राजस्थान / विधि विभाग; ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के तकनीकी स्टाफ कैडर के 407 पद खत्म हो गए, अब 308 पदों पर भर्ती हाईकोर्ट प्रशासन करेगा

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • नए टैक्नीकल स्टॉफ कैडर में पहले से कई सालों से उनके यहां पर काम कर रहे अफसर व कर्मचारियों को शामिल ही नहीं किया
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट व अधीनस्थ कोर्ट में किसी भी पद पर भर्ती में नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए

दैनिक भास्कर

Feb 14, 2020, 02:26 AM IST

जयपुर (संजीव शर्मा). राज्य सरकार के विधि व विधिक कार्य विभाग ने हाल ही में एक आदेश जारी कर राजस्थान हाईकोर्ट सहित प्रदेश के निचली कोर्ट में ई कोर्ट प्रोजेक्ट के तहत डिपार्टमेंट ऑफ आईटी व कम्युनिकेशन से भरे जाने वाले अफसर व कर्मचारियों के टेक्नीकल स्टाफ कैडर के 407 पदों को खत्म कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार ने हाईकोर्ट प्रशासन को टेक्नीकल स्टॉफ कैडर के 308 पदों पर भर्ती करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। इससे अब हाईकोर्ट प्रशासन हाईकोर्ट सहित प्रदेशभर के अधीनस्थ कोर्ट में डिप्टी डायरेक्टर, प्रोग्रामर, असिस्टेट प्रोग्रामर व इंफोर्मेटिक असिस्टेंट के 308 पदों पर भर्ती करेगा। गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 6 नवंबर 2019 को राज्य सरकार के विधि व विधिक कार्य विभाग को पत्र लिखकर ई कोर्ट प्रोजेक्ट के तहत टैक्नीकल स्टाफ कैडर में होने वाली नियुक्तियों को हाईकोर्ट प्रशासन को सौपने के लिए कहा था।

पहले से काम कर रहे खुद के टैक्नीकल स्टाफ की अनदेखी:

हाईकोर्ट प्रशासन ने नए टैक्नीकल स्टॉफ कैडर में पहले से कई सालों से उनके यहां पर काम कर रहे अफसर व कर्मचारियों को शामिल ही नहीं किया है । इन कर्मचारियों को मंत्रालयिक कर्मचारियों के कैडर में शामिल किया है। ऐसे में टैक्नीकल कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नई भर्ती पर रोक लगाने की गुहार की है।

बैकडोर से नियुक्त का 21 कर्मचारियों का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित, 23 मार्च को होगी सुनवाई

हाईकोर्ट में बैकडोर से  21 लोगों को 2009 में बिना विज्ञापन कनिष्ठ न्यायिक सहायक तदर्थ नियुक्ति देकर बाद में उन्हें नियमित करने को चुनौती देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2018 के आदेश से बैक डोर के जरिए बैकडोर से नियुक्त हुए 21 कर्मचारियों की नियमित व स्थाई करने का आदेश रद्द कर दिया था। हांलाकि सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई 2018 के आदेश से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई 23 मार्च को होगी। जिन लोगों को नियुक्ति दी वे हाईकोर्ट में कार्यरत व रिटायर अफसरों व कर्मचारियों के रिश्तेदार हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को दिया था भर्ती में सख्ती का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2014 में रेनू व अन्य की अपील में सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल व रजिस्ट्रार (प्रशासन) को निर्देश दिया था कि भर्तियां अखबारों में विज्ञप्ति जारी कर की जाएं। हाईकोर्ट व अधीनस्थ कोर्ट में किसी भी पद पर भर्ती में नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए। नियुक्ति नियमों के विपरीत हो तो वह अवैध मानी जाए।

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