राजस्थान /शाम 7 बजे लेबर रूम बंद ; क्या प्रसव पीड़ा सरकारी समय देखकर शुरू होती है



Rajasthan labour room condition sting operation
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Rajasthan labour room condition sting operation

  • भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो इकलौते सीएचसी के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर पर ताला लगा हुआ था

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 11:46 AM IST

आनंद चौधरी/अनुराग बासिड़ा. जयपुर. सवाईमाधोपुर का बामनवास गांव। एक शानदार पहचान इस गांव से जुड़ी है। चार लोकसभा सासंद, पांच विधायक, दो मंत्री और 200 से ज्यादा अफसर इस गांव से निकले हैं। इसी गांव की एक और पहचान भास्कर स्टिंग में सामने आई...इतने रसूखदार नामों से जुड़ा होने के बावजूद बामनवास प्रसव सुविधाओं के मामले में बदतर है। भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो इकलौते सीएचसी के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर पर ताला लगा हुआ था। लेबर रूम पर ताला...यह कल्पना से भी परे है...क्योंकि प्रसव पीड़ा कभी सरकारी समय देखकर शुरू नहीं होती। हैरान करने वाला ऐसा ही दृश्य दूदू में देखने को मिला। यहां शाम 7 बजे बाद डिलीवरी नहीं होती।
 

  • 2200 पीएचसी में से 870 तो ऐसे हैं जहां एक भी प्रसव नहीं हुआ

    ये तो सिर्फ दो दृश्य हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के 2200 पीएचसी में से 870 तो ऐसे हैं जहां एक भी प्रसव नहीं हुआ। 600 में से 91 सीएचसी में भी प्रसव की सुविधाएं नहीं हैं। हालांकि, सरकार ने हर पीएचसी पर लेबर रूम और हर सीएचसी पर लेबर रूम के साथ ऑपरेशन थियेटर भी बना रखे हैं। लेकिन महज 10 फीसदी सीएचसी ही ऐसी हैं, जहां के ऑपरेशन थियेटर में सीजेरियन प्रसव हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि राज्य में 1370 यानी 60% पीएचसी प्रसव का लक्ष्य ही पूरा नहीं कर पाती। अलवर संभाग की स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहां 527 पीएचसी में से 308 में एक भी प्रसव नहीं होता। उदयपुर संभाग में भी 330 पीएचसी में से 170 ऐसे हैं जहां प्रसव ही नहीं होते। प्रसव यातना केन्द्रों की तीसरी कड़ी में आज पढ़िए हमारे लेबर रूम्स के हालात क्या हैं...कहीं वे पार्किंग तो कहीं स्टोर रूम बने हुए हैं।

  • स्थान : पीएचसी बाटोदा, सवाई माधोपुर, दिन : 6 जनवरी, सुबह 11 बजे

    स्थान : पीएचसी बाटोदा, सवाई माधोपुर, दिन : 6 जनवरी, सुबह 11 बजे

    बाहर लेबर रूम पर ताला था...खुलवाकर देखा तो अंदर पूरा कबाड़घर निकला

     

    सुबह 11 बजे पीएचसी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। लेबर रूम के बाहर ताला लटक रहा था। नर्सिंगकर्मी डॉक्टर की कुर्सी पर बैठे मरीज देख रहे थे। ताला खुलवाकर लेबर रूम की हालत देखकर हम चौंक गए। लेबर टेबल सहित पूरे कमरे में दवाइयां और अस्पताल का कबाड़ भरा था। लेबर रूम के हालात बता रहे थे कि पिछले कई माह से इस कमरे में किसी भी प्रसूता को नहीं लाया गया। स्थानीय निवासी शंकर ने बताया कि डिलीवरी के लिए छह किलोमीटर दूर दूसरे अस्पताल में जाना पड़ता है। यहां कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है।

  • स्थान : स्वास्थ्य केंद्र -गंगरार, दिन : 23 जनवरी, दोपहर 3 बजे

    स्थान : स्वास्थ्य केंद्र -गंगरार, दिन : 23 जनवरी, दोपहर 3 बजे

    यहां 3 डॉक्टर हैं, फिर भी ओटी पर ताला लटका रहता है


    यहां सीएचसी के ऑपरेशन थियेटर पर ताला जड़ा था। अस्पताल में तीन डॉक्टर, एक गायनी और 09 लोगों का नर्सिंगस्टाफ होने के बावजूद प्रसूता की स्थिति गंभीर होते ही उसे चित्तौड़गढ़ रेफर कर दिया जाता है। कई मामलों में तो सामान्य प्रसूता को भी डिलीवरी कराने से इंकार कर देते हैं। भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो वहां सिर्फ एक नर्सिंग स्टाफ ही मौजूद थी। डॉक्टर और अन्य नर्सिंगकर्मी घर जा चुके थे। यहां माह में सिर्फ 7-10 प्रसव ही होते हैं।

  • स्थान : सीएचसी बामनवास, दिन : 5 फरवरी, शाम 4 :15 बजे

    स्थान : सीएचसी बामनवास, दिन : 5 फरवरी, शाम 4 :15 बजे

    लेबर रूम पर ताला, महिला वार्ड में मरीजों की जगह पार्किंग, कई माह से एक भी प्रसव नहीं


    इकलौती सीएचसी के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर पर ताला लगा था। महिला वार्ड में मरीजों की जगह नर्सिंगकर्मियों की मोटरसाइकिलें खड़ी थीं। सीएचसी के डॉक्टर और अन्य स्टाफ परिसर से बाहर मंदिर के पास धूप सेंक रहे थे। भास्कर टीम जैसे ही सीएचसी के भीतर पहुंची पूरा स्टाफ दौड़कर सामने आ गया। एक के बाद एक सवालों की झड़ी लगा दी। पिछले कई माह से इस सीएचसी पर कोई प्रसव नहीं हुआ है। पूछने पर डॉक्टर ने ही जवाब दिया लोग गंगापुर या अन्य जगह चले जाते हैं, यहां कोई आता ही नहीं। हैरानी देखिए... पूरा स्टाफ होने के बावजूद सीएचसी में प्रसव नहीं होते।

  • स्थान : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दूदू |, दिन : 27 जनवरी, शाम 7 बजे

    शाम होते ही प्रसव केन्द्र बंद

     

    यहां महिला वार्ड में एक प्रसूता दर्द से और पुरुष वार्ड में एक बुजुर्ग सर्दी से कांप रहा था। यहां अंतिम डिलीवरी 24 घंटे पहले हुई थी। शाम सात बजे इस अस्पताल में सिर्फ एक नर्सिंगकर्मी मौजूद था, वह भी मोबाइल पर व्यस्त मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात में न डॉक्टर मिलते हैं न नर्स। शाम सात बजे ताला लटक जाता है।

  • स्थान : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, हमीगरढ़ |, दिन : 23 जनवरी, सुबह 11 बजे

    सालों से बंद पड़ा है ओटी

    हमीरगढ़ भीलवाड़ा जिले का बड़ा कस्बा है लेकिन यहां की सीएचसी के ऑपरेशन थियेटर का वर्षों से ताला नहीं खुला। लेबर रूम भी माह में कभी-कभी खुलता है। रात के समय तो यहां डिलीवरी होती ही नहीं। रात में कोई भी प्रसूता यदि सीएचसी में आ जाए तो उसे 15 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा रैफर कर दिया जाता है।

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