हजूरिया-खजूरिया के बाद अब जयपुरिया
क्या हैं हजूरिया-खजूरिया?
1990 के दशक में गुजरात भाजपा में बड़ी सफल बगावत हुई थी। तब से गुजरात की राजनीति में ‘हजूरिया’ और ‘खजूरिया’ शब्द प्रयोग का चलन शुरू हुआ। विरोधियों ने भाजपा का साथ देने वाले विधायकों के लिए ‘हजूरिया’ शब्द प्रयोग किया । वहीं बगावत कर खजुराहो ले जाए गए विधायकों के लिए खजूरिया शब्द प्रयोग हुआ। बगावत शंकरसिंह वाघेला कीअगुवाई में हुई थी। अब जयपुरले जाए जा रहे विधायकों के लिए जयपुरिया शब्द प्रयोग शुरू हो सकता है।
गांधीनगर | गुजरात से राज्यसभा की 04 सीटों के लिए भाजपा के 03 प्रत्याशी उतारने के बाद अब कांग्रेस को गुजरात में जनप्रतिनिधियों की हॉर्स ट्रेडिंग का भय सता रहा है। ऐेसी किसी भी संभावना को नियंत्रित करने और पार्टी विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति के तहत गुजरात कांग्रेस ने अपने विधायकों को गुजरात से बाहर भेजना शुरू कर दिया है। गुजरात कांग्रेस ने अपने 73 विधायकों में से 50 को राजस्थान भेजने का फैसला किया है। पहली खेप में 14 विधायकों को जयपुर-राजस्थान भेजा गया है। शेष 36 विधायकों को भी इसी तरह भेजा जाएगा। अन्य 05 को किसी रिसॉर्ट में ले जाया जाएगा जबकि 15 से 18 विधायक गुजरात में ही रहेंगे। चर्चा है- कांग्रेस विधायक शक्ति सिंह गोहिल और भरत सिंह सोलंकी के गुट में विभाजित प्रतीत हो रहे हैं। उत्तर गुजरात अंचल के विधायकों का समूह भरत सिंह के समर्थन में है। एक समूह जयपुर भेजा गया है -दूसरे समूह को उदयपुर भेजा जा सकता है।
राज्यसभा चुनाव } हॉर्स ट्रेडिंग से बचने कांग्रेस 14 विधायक आए जयपुर