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दिल्ली-चंडीगढ़ में कॉमन एडमिशन शेड्यूल... तो राजस्थान में क्यों नहीं?
मार्च के महीने में जहां एक तरफ स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं का दौर चलता है वहीं एंट्री लेवल क्लास की प्रवेश प्रक्रिया भी अंतिम चरण पर पहुंच चुकी होती है। लेकिन दुविधा यह है कि सभी स्कूल अलग-अलग समय पर प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करते हैं जिसकी वजह से अभिभावकों को पता ही नहीं चलता कि कौनसे स्कूलों में कब और कौनसी क्लास के लिए प्रवेश शुरू होंगे। इसके लिए उन्हें या तो बार-बार स्कूलाें के चक्कर लगाने पड़ते हैं या फिर हर स्कूल की वेबसाइट या विज्ञापनों के भरोसे रहना पड़ता है। कई स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू हो जाती है तो कुछ स्कूलों में यह सेशन शुरू होने तक जारी रहती है, जबकि दिल्ली और चंडीगढ़ में सरकार द्वारा सभी स्कूलों के लिए कॉमन एडमिशन शेड्यूल जारी किया जाता है। अभिभावकों को ऐसे ही पारदर्शी सिस्टम की दरकार है।
प्री प्राइमरी स्कूलों में हर साल करीब 100 दाखिले
डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन ऑन स्कूल एजुकेशन (डाइस) के वर्ष 2016-17 में लिए आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में कुल स्कूलों की संख्या 105,436 है। अकेले राजधानी जयपुर में कुल 8,937 स्कूल हैं जबकि निजी स्कूलों की संख्या 4,889 है। प्री-प्राइमरी कक्षाओं की सुविधा वाले कुल स्कूलों की संख्या 3,798 है। (इनमें 3751 नर्सरी स्कूल शामिल हैं) इन स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला लेने वाले छात्रों की कुल संख्या 392,084 थी।
स्पष्ट है कि स्कूलों की संख्या की तुलना में दाखिले के लिए योग्य छात्रों की संख्या कहीं ज्यादा है और प्रतिवर्ष दाखिला लेने वाले छात्रों की औसत संख्या प्रति स्कूल 100 से भी अधिक है। टॉप स्कूलों में सीटों की तुलना में आवेदनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। एेसे में अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए मनपसंद स्कूल में दाखिला दिला पाना लोहे के चने चबाने से कम नहीं!
दिल्ली में सार्वजनिक की जाती हैं एडमिशन की प्रक्रिया, मापदंड व तारीख
दिल्ली में गवर्नमेंट और डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन ने पिछले साल नवंबर में सेशन 2020-21 में स्कूलों में नर्सरी, केजी और क्लास फर्स्ट के एडमिशन के लिए कॉमन डेट्स की घोषणा की थी जिसके तहत सभी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया 12 फरवरी तक पूरी कर ली गई। इससे अभिभावकों को परेशान नहीं होना पड़ा।
दिल्ली में प्रवेश की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा का ध्यान रखते हुए डायरेक्टरेट द्वारा तय किए गए प्रवेश संबंधी मापदंड, अपर एज लिमिट, फीस से जुड़ी जानकारी स्कूल वेबसाइट और डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन की वेबसाइट पर अपलोड करनी जरूरी कर दी गई है। प्रवेश प्रारंभ होने की सूचना, फॉर्म की उपलब्धता व उनके जमा करने की तारीख संबंधी जानकारी, फर्स्ट लिस्ट और सेकंड लिस्ट की कॉमन डेट्स होने के कारण अभिभावक असमंजस की स्थिति में नहीं रहते।
चंडीगढ़ में भी जारी होता है कॉमन एडमिशन शेड्यूल
चंडीगढ़ में एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा प्रवेश की सूचना नोटिस बोर्ड व स्कूल की वेबसाइट पर देनी जरूरी है जिसमें प्रवेश कक्षा, सीटों की संख्या, एज लिमिट और कट-ऑफ डेट, फीस, ड्राॅ की तारीख, डॉक्यूमेंट्स की सूचना शामिल है। इन सूचनाओं को जारी करने की तारीखें भी सरकार द्वारा निश्चित की जाती हैं।
प्रदेश में कहीं भी कॉमन एडमिशन शेड्यूल नहीं
जयपुर सहित राजस्थान के सभी बड़े शहरों के स्कूलों में दाखिले के लिए कोई एक निश्चित समय निर्धारित न होने के कारण स्कूल अलग-अलग समय पर दाखिले की प्रक्रिया को अंजाम देते हैं। इस कारण अभिभावकों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बड़े व नामी निजी स्कूलों में दाखिला ले चुके 2 छात्रों के अभिभावकों से बातचीत से पता चला कि शहर के टॉप 5 स्कूलों में उन्हें खुद कई चक्कर काटकर दाखिले की तारीख के बारे में पता करना पड़ा और फॉर्म के लिए उन्हें 500 से 2000 रुपए तक जमा कराने पड़े।
जब शहर के टॉप स्कूलों से बतौर अभिभावक बात की गई तो जवाब मिला कि प्रवेश प्रक्रिया की कोई तय तारीख
नहीं है। एडमिशन ऑफिसर ने यह भी बताया कि स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया जनवरी में ही पूरी हो गई थी। जिसकी सूचना स्कूल की वेबसाइट पर जारी की गई थी।
एक्सपर्ट व्यू
“दाखिले की प्रक्रिया के लिए एक तारीख निश्चित न होने से अभिभावकों को प्लानिंग करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी नौकरीपेशा लोगों और व्यापार के सिलसिले में शहर के बाहर यात्रा करने वालों को होती है। दिल्ली में सरकार ने इस समस्या का समाधान निकाला है। यहां दाखिले से संबंधित सभी प्रक्रियाओं जैसे कि आवेदन पत्र जारी करने, आवेदन पत्र भरकर जमा करने, दाखिले के लिए चयनित छात्रों की सूची जारी करने और दाखिला प्रक्रिया पूरी करने जैसी सभी तिथियां सरकार तय कर सार्वजनिक करती है। यदि राजस्थान में भी ऐसी ही व्यवस्था अपना ली जाए तो अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।”
-अविनाश चंद्र (सेंटर फॉर सिविल सोसायटी)
स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया का समय और मापदंड अलग-अलग हैं। कॉमन सिस्टम के अभाव में अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और वे मनचाहे स्कूल में बच्चे का दाखिला नहीं करवा पाते। ऐसे में एक पारदर्शी और कॉमन टाइम टेबल होना चाहिए जिसके मुताबिक सभी एडिड व अनएडेड स्कूलों की सीटों पर प्रवेश निश्चित होना चाहिए।
-दिनेश कांवट, अध्यक्ष, पेरेंट वेलफेयर सोसाइटी
प्रदेश में दाखिले की दुविधा
स्रोत : सेंटर फॉर सिविल सोसायटी
जयपुर सहित प्रदेश के स्कूलों में एंट्री लेवल क्लासेज के लिए प्रवेश प्रक्रिया की होती है अलग-अलग डेट, पारदर्शिता की कमी से अभिभावक परेशान
निजी स्कूल ऐसे हैं जो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं।
2,660
राजस्थान में कुल स्कूलों की संख्या
105,436
निजी स्कूलों
की संख्या
34,846
सरकारी स्कूलों
की संख्या
67,930
स्कूल अकेले राजधानी जयपुर में हैं
8,937
है जयपुर शहर
की साक्षरता दर
75.51%
साक्षरता दर वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राजस्थान में थी
66.11%