--Advertisement--

चर्चा में चुनावी खर्चा. / 119 करोड़ के 'राजा' ने 5 लाख में चुनाव लड़ा 60 हजार की मालकिन सोना ने खर्चे Rs.8 लाख



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे।
पार्टियों ने कितना खर्चा किया। पार्टियों ने कितना खर्चा किया।
X
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे।
पार्टियों ने कितना खर्चा किया।पार्टियों ने कितना खर्चा किया।
  • पिछले चुनाव में खर्च सीमा 16 लाख थी, अब 28 लाख हो गई है 
  • हैरानी देखिए प्रत्याशी पुरानी खर्च सीमा का आधा भी \'ऑन रिकॉर्ड\' दिखा नहीं रहे थे, लेकिन फिर भी सीमा बढ़ा दी 
  • जब प्रत्याशी 5 से 7 लाख खर्च कर विधायक बन जाते हैं तो खर्च की सीमा 12 लाख बढ़ा कर 28 लाख करने का औचित्य क्या है? 

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 12:26 PM IST

जोधपुर। इस बार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी पिछले चुनाव से 12 लाख रुपए ज्यादा खर्च कर सकेंगे। वर्ष 2013 के चुनाव में खर्च की सीमा 16 लाख थी, जो इस बार 28 लाख होगी। पिछला चुनाव देखें तो जहां डीग कुम्हेर से कांग्रेस प्रत्याशी और 119 करोड़ की संपत्ति के मालिक विश्वेन्द्र सिंह ने पांच लाख से भी कम खर्च में चुनाव जीता था। 

किसने कितना खर्च किया

  1. महज 60 हजार की सम्पत्ति की मालकिन रायसिंह नगर से जमींदारा पार्टी की सोना देवी ने आठ लाख से ज्यादा खर्च कर चुनाव जीता था। भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी ने दो सौ विधायकों में से सबसे कम दो लाख से भी कम में चुनाव लड़ना बताया तो पुष्कर से विधायक बने भाजपा के सुरेश सिंह रावत 13 लाख से ज्यादा खर्च बता सबसे ज्यादा खर्च करने वाले प्रत्याशी रहे।
     

  2. चुनाव लड़ने के लिए खर्च सीमा और प्रत्याशियों की ओर से बताए गए खर्च का ट्रेंड तो यही बताता है कि खर्च तो वे अपने हिसाब से ही बताएंगे। चुनाव विशेषज्ञों की मानें तो विधानसभा चुनाव के खर्च की सीमा भले ही लाखों से करोड़ों तक कर दी जाए तो भी इनका खर्च कम ही बताया जाएगा। वह इसलिए कि जितना ज्यादा खर्च बताएंगे, उतने ज्यादा झंझट। बिल लाओ, ऑडिट कराओ और खर्च किए पैसे का स्त्रोत भी बताना पड़ सकता है। 

  3. मुख्यमंत्री पद के चेहरों ने कितना खर्च किया था ?

    • 5.38 लाख में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चुनाव लड़ना बताया था। 
    • 4.29 लाख में ही पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने चुनाव लड़ना बताया था। 

  4. जिन्होंने सबसे ज्यादा खर्चे 

    • सुरेश रावत, पुष्कर विधायक। इन्होंने 13 लाख रुपए का चुनावी खर्च बताया था। भास्कर से बातचीत में बोले : पांच साल में महंगाई काफी बढ़ गई है। माइक का खर्च ही 500 रुपए प्रतिदिन का बढ़ गया है। प्रत्याशियों को कुछ राहत तो मिलेगी। 

  5. जिन्होंने सबसे कम खर्च किए 

    • किरण माहेश्वरी, उच्च शिक्षामंत्री। इन्होंने 1.94 लाख रु का खर्च बताया था। भास्कर ने बात की तो कहा : जरूरी नहीं जितनी सीमा है,उतना ही खर्च करें। कम खर्च में भी चुनाव लड़ा जा सकता है। 


     

  6. कैसे बढ़ती है खर्च की सीमा? 

    दरअसल, चुनाव आयोग साल दर साल चुनावी खर्च की सीमा बढ़ाने को लेकर अनुशंसा करता है। इसके लिए बनी आयोग की कमेटी के सदस्य बैठक करते हैं। महंगाई इंडेक्स को आधार बनाकर पिछली सीमा से कुछ लाख की बढ़त का आकलन कर प्रस्ताव कानून मंत्रालय को भेज दिया जाता है।
     

  7. न तो कोई राजनैतिक दल और न ही उनका कोई प्रत्याशी इसके लिए डिमांड करता है। कानून मंत्रालय की अधिसूचना से खर्च सीमा बढ़ जाती है और प्रत्याशी उसी के आधार पर कम से कम खर्च बता देते हैं। 

  8. भास्कर एक्सपर्ट 

    दरअसल, बेहिसाब खर्चा चाहते हैं प्रत्याशी : प्रो त्रिलोचन शास्त्री 
    ज्यादातर नेता अधिकृत तौर पर तो खर्च कम बताते हैं लेकिन निजी तौर पर वे इस खर्च की सीमा को बेहिसाब करने के पक्ष में बात करते हैं।

  9. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तो सार्वजनिक तौर पर कहा भी था कि पहली बार निर्वाचित होकर आने वाले विधायक व सांसद चुनावी खर्च के बारे में झूठ बोलकर ही सदन में कदम रखते हैं। 

    - प्रो. त्रिलोचन शास्त्री, आईआईएम बैंगलुरू के प्रोफसर व एसोसिएशन फाॅर डेमोक्रोटिक रिफोर्म्स एवं नेशनल इलेक्शन वॉच के फाउंडर मेम्बर 

     

    स्टोरी : प्रवीण धींगरा/डीडी वैष्णव

Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..