जयपुर / पुलिस ने दबाव में बालश्रम के गैरजमानती केस में गिरफ्तार आरोपी को छोड़ा; 10 साल जेल, 5 लाख जुर्माने का है प्रावधान

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • फर्द गिरफ्तारी बना लॉकअप में बंद कर चुकी थी पुलिस
  • बच्चा सौंपने के लिए बुलाई गई चाइल्ड लाइन टीम को वापस भेजा

दैनिक भास्कर

Feb 17, 2020, 02:56 AM IST

जयपुर (योगेश शर्मा). ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रतापसिंह खाचरियावास के दबाव में पुलिस ने बालश्रम के गैरजमानती अपराध में गिरफ्तार आरोपी को छोड़ दिया। दबाव के स्तर का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि तत्कालीन सदर थाना एसएचओ ने कार्रवाई करने वाली टीम के सामने दस्तावेज फेंक दिए। पुलिस ने अपने ही बुलाने बच्चे को लेने पहुंची चाइल्ड लाइन टीम को बैरंग लौटा दिया। उल्लेखनीय है कि बालश्रम के मामले में अधिकतम 10 साल की सजा और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान है। अब इस मामले की मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत हुई है। 


जयपुर पुलिस पश्चिम जिले की एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट सूचना पर 10 मई 2019 को हसनपुरा-ए स्थित राजवीर ज्यूस सेंटर पर गई। मौके पर मिले 12वर्षीय बच्चे ने यूनिट को बताया कि उससे जबरन 13 घंटे काम कराया जाता है। मालिक आए दिन मारपीट करता है। यूनिट ने फर्द गिरफ्तारी तैयार कर मालिक विकास देरान को गैरजमानती आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने फर्द दस्तयाबी तैयारी कर बच्चे को अपनी सुरक्षा में ले लिया। 


इसके बाद सदर थाना कांस्टेबल सुलोचना से आरोपी की जामा तलाशी ली। कार्यवाही पूरी कर आरोपी को थाने के लॉकअप में बैठा दिया गया। तभी थाने पर कुछ लोग आए। जो खुद को मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास का आदमी बता रहे थे। इसके बाद थाने का माहौल ही बदल गया। 


तत्कालीन एसएचओ राजकुमार शर्मा ने आईओ रिछपाल सिंह को अपने कमरे में बुलाया। जब आईओ बाहर निकले तो रो रहे थे। थानेदार ने कार्रवाई के दस्तावेज टीम के सामने फैंक दिए। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को रिहा कर दिया। यही नहीं पुलिस की सूचना पर थाने पहुंची चाइल्डलाइन की टीम को सौंपने के बजाए बच्चा वापस आरोपी के साथ भेज दिया। इस पूरे मामले में कानून की अनदेखी करने पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। (मामले से जुड़े सबूत और बातचीत की रिकार्डिंग भास्कर के पास सुरक्षित हैं।)

राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास बोले- ऐसा कोई मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मुझे नहीं पता कि इस मामले में मेरा नाम क्यों लिया जा रहा है। 

जयपुर चाइल्ड लाइन को-ऑर्डिनेटर सुमन सिंह- पुलिस की सूचना पर जब टीम थाने पहुंची तो आईओ एक तरफ खड़ा रो रहा था। पुलिस ने बच्चा टीम को सुपुर्द नहीं किया। आरोपी और बच्चे को छोड़ दिया गया।  

जिला टास्क फोर्स (बालश्रम) मेंबर राकेश तिवाड़ी- मुझे फर्द गिरफ्तारी और दस्तयाबी का गवाह बनाया। आरोपी को लॉकअप में बिठा दिया। उसके बाद खुद को मंत्री प्रताप सिंह का आदमी बताने वाले लोग थाने आए। फिर पता नहीं क्या हुआ कि एसएचओ ने कार्रवाई के दस्तावेज फेंक दिए।  

आरोपी विकास देरान- पुलिस मुझे और मेरी दुकान पर काम करने वाले बच्चे ले गई थी। एमएलए से पुलिस को फोन कराया था। इसके बाद पुलिस ने मुझे और बच्चे को सदर थाने से छोड़ दिया।

तत्कालीन एसएचओ राजकुमार शर्मा- मैंने हसनपुरा में बहुत कार्रवाईयां की, ऐसे में किसी ने झूंठी शिकायत की है। मेरे कार्यकाल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। 

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