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सरकार के खिलाफ भाजपा के संकल्प पर कांग्रेस ने दे दिया समर्थन, सभापति ने बात संभाली

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 07:27 AM IST

Jaipur News - विधानसभा में बुधवार को कांग्रेस के लिए उस समय अजीब स्थिति बन गई जब सरकार के एक संशोधन बिल पर वोट करवाने के लिए भाजपा...

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विधानसभा में बुधवार को कांग्रेस के लिए उस समय अजीब स्थिति बन गई जब सरकार के एक संशोधन बिल पर वोट करवाने के लिए भाजपा की ओर से पेश किए गए संकल्प को कांग्रेस सदस्यों ने समर्थन दे दिया। सदन में सहकारिता संशोधन विधेयक पर बहस चल रही थी। यह संशोधन विधेयक इसलिए लाया गया ताकि सहकारी सोसायटीज में पदाधिकारी विधायकों को अपनी सदस्यता नहीं गंवानी पड़े। दरअसल भाजपा ने 2016 में सहकारी सोसायटी विधेयक में यह प्रावधान किया था कि यदि किसी सहकारी सोसायटी का कोई सदस्य , सांसद, मंत्री या विधायक निर्वाचित होता है तो उसे या तो सोसायटी का पद छोड़ना होगा या फिर मंत्री, सांसदी और विधायकी छोड़नी होगी। कांग्रेस ने 26 दिसंबर 2018 को अध्यादेश के जरिए भाजपा के इस विधेयक में यह संशोधन कर दिया कि विधायक रहते हुए भी कोई सदस्य सहकारी सोसायटी का सदस्य रह सकता है।

सदन में इस अध्यादेश के लिए संशोधन विधेयक लाया गया था। भाजपा की तरफ से उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने सदन में इस अध्यादेश को अस्वीकार करने का संकल्प रखा और विधेयक पर वोट डिविजन करवाने की मांग की। बिल पर बहस पूरी होने के बाद सभापति राजेंद्र पारीक ने सदन पूछा कि जो इस अध्यादेश को अस्वीकार करने के पक्ष में हों वे हां कहें। कांग्रेस के विधायकों को इस पर तेज आवाज में ना कहना था लेकिन इसकी जगह वे जोर-जोर से हां कहने लगे। भाजपा की तरफ से गुलाबचंद कटारिया व राजेंद्र राठौड़ ने तुरंत मामले को पकड़ा आैर सभापति राजेंद्र पारीक से बिल पर वोट डिविजन करवाने की मांग कर डाली। माजरा समझ में आते ही कांग्रेस के खेमे में हड़कंप मच गया। यह मामला अपनी ही सरकार के विधेयक के विरोध में विपक्ष के समर्थन का बन गया था। भाजपा विधायक वेल में उतर कर वोट डिविजन के लिए नारेबाजी करने लगे। सभापति राजेंद्र पारीक ने स्थिति को संभालते हुए कहा कांग्रेस के सदस्यों की हां नहीं बल्कि ना ही सुनी है।

भाजपा के निशाने पर इसलिए था विधेयक

सहकारी संशोधन विधायक भाजपा के निशाने पर था। राजेंद्र राठौड़ ने बिल पर बहस के दौरान आरोप लगाया कि सरकार अपने विधायक रामलाल जाट को डेयरी चेयरमैन बनाए रखने के लिए इस बिल में संशोधन कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो बिल पारित करवाया था उसमें यह प्रावधान था कि यदि सहकारी सोसायटी का पदाधिकारी विधायक बनता है तो इसके 14 दिनों में उसे सोसायटी की सदस्यता छोड़नी होगी। राठौड़ बोले कि रामलाल जाट को सरकार ने मंत्री नहीं बनाया इसलिए उन्हें दुग्ध सहकारी सोयायटी का चेयरमैन बनाए रखने के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाया गया। राठौड़ बोले कि जिस वक्त अध्यादेश लाया गया उस समय कांग्रेस की कैबिनेट का गठन भी नहीं हुआ था। संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल बोले कि तब तक मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने शपथ ले ली थी। इसलिए कैबिनेट गठित हो चुकी थी।

रामलाल जाट बोले- मुझे हटाने के लिए भाजपा जानबूझ कर लाई थी बिल

इस पर रामलाल जाट बोले कोआपरेटिव एक्ट 2001 में विधायक व मंत्रियों के सोसायटी में चुनाव लड़ने पर कोई बाध्यता नहीं थी लेकिन भाजपा ने सत्ता में आने के बाद 2016 में जानबूझ कर कुछ लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए इस संशोधन को पारित करवा लिया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने अपने फायदे के लिए इस कानून को तोड़ा-मरोड़ा लेकिन हमारी सरकार ने इसे ठीक करने का काम किया है।

पॉलिटिकल रिपोर्टर | जयपुर

विधानसभा में बुधवार को कांग्रेस के लिए उस समय अजीब स्थिति बन गई जब सरकार के एक संशोधन बिल पर वोट करवाने के लिए भाजपा की ओर से पेश किए गए संकल्प को कांग्रेस सदस्यों ने समर्थन दे दिया। सदन में सहकारिता संशोधन विधेयक पर बहस चल रही थी। यह संशोधन विधेयक इसलिए लाया गया ताकि सहकारी सोसायटीज में पदाधिकारी विधायकों को अपनी सदस्यता नहीं गंवानी पड़े। दरअसल भाजपा ने 2016 में सहकारी सोसायटी विधेयक में यह प्रावधान किया था कि यदि किसी सहकारी सोसायटी का कोई सदस्य , सांसद, मंत्री या विधायक निर्वाचित होता है तो उसे या तो सोसायटी का पद छोड़ना होगा या फिर मंत्री, सांसदी और विधायकी छोड़नी होगी। कांग्रेस ने 26 दिसंबर 2018 को अध्यादेश के जरिए भाजपा के इस विधेयक में यह संशोधन कर दिया कि विधायक रहते हुए भी कोई सदस्य सहकारी सोसायटी का सदस्य रह सकता है।

सदन में इस अध्यादेश के लिए संशोधन विधेयक लाया गया था। भाजपा की तरफ से उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने सदन में इस अध्यादेश को अस्वीकार करने का संकल्प रखा और विधेयक पर वोट डिविजन करवाने की मांग की। बिल पर बहस पूरी होने के बाद सभापति राजेंद्र पारीक ने सदन पूछा कि जो इस अध्यादेश को अस्वीकार करने के पक्ष में हों वे हां कहें। कांग्रेस के विधायकों को इस पर तेज आवाज में ना कहना था लेकिन इसकी जगह वे जोर-जोर से हां कहने लगे। भाजपा की तरफ से गुलाबचंद कटारिया व राजेंद्र राठौड़ ने तुरंत मामले को पकड़ा आैर सभापति राजेंद्र पारीक से बिल पर वोट डिविजन करवाने की मांग कर डाली। माजरा समझ में आते ही कांग्रेस के खेमे में हड़कंप मच गया। यह मामला अपनी ही सरकार के विधेयक के विरोध में विपक्ष के समर्थन का बन गया था। भाजपा विधायक वेल में उतर कर वोट डिविजन के लिए नारेबाजी करने लगे। सभापति राजेंद्र पारीक ने स्थिति को संभालते हुए कहा कांग्रेस के सदस्यों की हां नहीं बल्कि ना ही सुनी है।

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