राजनीतिक विश्लेष / आज जो जेर-ए-बहस है, यकीनन कल नहीं होंगे

Dainik Bhaskar

Oct 16, 2018, 08:26 PM IST



प्रतुल सिन्हा- वरिष्ठ पत्रकार प्रतुल सिन्हा- वरिष्ठ पत्रकार
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प्रतुल सिन्हा- वरिष्ठ पत्रकारप्रतुल सिन्हा- वरिष्ठ पत्रकार

  • दीवारों पर पोस्टर चिपकते ही जाट, राजपूत और विश्नोइयों की दीवारें खिंच जाएंगी

जयपुर. जोधपुर में पेशे से चार्टेंड अकाउंटेंट भाजपा नेता नरेन्द्र सिंह कछावा एकदम खरी बात कहते हैं- अभी जो मुद्दे चर्चा में है, वो कल नहीं होंगे। आज अकाल की चर्चा है। टिकटों की घोषणा के बाद ये चर्चाएं काफूर हो जाएंगी। लोग उम्मीदवार देखेंगे और उसकी जात। सच है। चुनाव में यही होता रहा है। कछावा की बात मानें तो वसुंधरा सरकार ने मारवाड़ के विकास में क्या कुछ नहीं किया, जबकि आजकल हाशिए पर चल रहे कांग्रेस नेता सत्यनारायण मेवाड़ा को शिकायत है कि मारवाड़ भाजपा राज में उपेक्षित रहा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके- जोधपुर को जानबूझ कर स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं किया गया। ...ये चुनाव से पहले की बहस हैं।

 

दीवारों पर पोस्टर चिपकते ही जाट, राजपूत और विश्नोइयों की दीवारें खिंच जाएंगी। ये तीनों समाज इस क्षेत्र में मायने रखते हैं। जालोर, सिरोही, पाली, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में नेताओं के बयानों में विकास की बातें की जाती हैं, नेपथ्य में जात-पात वाली पंचायतों को साधने की कोशिशें की जा रही है। 

 

बाड़मेर में रिफाइनरी और जैसलमेर में महारानी के राजनीतिक आगमन की चर्चाएं हर नुक्कड़ पर सिर उठाकर खड़ी हैं। पर असली मुद्दा है रोटी । इस बार पानी नहीं बरसा, अकाल दस्तक दे रहा है। पशुपालन अब कारोबार नहीं रह गया है। फसलें उजड़ चुकी हैं। हैंडीक्राफ्ट घिसट-घिसट कर आगे बढ़ रहा है। पूरा मारवाड़ हैंडीक्राफ्ट कारोबार के लिए जाना जाता है। 

 

पांच लाख परिवारों के पेट भरने का यही एक जरिया है। हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी निर्मल भंडारी कहते हैं- सरकार रूठी हुई हैं। हैंडीक्राफ्ट को बचाना है तो इसको जीएसटी से तुरंत बाहर करना पड़ेगा। पत्थरों का व्यवसाय बंद पड़ा है। माइन्स मालिक रामकुमार चौधरी कहते है- मकान नहीं बन रहे तो पत्थर कौन खरीदेगा।

 

दरअसल, मारवाड़ कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत का इलाका माना जाता है। खासकर जोधपुर में हर कांग्रेसी गहलोत से प्रसाद पाने की कामना रखता है। कांग्रेसी मानते हैं कि यहां गहलोत का राज है, इसलिए भाजपा की तुलना में कांग्रेस को दावेदारी में यहां ज्यादा मुश्किलें पेश आने वाली हैं। बस सबको अगले एक पखवाड़े भर का इंतजार है। भाजपा में ज्यादा खलबली नहीं है, पर कांग्रेस में खदबदाहट कुछ ज्यादा ही तेज है। टिकट मिला तो ठीक, नहीं तो निपटाना तो पड़ेगा ही!

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