खुशबूरहित लिक्विड सोप, आंसू नहीं आएं ऐसे शैंपू से बच्चे को नहलाएं

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Feb 15, 2020, 08:50 AM IST
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जन्म के पंद्रह दिन बाद मालिश शुरू करें, गाढ़ा तेल नहीं लगाएं

डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक, जन्म के छह घंटे बाद बच्चे को नहलाया जा सकता है। अगर नहाते समय बच्चा बैठ नहीं पा रहा है तो टब में उसके हिप तक पानी भरकर नहलाएं। पानी का तापमान 37 डिग्री होना चाहिए। पांच से दस मिनट तक रखें। खाली पानी नहीं, लिक्विड सोप से नहलाएं। एेसे लिक्विड साबुन का इस्तेमाल करें,जिसमें खुशबू नहीं हो। क्लिनजिंग के बाद पानी से चमड़ी को अच्छी तरीके से साफ करें। चमड़ी पर पानी रहने के कारण यह डैमेज हो सकती है। सात से दस दिन में नाल गिरती है। इसके गिरने के बाद थोड़ा- सा एंटीसेप्टिक लगाएं। नहलाने के बाद टॉयलेट एरिया के आस-पास की जगह अच्छी से पोछे। ताकि साबुन जमा नहीं रहे। हल्के हाथ से पोंछे। टेल्कम पाउडर लगाना अवॉइड करें। इससे एलर्जी हो सकती है।


बच्चे को रोजाना नहलाना चाहिए। लोगों में यह अवधारणा है कि जब तक बच्चे की नाल रहेगी तब तक उसे नहीं नहलाएंगे। यह गलत है।
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{पानी का तापमान 37 डिग्री तक रखना चाहिए

{ज्यादा सोखने वाले डायपर का इस्तेमाल करें

37 सप्ताह तक स्किन का विशेष ध्यान रखं

नेपी एरिये काे अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। ऐसा नहीं किए जाने से स्किन खराब हो सकती है। रेशे पड सकते हैं। तेल लगाते वक्त सावधानी बरतें। गाढ़ा तेल नहीं लगाएं। अन्यथा स्किन छेद ब्लॉक हो जाते हैं। ऐसे डाइपर लगाएं, जिनमें सोखने की क्षमता होती है। बालों में ड्रेंडफ इकट्ठी नहीं हो पाएं। इसके लिए ऐसा शैंपू लगाएं। जिससे आंसू नहीं आएं। 37 सप्ताह से छोटे बच्चों में यह परेशानी जयादा होती है। इनकी स्किन नाजुक ज्यादा होती है। एेसे में, बच्चे को एक्ने,नाक के पास छोटे-छोटे दाने आने पर घबराएं नहीं। मां के हॉर्मोन की वजह से भी एक्ने होते हैं। समय के साथ एक्ने और मंगोलियन स्पॉट ठीक हो जाते है।

kid's care

नवजात शिशु की चमड़ी बहुत ज्यादा नाजुक होती है। गर्भ से बाहर आने के बाद चमड़ी ही उसे कई तरह के इंफेक्शन और वाटर लॉस से बचाती है। कम से कम एक महीने तक चमड़ी बच्चे को सुरक्षित रखने में मददगार है। इसकी लेयर सभी ऑर्गंस को कवर रखती हैं। इसलिए इसका रखरखाव करना जरूरी है। जन्म के पंद्रह दिन बाद उसकी मालिश शुरू करनी चाहिए। मालिश हल्के हाथ से करें। नारियल तेल का इस्तेमाल करेंें। सरसों का तेल अवॉइड करें। इस तेल से एलर्जी हो सकती है। तेज मालिश करने से चमड़ी छिलने व इंफेक्शन का चांस बना रहता है।


डाॅ.मनीषा निझावन, डर्मेटोलॉजिस्ट, जयपुर

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