बचाव के लिए सूर्य निकलने के एक घंटे बाद घर से निकले व सूर्य अस्त से एक घंटे पहले घर आ जाएं। मास्क पहनकर निकलें। - डॉ. नरेन्द्र खिप्पल, प्रोफेसर व अस्थमा रोग विशेषज्ञ, श्वास रोग संस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर

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