राजस्थान / पुष्कर पशु मेला खो रहा अपनी चमक, घट रही है ऊंटों की संख्या, चौपट हुआ व्यापार



पुष्कर मेले में आए ऊंट। पुष्कर मेले में आए ऊंट।
Pushkar fair loosing its sheen, camels giving a miss
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पुष्कर मेले में आए ऊंट।पुष्कर मेले में आए ऊंट।
Pushkar fair loosing its sheen, camels giving a miss

  • ऊंट को राज्य पशु का दर्जा देने से रेगिस्तानी जहाज का व्यापार हुआ प्रभावित, इस बारे मेले में ऊंटों से अधिक आए घोड़े

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 03:22 PM IST

पुष्कर। विश्व के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक अजमेर के पुष्कर में चल रहा है। कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर 12 नवंबर तक चलने वाला यह मेला बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। हालांकि पशु मेले के तौर पर यह अपनी चमक खोता जा रहा है। कारण कि यहां लाए जाने वाले पशुओं की संख्या में गिरावट आई है। खास बात यह है कि ऊंट को राज्य पशु का दर्जा इसके पीछे बड़ा कारण माना जा रहा है। वहीं यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

 

इसलिए ऊंटों का व्यापार हुआ चौपट

 

साल 2014 में ऊंट को राज्य पशु का दर्जा दिए जाने के कारण इस रेगिस्तानी जहाज की संख्या के व्यापार में कमी आई है। राज्य पशु का दर्जा देने के साथ ही कई नियम-कायदे भी जुड़ गए। राज्य सरकार ने कानून बनाकर ऊंट के वध, व्यापार और गैरकानूनी परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया। ऊंटों को अब राज्य के बाहर बेचा नहीं जा सकता। इन्हें केवल कृषि कार्यों के काम के लिए ही प्रदेश के बाहर बेचा जा सकता है। इससे व्यापार प्रभावित हुआ है और ऊंटों की बिक्री तेजी से घटी है। पिछले चार साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पुष्कर में ऊंटों की बिक्री में 75 प्रतिशत की गिरावट आई है। राज्य सरकार ने साल 2016 में एक स्कीम लॉन्च की थी जिसमें ऊंट पैदा होने पर पशुपालक को 10 हजार रुपए दिए जाने थे, लेकिन यह भी अब निष्क्रिय हो गई है। पशु मेले में इस बार ऊंटों से अधिक घोड़े आए हैं। करीब 10 साल पहले जहां 15 हजार ऊंट आते थे। इस बार करीब चार हजार ऊंट ही यहां पहुंचे हैँ। वहीं घोड़ों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यहां इस बारे घोड़े चार हजार से भी ज्यादा पहुंचे हैं।

 

पर्यटक बढ़े

 

दूसरी ओर इस मेले में आयोजित होने वाली सांस्कृतिक, खेल व अन्य गतिविधियों के कारण पिछले कुछ सालों में यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। यहां देसी पर्यटकों की संख्या चार से साढ़े चार लाख के करीब रही है वहीं पिछले पांच सालों में यहां विदेश पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। साल 2012 में यहां 7500 विदेशी पर्यटक आए तो साल 2018 में 12800 विदेशी सैलानी पुष्कर मेले में पहुंचे।

 

लुभा रहे हैं ऊंटों के करतब

 

ऊंट शृंगार व कैमल डांस प्रतियोगिता यहां आकर्षण का केंद्र रही है। इस प्रतियोगिता में ऊंट खाट व लकड़ी के पाटों पर दो पैर पर खड़े होकर डांस करते हैं। वहीं ऊंटों को नचाने के साथ ऊंट मालिक कई हैरतअंगेज करतब दिखा कर मेलार्थियों को चकित करते रहे हैं। सभी ऊंटों को नृत्य करने के लिए पांच-पांच मिनट का समय दिया जाता है। इस बार ऊंट नृत्य में नागौर जिलांतर्गत ग्राम झाड़ोल के ऊंट पालक प्रभू सिंह ने बाजी मारी। दूसरे नंबर पर सीकर के विजेंद्र व तीसरे नंबर पर डीडवाना के हनुमान सिंह रहे। तीनों विजेताओं को क्रमश: 5 हजार, 3 हजार व 2 हजार रुपए की राशि से पुरस्कृत किया गया।

 

मेले में बिक्री के लिए आए पशुओं का पशुपालन विभाग ने रवन्ना काटना शुरू कर दिया है। इसी के साथ पशुओं व पशुपालक मेले से लौटने शुरू हो गए है जिससे परवान छू रहा पशु मेला धीरे-धीरे सिमटने लग गया है तथा धोरे खाली होने लग गए हैं।

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