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6 नहीं अब 3 कोच की मेट्रो दौड़ेगी

एक वर्ष पहले
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2014 में पहली बार डीपीआर बनी थी

सीतापुरा से अंबाबाड़ी के बीच बनने वाली सैकंड फेज की मेट्रो की पहली डीपीआर साल 2014 में बनी थी, लेकिन अब तक यह फाइनल नहीं हो पाई है। दो बार भाजपा और एक बार कांग्रेस सरकार में डीपीआर बनने के बाद अब चौथी बार डीपीआर का फाइनल ड्राफ्ट तैयार हो गया है। दिल्ली मेट्राे की अाेर से भेजे गए ड्राफ्ट में मेट्रो का सैकंड फेज लाइट मेट्राे की तर्ज पर चलाने का प्रस्ताव दिया गया है। लागत 10 हजार करोड़ रु. से घटाकर 5 हजार करोड़ रु. होगी। मेट्रो के रूट में भी बदलाव किया गया है। अब यह अजमेरी गेट की जगह अशोक मार्ग से अंबाबाड़ी तक जाएगी। नई मेट्रो 6 की जगह 3 कोच की होगी। यही नहीं सभी 20 स्टेशन एलीवेटेड होंगे। इसके अलावा मेट्राे स्टेशनों के लेवल में भी कमी गई है। मेट्राे स्टेशन अब सिंगल लेवल के हाेंगे। इस मेट्राे काे लाइट मेट्राे का नाम दिया गया है।

अाचार संहिता से पहले 13 को परकोटे की मेट्राे काे हरी झंडी दिखा सकते हैं सीएम

निगम चुनाव आचार संहिता से पहले चांदपाेल से बड़ी चाैपड़ के बीच मेट्राे काे सीएम अशाेक गहलोत ट्रायल रन के दाैरान हरी झंडी दिखा सकते हैं। बड़ी अाैर छाेटी चाैपड़ मेट्राे स्टेशनों पर सिविल काम पूरा हाेने के बाद फिनिशिंग अंतिम चरण में है। रात 11 बजे बाद मेट्राे की ट्रायल की जा रही है। अफसरों की मानंे ताे सीएम का 13 मार्च काे हरी झंडी दिखाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। 16 व 17 मार्च को कमिश्नर फाॅर मेट्राे रेलवे सेफ्टी (सीएमअारएस) का निरीक्षण भी है। -संबंधित खबर पेज 17 पर पढ़ें

कम करने की 2 वजह

1राइडर शिप : पुरानी डीपीआर में फर्स्ट व सैकंड फेज की राइडर शिप बहुत ज्यादा थी। अभी मानसरोवर से चांदपोल के बीच राइडर-शिप में से मात्र 15% ही है।

2बजट : प्रदेश सरकार के पास सैकंड फेज के लिए बजट ही नहीं है। सीएम गहलोत का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के बाद बावजूद मेट्रो का बजट में जिक्र ही नहीं हुआ।

स्टेशन 20 ही होंगे

नई डीपीआर में मेट्राे स्टेशन कम नहीं किए हैं। है। मेट्राे स्टेशन पुरानी डीपीआर के तहत ही रखे गए हैं। अंबाबाडी, पानीपेच, एसएमएस अस्पताल, अहिंसा सर्किल, चाैमू सर्किल, गर्वमेंट हाॅस्टल, नारायण सिंह सर्किल, एसएमएस स्टेडियम, गांधी नगर माेड, टाेंक फाटक, देव नगर, गाेपालपुरा, महावीर नगर, दुर्गापुरा, सांगानेर, हल्दीघाटी गेट, प्रताप नगर अाैर सीतापुरा ई. एरिया अंतिम मेट्राे स्टेशन हाेगा।

यह हाेगा मेट्रो का रूट

नई डीपीआर ड्राफ्ट के तहत अब मेट्रो अजमेरी गेट तक नहीं जाएगी। इससे पहले ही वह महारानी कॉलेज से अशाेक मार्ग हाेते हुए अहिंसा सर्किल, चाैमू सर्किल, गर्वमेंट हाॅस्टल, संसार चंद्र राेड हाेते हुए चांदपोल मेट्रो स्टेशन से जुड़ेगी। पहले इसे सिंधी कैंप बस स्टैंड पर मिलाने का प्रस्ताव था। यहां अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनना था, लेकिन अब चांदपोल से पीतल फैक्ट्री, दूध मंडी हाेते हुए मेट्रो अंबाबाड़ी पहुंचेगी। वहीं महारानी कॉलेज से टाेंक राेड हाेते हुए सीतापुरा तक जाएगी।

मेट्राे की ट्रायल रन

मेट्रो फेज 2 सभी स्टेशन एलिवेटेड होंगे

अजमेरी गेट से नहीं अशाेक मार्ग से अंबाबाड़ी जाएगी, सारे स्टेशन एलिवेटेड होंगे, लागत 10 हजार करोड़ से घटकर 5 हजार कराेड़

बजट घटाने के लिए हर जगह कुछ-कुछ कटौती की, नाम भी लाइट मेट्रो किया

{कोच : पुरानी डीपीआर में मेट्रो स्टेशन 6 काेच के बनने प्रस्तावित थे, अब नई डीपीआर ड्राफ्ट में 3 काेच के प्रस्तावित हैं। इसके पीछे राइडर शिप कम होने का हवाला दिया गया। 200 करोड़ कम होंगे।

{प्लेटफॉर्म : पहले बनी डीपीआर में अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन थ्री अाैर एलीवेटेड स्टेशन टू लेवल के बनने प्रस्तावित थे। अब इन्हें कम करके सिंगल लेवल कर दिया है। काेणकाेर लेवल खत्म कर दिया है। प्लेटफाॅर्म बदलने के लिए एफओबी बनाया जाएगा। 1 हजार करोड़ कम होंगे।

2 बार भाजपा, 1 बार कांग्रेस सरकार में डीपीआर

10,394 कराेड़ रुपए लागत आनी थी

23.77 किलोमीटर का
था पूरा प्रोजेक्ट


9.99 किमी अंंडरग्राउंड

13.78 किलोमीटर एलिवेटेड चलनी थी मेट्रो

मेट्राे-सैकंड लाइट फेेज} 6 साल में चौथी डीपीआर का ड्राफ्ट, फाइनल अब भी नहीं

डीएमआरसी से डीपीआर ड्राफ्ट मिल गया है। इसका अध्ययन करने के बाद डीएमआरसी अफसरों को कुछ क्वरी के बारे में अपडेट किया है। फाइनल डीपीआर आनी बाकी है।
-सुबोध कुमार जिंदल, डायरेक्टर, सिविल प्रोजेक्ट

{स्टेशन : स्टेशनों पर उतरने-चढ़ने के लिए एस्केलेटर नहीं लगे होंगे। सिर्फ लिफ्ट व सीढ़ियां होंगी। स्टेशन के स्पेस में भी कमी की जाएगी। छाेटे हाेने की वजह से कम से कम लागत अाैर कम जगह एक्वायर करनी हाेगी।
800 करोड़ कम होंगे।**

{रूट : सभी स्टेशन एलीवेटेड होंगे। इससे 3 हजार कराेड़ कम हुए। अंडरग्राउंड मेट्रो में प्रति किमी 500 कराेड़ रु. खर्च हाेते हैं। एलीवेटेड में 200 कराेड़ प्रति किमी। पहली डीपीआर में 10 किमी अंडरग्राउंड मेट्रो थी। **
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