ई-सिगरेट पर रोक, दो माह में 10 नमूने तो लिए...पर जांच कैसे हो, तय नहीं

Jaipur News - युवाओं में नशे की लत को रोकने के लिए सरकार ने विश्व तंबाकू दिवस पर बड़ा फैसला लेते हुए ‘ई-सिगरेट’ के उत्पादन, बिक्री,...

Bhaskar News Network

Aug 11, 2019, 08:50 AM IST
Jaipur News - rajasthan news ban on e cigarette 10 samples taken in two months but how to check not decided
युवाओं में नशे की लत को रोकने के लिए सरकार ने विश्व तंबाकू दिवस पर बड़ा फैसला लेते हुए ‘ई-सिगरेट’ के उत्पादन, बिक्री, भंडारण, ऑनलाइन या ऑफलाइन पर रोक लगा दी। औषधि नियंत्रण संगठन ने आननफानन में रोक के बाद छापेमार कार्रवाई कर जयपुर शहर में ई-सिगरेट के 10 से ज्यादा नमूने लेकर लैब में जांच के लिए भेजा। लेकिन विभाग के अधिकारियों की ओर से नमूने लेने के दो माह में भी राज्य की जयपुर की सेठी कॉलोनी स्थित एकमात्र ड्रग टेस्टिंग लैब ने जांच रिपोर्ट जारी नहीं की। इसमें निकोटिन की उपस्थिति के अलावा अन्य जांच की जाती है। भास्कर ने लैब में रिपोर्ट जारी नहीं करने के कारणों की जानकारी करने पर पता चला कि अभी तक स्टेंडर्ड प्रोसीजर ही नहीं बने है। अौर 5 हजार से ज्यादा दवाअों के नमूनों की पेंडेंसी के बढ़ते ग्राफ व मेन-पावर की कमी के चलते जांच नहीं हुई। विशेषज्ञों के अनुसार यह गैर-लाइसेंस वाला प्रोडक्ट है। जो एेसे प्रोडक्ट के रूप में बेचा जाता है जो लोगों को स्मोकिंग छोड़ने में मदद करते हैं। यही वजह है कि युवाओं के बीच इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह डिवाइस तंबाकू को नहीं जलाती है, बल्कि लिक्विड निकोटीन सॉल्यूशन से धुआं उड़ाने के लिए हीटिंग डिवाइस का इस्तेमाल करती है। धुएं को सिगरेट पीने वाला श्वांस के साथ अंदर लेता है। जयपुर समेत देश भर में ई-सिगरेट के 450 ब्रांड मौजूद हैं, जिसमें करीबन 8 हजार फ्लेवर की ई-सिगरेट उपलब्ध है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर लोकेन्द्र शर्मा के अनुसार केन्द्र सरकार की ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी की मीटिंग में विशेषज्ञों ने ई-सिगरेट और ऐसी अन्य कई डिवाइस को ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट1940 के सेक्शन 3(बी) के तहत ड्रग माना है। ईएनडीएस के तहत ई-सिगरेट, हीट-नॉट बर्न डिवाइस, वेप, ई-शीशा, ई-निकोटीन, फ्लेवर्ड हुक्का शामिल है। बाजार में डिवाइस और रिफिल एक साथ या अलग-अलग भी उपलब्ध है। एक डिवाइस की कीमत औसतन 500 से 900 रुपये है। एक रिफिल (10 एमएल) की कीमत 300 से 1000 रुपये है।

कारणों की जांच होगी

ई-सिगरेट के नमूनों की जांच नहीं होने के कारणों का पता करेंगे। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। -अजय फाटक, ड्रग कंट्रोलर सैकंड

दवाअों के नमूने पहले से पेडिंग है। ई-सिगरेट के भी टेस्ट प्रोटोकोल बनते ही जांच होने लगेगी। -एच.पी.सोनी, उपनिदेशक, ड्रग टेस्टिंग लैब

क्या है ई-सिगरेट

इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम याई-सिगरेट यह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से सिगरेट की तरह पिया जानेवाला उपकरण है। कार्टिज में निकोटिन युक्त तरल पदार्थ होता है। बैटरी से हीट पैदा होती है, जिससे लिक्विड भाप बनता है। इसे सिगरेट के धुंए की तरह लोग पीते है। सिगरेट, सिगार या पाइप जैसे धुम्र पान वाले तंबाकू पदार्थों का एक विकल्प है। एसएमएस अस्पताल के डॉ.पुनीत सक्सेना व डॉ. पवन सिंघल का कहना है कि ई-सिगरेट से न केवल दिल बल्कि फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। इसमें अल्ट्रा फाइन पार्टिकल, विषैले पदार्थ एवं पीएम 2.5 की अधिकता होती है। ग्लिसरीन की वजह से एक्यूट लंग इंजरी का भी खतरा रहता है।

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