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2 मंत्री, 5 विधायक और 2 कलेक्टर बोले- टालें चुनाव, पहले कोरोना काे हराना है, निगम चुनाव बाद में जीतेंगे

एक वर्ष पहले
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परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास मास्क पहनकर जनता से मिलते हुए। - Dainik Bhaskar
परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास मास्क पहनकर जनता से मिलते हुए।
  • सवाल- स्कूल-कॉलेज बंद, सिनेमाहॉल में ताले लटके; फिर निगम चुनाव टालने पर फैसला अभी तक क्यों नहीं?
  • विचार- सरकार पहल करे; कोर्ट में जाए और चुनाव आगे बढ़वाए, क्योंकि जयपुर ही हाई रिस्क पर है

जयपुर. काेरोना महामारी घोषित हो चुकी है। प्रदेश में रविवार को स्कूल-कॉलेज बंद रहे तो सिनेमाघरों में ताले लटके मिले। केंद्र सरकार ने भी एडवाइजरी जारी कर सभा, रैलियों और बड़े आयोजनाें को रद्द करने के आदेश जारी किए हैं, लेकिन जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगमों में 5 अप्रैल को प्रस्तावित चुनावों पर अब तक चुनाव आयोग ने कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि अब सरकार के ही 2 मंत्री और शहर के 5 विधायक चुनाव स्थगित करने के पक्ष में उतर आए हैं। वहीं, जयपुर कलेक्टर डाॅ. जाेगाराम और कोटा कलेक्टर ओम कसेरा ने भी स्वायत्त शासन विभाग को चुनाव स्थगित करने के लिए पत्र लिखा है। मंत्री-विधायकाें का कहना है कि नगर निगम चुनाव बाद में जीतना है, पहले काेराेना से जीतना है। चुनाव कुछ समय बाद भी हाे जाए ताे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। चुनाव के समय शहर के लाेगाें की भीड़ आती है। इससे वायरस फैलने का डर रहेगा। निर्वाचन विभाग स्वतंत्र है। वह चुनाव काे आगे बढ़ाने का निर्णय ले सकता है। जनप्रतिनिधि बाेले- पूरी दुनिया काेराेना से लड़ रही है। निर्वाचन विभाग काे वर्तमान परिस्थतियों में चुनाव आगे करवाने का निर्णय लेना चाहिए।

आयोग चुनाव करवाने के लिए स्वतंत्र : राजपुराेहित
राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी व सचिव श्याम सिंह राजपुरोहित का कहना है कि चुनाव आयोग के पास चुनाव करवाने का पूरा अधिकार है। चुनाव का फैसला आयोग ही लेता है, राज्य सरकार का इससे काेई लेना-देना नहीं हाेता।

महामारी से बड़ा चुनाव नहीं: प्रताप सिंह
परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि काेराेना महामारी से बड़ा चुनाव नहीं है। निर्वाचन विभाग स्वतंत्र है। पूरी दुनिया महामारी से लड़ रही है। एेसे में निर्वाचन विभाग अलग नहीं है। सरकार ने काेराेना वायरस काे महामारी मानते हुए देश में स्कूल, काॅलेज, यूनिवर्सिटी, सिनेमा हाॅल, जिम बंद करने के आदेश जारी कर दिए दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन विभाग ने नगर निगम के चुनावों की घोषणा कर दी। चुनावों में लाेगाें की भागीदारी ही नहीं हाेगी ताे चुनाव का मतलब ही नहीं है। चुनाव कार्यक्रम चलेगा ताे वायरस के रोकने के लिए चलाया अभियान फेल हाे जाएगा। जनहित को देखते हुए निर्वाचन आयोग काे ही अागे अाकर चुनाव की तारीखों को  आगे करवाने की पहल करनी चाहिए।

धारीवाल बोले- फाइल चुनाव आयाेग को भेज दी है
नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि हाईकाेर्ट ने 17 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने के आदेश निर्वाचन आयाेग काे दिए थे। राज्य सरकार इसकी पालना कर रही है। तीनाें जिलाें के कलेक्टराें ने चुनाव करवाने के दाैरान काेराेना वायरस फैलने की आशंका व्यक्त करते हुए चुनाव निरस्त करने के पत्र लिखे हैं। मैंने भी इस पर साइन कर इसे चुनाव आयाेग काे भेज दिया है। निगम चुनावाें काे निरस्त करने का फैसला निर्वाचन आयाेग व हाईकाेर्ट काे करना है। 

चुनाव तारीख इसलिए बदलें; वोटिंग मशीन के बटन और स्याही लगाने से संक्रमण का खतरा
 

  • 6 नगर निगमों के 35 लाख वोटर हैं। चुनाव केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ रहेगी। ऐसे में चुनाव 5 अप्रैल को ही हुए तो वोटिंग पर्सेंटेज गिरना तय है।
  • सेंटरों पर मौजूद चुनाव कर्मियों को अंगुली पर स्याही लगाने के लिए मतदाताओं को छूना ही पड़ेगा।
  • केंद्र ने बायोमीट्रिक अटेंडेंस तक पर रोक लगा दी है फिर वोटरों को वोटिंग मशीन का बटन तो दबाना ही पड़ेगा। ऐसे में संक्रमण का खतरा रहेगा।

महामारी को देखते हुए चुनाव करवाना ठीक नहीं
हवामहल विधायक और विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि दुनिया में काेराेना का खतरा मंडरा रहा है। आयोग काे चुनाव स्थगित कर अागे कराने चाहिए। हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव हाे रहे हैं। ऐसे में सरकार के अकेले की बस की बात नहीं है। सरकार काे अागे बढ़कर काेर्ट के सामने अपनी बात रखनी चाहिए। इन परिस्थितियों में चुनाव करवाना उचित नहीं हाेगा। 

काेराेना के डर से मतदान निश्चित ही कम हाेगा 
झाेटवाड़ा विधायक और कृषि मंत्री लाल चंद कटारिया के मुताबिक, चुनाव में जन भागीदारी ज्यादा से ज्यादा हाेनी चाहिए। काेराेना के डर से मतदान प्रतिशत कम रहेगा। एेसे में निगम चुनावों काे अागे करवाना उचित हाेगा। 

फैसला चुनाव आयोग को ही करना है
आदर्श नगर से विधायक रफीक खान का कहना है कि निगम के चुनावों की घोषणा के साथ ही वे चुनावों की तैयारियों में जुट गए हैं। अागे का जो भी फैसला है, वह निर्वाचन आयोग काे ही करना है।

लोगों का जीवन संकट में डालना ठीक नहीं होगा
सांगानेर विधायक अशाेक लाहाेटी बोले- काेराेना वायरस महामारी बना है। लाेगाें के जीवन काे संकट में डाल कर चुनाव नहीं कराने चाहिए। परिस्थितियों काे देखते हुए चुनाव स्थगित कर देने में ही सबकी भलाई है।

चुनाव प्रचार में लोगों की भीड़ जुटेगी ही 
मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ व किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने कहा- चुनाव प्रचार हाेंगे ताे नेताओं की सभाओं में भीड़ जुटेगी। चुनाव कराने का उचित समय नहीं है। पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी बोले- चुनाव आगे बढ़ते हैं ताे भाजपा काे काेई परेशानी नहीं है।


बाय इन्विटेशन- जस्टिस (रिटायर्ड) शिव कुमार शर्मा

संज्ञान लेकर निगम चुनाव स्थगित करे, नहीं तो सरकार भी कोर्ट में आवेदन कर सकती है
जयपुर, जोधपुर और कोटा के 2-2 नगर निगमों के चुनाव 5 अप्रैल को प्रस्तावित हैं। जब राज्य निर्वाचन आयोग ने यह तिथि घोषित की थी तब कोरोना की भयावहता से राजस्थान परिचित नहीं था। वायरस का संक्रमण यद्यपि हवा से नहीं होता फिर भी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भीड़ में न जाने के निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। स्कूलों में 31 मार्च तक अवकाश घोषित है। सिनेमाघरों को बंद रखने के निर्देश हैं। आईपीएल की तिथि भी आगे बढ़ा दी गई है। प्रदेश के सभी जिम व कोचिंग सेंटर भी 30 मार्च तक के लिए बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी केवल आवश्यक प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं और कोर्ट रूम में भी अनावश्यक उपस्थिति को निषिद्ध कर दिया है। दूसरी ओर 5 अप्रैल को जो मतदान हैं। इसमें करीब 35 लाख मतदाता वोट देंगे। प्रत्याशी प्रचार करेंगे और एक स्थल पर भीड़ एकत्र होगी। चुनाव एक संवैधानिक कृत्य है, लेकिन विषम परिस्थितियों में इसे स्थगित कर सकते हैं। कोरोना के भय से मतदाता मतदान करने नहीं जाएंगे और इससे चुनाव प्रभावित होंगे। मेरा मानना है कि यदि चुनाव कोर्ट के आदेश से हो रहे हैं तो कोर्ट में आवेदन पत्र प्रस्तुत करके चुनावों को स्थगित कराया जा सकता है। चुनाव आयोग को शीघ्र ही जनहित में निर्णय लेकर चुनाव स्थगित करने चाहिए क्योंकि एेसे में चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं है।
 

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