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सफाईकर्मियों की भर्ती के बाद बीट प्रणाली काे खत्म किया, निगम के अफसरों ने गुपचुप 170 बीट पर लगा दिए फिर से अस्थाई कर्मचारी
नगर निगम के अफसर ठेकेदाराें काे गुपचुप फायदा पहुंचाने में काेई कसर नहीं छाेड़ रहे है। जिस बीट प्रणाली काे अफसराें ने सफाईकर्मियाें की भर्ती हाेने के बाद में खत्म कर दिया था, उस प्रणाली काे अधिकारियाें ने एक निजी फर्म काे फायदा पहुंचाने के लिए फिर से गुपचुप टैंडर जारी करके शुरू कर दिया। इससे हर माह नगर निगम काे दस लाख रुपए से ज्यादा की चपत लग रही है। सफाईकर्मियाें की भर्ती हाेने के बाद उनसे शहर की सफाई करवाने के बजाए निगम कार्यालयाें में अलग-अलग कामकाज के लिए लगा रखा है, उनके साथ में बीट प्रणाली के अाधार पर 170 बीट पर अस्थाई कर्मचारियाें काे भी लगा रखा है। खास बात यह है कि अस्थाईकर्मी अधिकतर कार्यालयाें में से गायब रहते है अाैर निगम के अधिकारी प्रतिदिन के अाधार पर फर्म काे भुगतान कर रहे है। हैरत की बात यह है कि निगम के अफसराें काे अभी तक यह पता नहीं कि बीट प्रणाली के तहत अभी भी अस्थाई कर्मचारी नगर निगम की अलग-अलग शाखा में कार्यरत है। पड़ताल में सामने अाया कि निगम द्वारा प्रति कर्मचारी 6 हजार का भुगतान किया जा रहा है। जबकि फर्म द्वारा कर्मचारियाें काे महज 5 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है।
4959 सफाईकर्मियाें की भर्ती के बाद खत्म कर दी थी बीट प्रणाली
पड़ताल में सामने अाया कि नगर निगम ने एक निजी फर्म काे शहर की साफ-सफाई करने के लिए अस्थाई कर्मचारी लगाने के लिए टैंडर दे रखा था। निगम के अफसराें काे कुछ अनियमित भुगतान हाेने की शिकायते मिलने के बाद स्थाई सफाईकर्मियाें की भर्ती निकाली गई थी। पिछले साल निगम ने 4959 पदाें पर सफाईकर्मियाें की भर्ती की थी अाैर निगम में बीट प्रणाली काे खत्म कर दिया था। इसके बाद अफसराें ने निगम की अलग-अलग शाखाओं में 500 के करीब सफाईकर्मियाें काे लगा दिया। इसके बाद जिस फर्म से निगम ने अस्थाई कर्मचारी लेना बंद कर दिया था, उस फर्म ने अधिकारियाें से मिलकर गुपचुप 170 बीट पर फिर से अस्थाई कर्मचारी लगाने के लिए टैंडर करा लिया। पूरे मामले में एक उपायुक्त व इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध है।
सफाईकर्मियाें की भर्ती के बाद निगम में बीट प्रणाली ताे खत्म हाे गई। अगर अभी भी बीट सिस्टम के तहत अस्थाई कर्मचारी लगा रखे है ताे जांच करवाएंगे।
अरूण गर्ग, एडिशनल कमिश्नर, नगर निगम
हमारे से जिस भी शाखा द्वारा कर्मचारी मांगे जाते है ताे उस शाखा काे एक फर्म के मार्फत उपलब्ध करा दिए जाते है। वर्तमान में करीब 170 बीट पर कर्मचारी काम कर रहे है।
देवेन्द्र कुमार जैन, उपायुक्त स्वास्थ्य प्रथम