कोर्ट केस लड़ने के पैसे नहीं तो टेंशन न लें; मुफ्त केस के लिए प्रो बोनो सर्विस की सुविधा, 609 वकील 250 से ज्यादा केस लड़ रहे हैं

2 वर्ष पहले
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  • राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर मुफ्त मिल रहे वकील, राज्य सरकार उठा रही है पूरा खर्च

जयपुर (अनुराग बासीड़ा). कोर्ट केस के लिए वकील की फीस भरने को पैसे नहीं हैं तो चिंता ना करें प्रदेश में विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ 609 से अधिक एडवोकेट प्रो बोनो सर्विस के तहत निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। 22 अक्टूबर 2018 से शुरू हुई इस सर्विस के तहत प्रदेश भर में 609 प्रो बोनो 250 से अधिक केसों में अपनी सेवा न्यायालयों में दे रहे हैं। प्रो बोनो सर्विस को देश भर में शुरू करने वाला राजस्थान पहला राज्य है।
 
प्रो बोनो का अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही में विधिक सहायता सलाह प्रतिनिधित्व चाहता है उसको अधिवक्ता की सेवाएं फ्री में उपलब्ध कराना प्रो बोनो सर्विस कि श्रेणी में आता है। बार-एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता गरीब व असहाय लोगो को अपनी विधिक सेवा निशुल्क देते हैं।
 
जिसमें वे किसी प्रकार से कोई फीस नहीं लेते हैं और इसके लिए राज्य सरकार, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पैरवी करने वाले अधिवक्ता को कोई फीस नहीं दी जाती है। यदि कोई एडवोकेट समाज के कमजोर व गरीब व्यक्तियों के लिए समाज सेवा करने के उद्देश्य से प्रो-बोनो सेवाएं देना चाहता है तो वह अपना आवेदन विधिक सेवा प्राधिकरण में दे सकता है।
 

विदेशी छात्र के पास वकील नहीं था, प्रो बोनो लिया तब जमानत मिली
निम्स यूनिवर्सिटी में बी-टेक फाइनल ईयर में पढ़ने वाले यमन के छात्र पर खाट-पत्ती भारत में लाने का आरोप। धारा-23, एनडीपीसी एक्ट के तहत केस हुआ। सीमा शुल्क आयुक्तालय जयपुर ने छात्र को गिरफ्तार किया। छात्र की ओर से उच्च न्यायालय से जमानत का आवेदन करना था, मगर पैरवी के लिए वकील नहीं था। प्रो बोनो सर्विस में वकील मिला, जिसने छात्र के जमानत आवेदन पर बहस कर उसे जमानत पर रिहा करो के आदेश कराए। इस प्रकार प्रो बोनो सर्विस के तहत
राज्य का यह पहला मामला जुलाई में निस्तारित हुआ।
 

बेटी को कुछ लोग उठा ले गए, पिता के पास पैसे नहीं थे...प्रो बोनो मददगार
अलवर जिले के एक परिवादी की 15 साल की नाबालिग बच्ची का अवांछित लोगों द्वारा अपहरण कर लिया गया। बच्ची का पिता गरीब था। केस लड़ने के लिए उच्च न्यायालय में आने तक के पैसे नहीं थे। किसी ने प्रो बोनो के बारे में बताया तब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्रो बोनो की मांग की। विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से इस मामले में प्रो बोनो सर्विस के तहत उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता की सेवा परिवादी को उपलब्ध कराई गई।  तब उच्च न्यायालय में बच्ची के पिता की ओर से बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत की गई। 

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