तस्वीर आपको विचलित कर सकती है: डॉक्टर-नर्स प्रसूताओं को हाथ तक नहीं लगाते, ड्रिप से डिलीवरी तक सब कुछ सफाईकर्मी, वार्ड ब्वॉय के जिम्मे / तस्वीर आपको विचलित कर सकती है: डॉक्टर-नर्स प्रसूताओं को हाथ तक नहीं लगाते, ड्रिप से डिलीवरी तक सब कुछ सफाईकर्मी, वार्ड ब्वॉय के जिम्मे

चतुर्थ श्रेणी का एक कर्मचारी बोला- मुझे मत सिखाओ, हजारों डिलीवरी करा चुका हूं...

Dainikbhaskar.com

Feb 13, 2019, 12:29 PM IST
Rajasthan jaipur news terrifying truth of state government hospitals

लेबर रूम्स के खिलाफ यह स्टिंग इसलिए: 7 जनवरी को जैसलमेर में डिलीवरी करा रहे कंपाउंडर ने बच्चे को इस बेरहमी से खींचा कि शिशु के दो टुकड़े हो गए। घटना के बाद भास्कर के दो रिपोर्टरों ने महिला सहयोगियों के साथ 28 दिन तक 13 जिलों के 92 अस्पतालों के लेबर रूम्स का सच जाना। भास्कर अब ऐसे ही टैबू यानी जिन मुद्दों पर कभी बात नहीं होती...उनके खिलाफ लगातार खबरों के जरिए हमले करेगा।

जयपुर/उदयपुर/भीलवाड़ा/टोंक/अजमेर/राजसमंद/डूंगरपुर/ बांसवाड़ा सहित 13 जिलों से रिपोर्ट...

24 साल की दीक्षा कंवर 7 जनवरी का वो दिन कभी नहीं भूल सकती। जैसलमेर के रामगढ़ में डिलीवरी के दौरान मेल नर्स ने उसके शिशु को इस तरह खींच लिया कि उसके दो टुकड़े हो गए। नौ महीने जिस जीवन को दीक्षा ने सींचा...उसका ऐसा अंत...किसी की भी रूह कांप जाए। जो दर्द दीक्षा ने झेला कुछ वैसा ही दर्द राजस्थान के हर सरकारी अस्पताल में आने वाली महिलाएं रोज झेल रही हैं। जैसलमेर की घटना के बाद भास्कर ने राज्य के सरकारी लेबर रूम्स का स्टिंग किया।

भास्कर ने 13 जिलों के 92 अस्पतालों का दौरा किया। प्रदेश के प्रसव केंद्र अनट्रेंड स्टाफ के भरोसे मिले। उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा जिलों की आदिवासी महिलाओं और उनके परिजनों को तो यह भी नहीं पता कि उनका प्रसव कराने वाला व्यक्ति कौन है? लापरवाही का आलम यह था कि अस्पतालों से डॉक्टर गायब थे। सफाई कर्मचारी प्रसव करा रहे थे। पढ़िए विशेष रिपोर्ट।

लेबर रूम्स का सच-1

डॉक्टर, नर्स प्रसूताओं को हाथ तक नहीं लगाते, ड्रिप से डिलीवरी तक सब कुछ सफाईकर्मी, वार्ड ब्वॉय के जिम्मे

यह फोटो बांसवाड़ा के घाटोल स्वास्थ्य केन्द्र की है। यहां सफाई कर्मचारी हीरालाल प्रसव करवाता मिला। उसने महिला के कपड़ों से ही लेबर टेबल साफ की। फिर उसी गंदे कपड़े से महिला के शरीर पर खून साफ किया। जीएनएम कैलाश रजिस्टर की खाना-पूर्ति कर रही थीं। कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। यहीं पर एक दूसरा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामा नशे में मिला। बोला- हजारों डिलीवरी करा चुका हूं। वो हीरालाल क्या जानता है।

प्रसूताएं बिलखती रहती हैं, परिजन हाथ जोड़े खड़े रहते हैं..., सफाईकर्मी 'डॉक्टर' बनकर आ जाते हैं

खमेरा, बांसवाड़ा: सफाई कर्मचारी लेबर रूम से एक महिला का प्रसव कराकर बाहर लाया। उसके कपड़े इतने गंदे थे कि मैल की पपड़ी जमी हुई थी। वार्ड का जिम्मा भी वही संभालता है। मेल नर्स धीरज मल अपने कमरे में बैठा था।

सागवाड़ा, डूंगरपुर: यहां वार्ड ब्वॉय हरीश व विनोद से मिले, दोनों प्रसूताओं की ड्रिप बदल रहे थे। हरीश बोला-18 साल हो गए...रोज मैं ही ड्रिप चेंज करता हूं। प्रसूता बोली-नर्स और डॉक्टर तो डिलिवरी के बाद से ही नहीं आए।

खेरवाड़ा, उदयपुर: वार्ड ब्वॉय रमेश चंद्र एक महिला का प्रसव करा रहा रहा था। महिला कराह रही थी तो नर्स ने बाहर से डांटा। भास्कर टीम पहुंची तो रमेश एक तरफ खड़ा हो गया। लेबर रूम के बाहर नर्स मधु व नंद मीणा मोबाइल देख रही थी।

घाटोल, बांसवाड़ा: यहां शराब के नशे में धुत सफाई कर्मचारी रामा मिला। बोला- मुझे मत सिखाओ, हजारों डिलीवरी करा चुका हूं। अंदर जो डिलीवरी करा रहा है वो हीरालाल क्या जानता है...। वो तो पैसों के लालच में डिलीवरी कराता है।

उदयपुर: यहां सबसे बड़े एमबीएच अस्पताल के लेबर रूम की सबसे हैरान करने वाली तस्वीर। यहां प्रसूताओं को अपनी ड्रिप की बोतल खुद अपने हाथों से संभालनी पड़ती है।

टोंक का जिला अस्पताल: बच्चे ने पेट में दम तोड़ा, 12 घंटों तक डॉक्टर को ढूंढती रही महिला की आंखें...

बिस्तर पर लेटी गोनी का बच्चा पेट में मर चुका था। नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर उसे 12 घंटे तक संभालने नहीं आए। भास्कर टीम ने जब गोनी से बात की तो उसने बताया- बच्चे की मौत का पता तो कल ही चल गया था। इसके बावजूद किसी ने हाथ तक नहीं लगाया। आज नर्स दर्द का इंजेक्शन लगाकर गई है।

हमारी सरकार प्रसव केन्द्रों और लेबर रूम को लेकर संवेदनशील है। हमने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को निजी अस्तपालों के लेबर रूम का अध्ययन करने भेजा है। ताकि उनकी तर्ज पर सरकारी लेबर रूम के हालात सुधारे जा सकें। - रघु शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री

603 सीएचसी में 540 विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी

हर सीएचसी में सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और चिकित्सा अधिकारी होने चाहिए। पीएचसी पर एक डॉक्टर सहित नर्सिंग स्टाफ होना चाहिए लेकिन प्रदेश की 603 सीएचसी में 322 सर्जन, 113 गायनी और 105 एनेस्थिसियन की कमी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रदेश में 77,122 चिकित्सक होने चाहिए पर 38,142 डॉक्टर ही हैं। प्रदेश में 1000 की जगह 10 हजार की आबादी पर 1 डॉक्टर है।

3 साल में 21072 बच्चों की मौत

देश में एक हजार जीवित जन्म पर 34 बच्चों की मौत होती है वहीं राजस्थान में 41 बच्चे मौत के मुंह में समा जाते हैं। प्रदेश में 2014 से 2017 तक जन्म से 4 सप्ताह की अवधि में 21 हजार 72 नवजात बच्चों की मौत हुई थी।

एक लाख में 199 प्रसूताओं की मौत

राजस्थान में प्रति एक लाख में से 199 महिलाओं की प्रसव के दौरान या गर्भावस्था के दौरान मृत्यु हो जाती है। उदयपुर संभाग में हर एक लाख में से 250 महिलाओं की गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मौत हो जाती है।

28 दिन-13 जिले और 92 लेबर रूम्स की पड़तालः महिला सहयोगियों ने 10-10 घंटे लेबर रूम के बाहर बिताए तब यह सच सामने आया-स्टिंग के पीछे की कहानी...

13 जिलों में भास्कर टीम ने लेबर रूम की हकीकत जानने के लिए वहां 10-10 घंटे तक बिताए। कई-कई घंटों तक अस्पताल के लेबर रूम और वहां के हालात की रिकॉर्डिंग की। हमारी टीम ने 28 दिन तक 1500 किलोमीटर से ज्यादा सफर तय कर शहरी, ग्रामीण, पहाड़ी और आदिवासी इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों के हालात जाने। इस दौरान महिला सहयोगियों बाल व महिला चेतना समिति (भीलवाड़ा) की अध्यक्ष तारा अहलुवालिया और अनिता कुमावत ने लेबर रूम के भीतर के हालात पर नजर रखी। बाहर की व्यवस्थाओं पर नजर भास्कर रिपोर्टर्स ने रखी। कई जगह भास्कर टीम प्रसूताओं और परिजनों को विश्वास में लेकर उनके परिजन बनकर भी लेबर रूम तक पहुंची। कई जगह दर्द से कराहती प्रसूताएं हमारी सहयोगी तारा अहलुवालिया को ही अस्पताल का स्टाफ समझ बैठी। वे उन्हीं से दर्द से निजात दिलाने की गुहार लगाती रही। प्रसव के पहले और बाद में महिला वार्डों में 24-24 घंटे तक प्रसूताओं की सुध लेने वाला कोई नहीं था। ड्रिप बदलने वाला सफाई कर्मचारी भी उनके लिए भगवान से कम नहीं था।

13 जिलों में स्टिंग : जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, दौसा, करौली, सवाईमाधोपुर और टोंक।

डिस्क्लेमर: मुद्दा महिलाओं की निजता से जुड़ा है। भास्कर इसका सम्मान करता है। इसलिए इस खबर के लिए भास्कर का कोई भी पुरुष रिपोर्टर लेबर रूम्स के अंदर नहीं गया। (स्टिंग में बाल व महिला चेतना समिति भीलवाड़ा की अध्यक्ष, तारा अहलुवालिया, अनिता कुमावत ने भास्कर के लिए लेबर रूम्स की तस्वीरें खुफिया कैमरों में कैद कीं।)

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