राजस्थान हाईकोर्ट / सुप्रीम कोर्ट में 2 जज, 2 राज्यों में सीजे ...पर यहां सिर्फ 24 जज



Rajasthan High Court has fewer judges
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Rajasthan High Court has fewer judges

  • जजों की संख्या 40 से 50 हुई लेकिन पद कभी नहीं भरे
  • मुकदमे 4 लाख से ज्यादा, अक्टूबर तक तीन और जज रिटायर होंगे

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 01:02 AM IST

जयपुर (संजीव शर्मा). राजस्थान हाईकोर्ट में करीब चार साल पहले जजों की संख्या तो 40 से बढ़ाकर 50 कर दी गई, लेकिन यहां जजों की संख्या कभी 40 तक भी नहीं पहुंची। जजों की संख्या में लगातार कमी से मुकदमों की संख्या बढ़ती गई और अप्रेल तक के आंकडों के अनुसार यह 4 लाख को पार कर गई।

 

वर्तमान हालात यह है कि मुख्य न्यायाधीश सहित हमारे यहां 24 जज ही हैं, जो स्वीकृत पदों की तुलना में देखे तो 50 फीसदी भी कम है। पूर्व न्यायाधीशों का मानना है कि यदि पक्षकारों को न्याय देरी से मिलता है तो वह सही मायने में न्याय ही नहीं है। इसलिए, जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर नए सिरे से विचार करना होगा। जो पद खाली हो रहे हैं, उनको भरने की प्रक्रिया छह माह पहले ही शुरू कर दी जानी चाहिए। प्रदेश में जजों की कमी यकायक नहीं हुई बल्कि, एक अंतराल में घटते गए। कारण, नियुक्ति प्रक्रिया में देरी।

 

हालात यह है मई में हाईकोर्ट के दो जज जस्टिस केएस अहलूवालिया व बनवारी लाल शर्मा के रिटायर होने के बाद जजों की संख्या 24 ही रह गई है। इतना ही नहीं आगामी चार महीने में हाईकोर्ट के तीन जज जुलाई में जस्टिस वीएस सिराधना, सितंरब में जस्टिस पीके लोहरा और अक्टूबर में जस्टिस आलोक शर्मा रिटायर हों जाएंगे। ऐसे में यदि जजों की नई नियुक्तियां नहीं हुई तो हाईकोर्ट में 21 जज ही रह जाएंगे।

 

सुप्रीम कोर्ट, अन्य राज्यों के हाईकोर्ट में हमारी स्ट्रेंथ

सुप्रीम कोर्ट के जजों के सभी 31 पद भरे हैं। 5 जज ऐसे हैं जो या तो राजस्थान से जुड़े हैं या फिर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या जस्टिस रहे हैं। हाईकोर्ट के सीजे रहे जस्टिस अरुण मिश्रा व नवीन सिन्हा, जस्टिस एएम सप्रे सुप्रीम कोर्ट में जज हैं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अजय रस्तोगी व जस्टिस दिनेश माहेश्वरी राजस्थान से हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीजे गोविन्द माथुर व तेलंगाना के सीजे आरएस चौहान राजस्थान से ही हैं।

 

2 साल में मिले सिर्फ 5 जज पर संख्या 39 से 24 हो गई
प्रदेश को पिछले 2 साल में सिर्फ 5 जज मिले। जजों की संख्या 39 से कम होकर 24 हो गई। हाईकोर्ट प्रशासन के अनुसार 16 मई, 2017 में वकील कोटे से अशोक कुमार गौड़, मनोज कुमार गर्ग व इन्द्रजीत सिंह जज बनाए गए। वहीं, इस साल अप्रेल में न्यायिक अधिकारी कोटे से अभय चतुर्वेदी व एनएस ढड्ढ़ा को हाईकोर्ट जज नियुक्त किया गया। कॉलेजियम ने एक साल पहले डेढ़ दर्जन से अधिक नए जज बनाए जाने की सिफारिश की थी।

 

हाईकोर्ट की वर्तमान 
अप्रैल तक हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या : 409103,

जोधपुर मुख्य पीठ में 162425

जयपुर पीठ में 246678 


मरने के बाद संपत्ति का अगर कब्जा मिले तो क्या फायदा
^पूर्व न्यायाधीश पानाचंद जैन का कहना है जजों की नियुक्ति के लिए टाइम बाउंड प्रोग्राम हो ताकि, नियुक्ति सही समय पर हो। पक्षकारों को न्याय देरी से मिलता है तो वह सही मायने में न्याय ही नहीं है। किसी पक्षकार को नौकरी 10 साल बाद मिले या फिर संपत्ति पर कब्जा उसके मरने के बाद मिले तो ऐसे न्याय का क्या फायदा है।

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