अलवर / 64 साल के महात्मा प्रेमनाथ 24 साल से कर रहे घायल पशु-पक्षियों का इलाज

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 12:46 AM IST


Premnath has been treating injured animals and birds for 24 years
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Premnath has been treating injured animals and birds for 24 years
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  • परिंदा दिवस के रूप में मनाते हैं वेलेंटाइन-डे 
  • 60 प्रजातियों के पक्षियों व पशुओं का कर चुके इलाज 

अलवर (बृजमोहन शर्मा). पशु-पक्षियों से प्रेम की बात हो तो शहर के लोगों के जेहन में एक ही नाम आता है। वह नाम है महात्मा प्रेमनाथ का। इसलिए लोग घायल पशु-पक्षियों के इलाज के लिए उन्हें ही सूचना देते हैं। इसके बाद महात्मा प्रेमनाथ न तो समय देखते हैं और न यह कि कितनी दूर जाना है, वे अपनी साइकिल और दवा का बैग उठाकर निकल पड़ते हैं घायल पशु-पक्षी का इलाज करने के लिए।

 

पिछले 24 साल में वे कई पशुओं और पक्षियों का इलाज कर उन्हें ठीक कर चुके हैं। उन्होंने घायल साइबेरियन क्रेन, मोर, मैना, तोता सहित कई पक्षियों और जंगली हायना, बिंजार, बंदर सहित अन्य कई पशुओं का इलाज किया है। वे देखते ही देखते घायल पक्षियों और पशुओं को अपना मित्र भी बना लेते हैं।

 

इलाज के बाद ठीक हुए कई पशु-पक्षियों को उन्होंने परिवार में भी शामिल कर रखा है। गिर्राज दर्शन कॉलोनी दाउदपुर में अकेले रहने वाले 64 वर्षीय महात्मा प्रेमनाथ के लिए पशु-पक्षी ही परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने पशु, पक्षी व पर्यावरण सुरक्षा समिति का गठन भी किया है। कई स्थानों पर वे परिंडे भी लगवा चुके हैं। वे 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे को परिंदा दिवस के रूप में मनाते हैं।

 

महात्मा प्रेमनाथ बताते हैं कि युवा अवस्था में वे खिलाड़ी थे। फुटबाॅल में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं खेली। क्रिकेट में भी वे राज्य स्तरीय कॉलविन शील्ड प्रतियोगिता में कई बार खेले। एक बार राजर्षि कॉलेज में क्रिकेट खेलते हुए एक गिलहरी के बच्चे के बॉल लग गई। उसे प्रेमनाथ अपने घर ले आए। उसका अपने तरीके से इलाज शुरू किया और गिलहरी के बच्चे को पूरी तरह ठीक कर के ही दम लिया।

 

इसके बाद वे घायल पशुओं और पक्षियों का इलाज करने लगे। उन्होंने अपने जीवन को पशु, पक्षी व पर्यावरण के लिए समर्पित कर दिया। जंगली जानवरों का इलाज करने के कारण वन विभाग भी महात्मा प्रेमनाथ का सम्मान कर चुका है। प्रेमनाथ बताते हैं कि एक बार साइबेरियन क्रेन पॉलिथीन व अन्य धागे और कपड़े की कतरनों में उलझ कर झाडिय़ों में फंस कर घायल हो गया।

 

किसी ने सूचना दी तो वे ऊंटवाल के पास क्रेन का इलाज करने पहुंचे। कुछ दिन के इलाज के बाद क्रेन ठीक हुआ। बाला किले में भी उन्होंने कई घायल मोरों का इलाज किया। कई घायल बिंजारों का भी वे इलाज कर चुके हैं। करीब 60 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों व पशुओं का इलाज वे कर चुके हैं।
 

 

साइकिल पर चलता फिरता अस्पताल
महात्मा प्रेमनाथ पशु-पक्षियों का इलाज करने वाले बाबा के नाम से जाने जाते हैं। लोग उनको सूचना देते हैं तो वे अपना दवाओं वाला बैग साथ लेकर साइकिल पर निकल पड़ते हैं। गिर्राज दर्शन कॉलोनी दाउदपुर में रहने वाले महात्मा प्रेमनाथ काे कई बार लोग अपने साथ मोटरसाइकिल पर बैठाकर पशु-पक्षियों का इलाज कराने के लिए ले जाते हैं। महात्मा प्रेमनाथ ने बताया कि जंगली, आवारा व स्वतंत्र विचरण करने वाले पशुओं के लिए दवा का इंतजाम वे खुद करते हैं। कुछ समाजसेवी भी सहयोग करते हैं। 64 वर्षीय महात्मा प्रेमनाथ का कहना है कि वे इलाज एलोपैथी व होम्योपैथी की दवाओं से करते हैं।

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