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निर्णायक वोट / 9% मुस्लिम आबादी, 18% सीटों पर असर, पर जितने टिकट मिले, उनमें आधे से ज्यादा हारे



Rajasthan assembly election 2018 : assembly election analysis about muslim
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Rajasthan assembly election 2018 : assembly election analysis about muslim

  • पिछले चार चुनावों के आधार पर देखिए कहां हैं मुस्लिम वोट? 
  • 4 चुनाव में कांग्रेस ने 64 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए। जीते सिर्फ 26 यानी 40.62% 
  • भाजपा ने 14 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिए, इनमें से जीते सिर्फ 6 यानी 42.85% 
     

Dainik Bhaskar

Oct 19, 2018, 02:25 PM IST

उदयपुर। राजस्थान में मुस्लिम आबादी 9 प्रतिशत है, लेकिन मतदाताओं के तौर पर यह समुदाय राज्य की 36 सीटों को प्रभावित करता है। इनमें 15 सीटें मुस्लिम मतदाताओं के वर्चस्व वाली हैं तो 8 से 10 सीटें ऐसी हैं, जहां बड़ा मुस्लिम वोट बैंक है और चुनाव के नतीजे तय करता है। 
 

भाजपा का जीप प्रतिशत कांग्रेस से ज्यादा

  1. यही वजह है कि इन सीटों पर कांग्रेस और भाजपा अपने मुस्लिम उम्मीदवार उतारती रही हैं। मगर इन सीटों का विश्लेषण करने पर हैरान कर देने वाली बात सामने आई है कि पिछले 4 विधानसभा चुनावों में भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवारों का जीत प्रतिशत कांग्रेस से ज्यादा है। गत चार चुनाव में कांग्रेस ने विभिन्न सीटों से 64 उम्मीदवारों को टिकट दिया जिनमें से 26 ने जीत हासिल की।
     

  2. वहीं भाजपा ने 14 को टिकट दिया जिनमें से 6 ने जीत दर्ज की। अगर 1998 से अब तक की राजनीति का विश्लेषण करें तो यह तथ्य दिलचस्प है कि सबसे ज्यादा चुनाव जीतने के मामले में सबसे आगे नागौर विधायक हबीबुर्रहमान हैँ, जो भाजपा से विधायक हैं। हबीबुर्रहमान ने 1993 से 2013 तक 5 चुनाव लड़े हैं जिनमें से 4 जीते हैं। इनमें 2-2 बार भाजपा और कांग्रेस दोनों से हबीबुर्रहमान ने जीत दर्ज की है।

  3. 1993 और 1998 में मूंडवा से कांग्रेस प्रत्याशी रहते जीते तो 2008 और 2013 में उन्होंने नागौर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। 2003 में हबीबुर्रहमान कांग्रेस से लड़े थे मगर हार गए थे। वहीं अब तक एक बार ऐसा हुआ है जब प्रदेश की कमान मुस्लिम मुख्यमंत्री ने संभाली है। प्रदेश में 1971 से 1973 तक बरकतुल्लाह खान राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे हैं। 
     

  4. पूरी तस्वीर. असरदार, फिर भी जीत का औसत कम क्यों?

    • 78 चेहरों को मौका दिया दोनों दलों ने 4 चुनावों में 
    • 32 चेहरे ही जीत पाए इनमें से। यानी 41% 
    • 2013 : 19 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी। कांग्रेस ने 16 सीटों पर उतारे। सभी हारे। भाजपा के 4 में से 2 जीते। 
    • 2008 : 17 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी। कांग्रेस ने 13 सीटों पर उतारे। 11 जीते, भाजपा के 5 में से 1 जीता। 
    • 2003 : 19 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी। कांग्रेस ने 18 सीटों पर उतारे, 4 जीते, भाजपा ने 1 उतारा, जीता। 
    • 1998 : 21 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी। कांग्रेस ने 17 सीटों पर उतारे, 11 पर जीते, 6 हारे, भाजपा ने 4 पर उतारे, 1 जीता। 

  5. 4 संभागों में प्रभावी 

    अजमेर संभाग : टोंक, पुष्कर, डीडवाना, मसूदा, मकराना और नागौर मुस्लिम सीटें मानी जाती हैं। डीडवाना से भाजपा के 2003 और 2013 में यूनुस खान जीते। दोनों बार मंत्री भी रहे। टोंक में कांग्रेस की जकिया 2003 में जीतीं, 2008 में हारीं, 2013 में कांग्रेस के सऊद सईदी को भाजपा के अजीत मेहता ने हराया। पुष्कर से तीन में से दो बार मुस्लिम प्रत्याशी हारे। मकराना से 2008 में जाकिर हुसैन जीते, 2013 में हारे। 

  6. जयपुर संभाग :

    फतहपुर, तिजारा, रामगढ़, किशनपोल, हवा महल, आदर्शनगर, जौहरी बाजार मुस्लिम सीटें रही हैं। इनमें फतहपुर से 2003 और 2008 में कांग्रेस के भंवरू खान और हाजी मकबूल दाेनों मुस्लिम प्रत्याशी जीते। 2013 में ये सिलसिला टूटा।

  7. रामगढ़ में कांग्रेस ने हर बार मुस्लिम प्रत्याशी उतारा, एक बार 2003 में जुबेर खान जीता। वहीं पिछली दोनों सरकारों में भाजपा के ज्ञानदेव आहूजा जीतते आए हैं। आदर्श नगर सीट से पिछली दो चुनाव में अशोक परनामी ने कांग्रेस के माहिर आजाद को हराया। 

  8. जोधपुर संभाग

    चोहट्टन, शिव, सूरसागर और पोकरण पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जाते रहे हैं। शिव पर कांग्रेस से तीन चुनाव में अमीन खान को टिकट दिया। वे सिर्फ 2008 में जीते। पोकरण से 2008 में कांग्रेस के सालेह मोहम्मद जीते तो 2013 में हारे। 
     

  9. भरतपुर संभाग

    कामां, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, और नगर की सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे जाते रहे हैं। कामां से कांग्रेस ने हर बार मुस्लिम उम्मीदवार उतारा, मगर सिर्फ 2007 में जाहिदा खान जीती। सवाईमाधोपुर से 2003 में यास्मीन अबरार हारी तो 2008 में अलाऊद्दीन आजाद जीते। नगर सीट से कांग्रेस के मोहम्मद माहिर 2008 में जीते। 

  10. 66 साल में एकमात्र मुस्लिम सीएम 

    प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के समय बरकतुल्लाह खां दो बार मुख्यमंत्री भी रहे। वे नौ जुलाई 1971 से 16 मार्च 1972 और 16 मार्च 1972 से 11 अक्टूबर 1973 तक इस पद पर रहे। 11 अक्टूबर 1973 को उनकी मृत्यु हो गई थी।

  11. 20 साल में 7 चेहरे मंत्री बने

    यूनुस खान : मौजूदा सरकार में सार्वजनिक निर्माण, परिवहन विभाग मंत्री हैं। वे 2003 की भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 
    दुर्रू मियां, 2008 की गहलोत सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे। 
    अमीन खान : 2008 की गहलोत सरकार में वक्फ बोर्ड और अल्पसंख्यक मामलात विभाग के मंत्री रहे। 
    तैय्यब हुसैन, 1998 की कांग्रेस सरकार में चिकित्सा मंत्री। 
    अब्दुल अजीज : 1998 की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे। 
    तकीउद्दीन अहमद : 2002-03 में कांग्रेस सरकार में मंत्री। 
    हबीबुर्रहमान : 2002-03 में कांग्रेस सरकार में मंत्री। 

  12. एकमात्र मुस्लिम निर्दलीय जिसने चुनाव जीता 

    निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़े और जीते...ऐसे एकमात्र मुस्लिम नेता माहिर आजाद हैं। उन्होंन 1998 में नगर सीट से जीत दर्ज की। यूं निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवारों ने खेल कई बार बिगाड़ा है। 

     

    स्टोरी : निखिल शर्मा

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