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डिलीट के बाद भी फेसबुक के पास रहती हैं निजी इन्फॉर्मेशन

4 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर जयपुर

आपके साथ कई बार ऐसा हुआ होगा, अापने फेसबुक अकाउंट में सिक्योरिटी सेटिंग्स लगा रखी हैं, बावजूद उसके आपकी जानकारी लोगों तक पहुंच रही हैं। इसी तरह फेसबुक अकाउंट पर आपने जानकारी और फोटो साझा की हैं, उन्हें डिलीट करने के बावजूद वो हमेशा के लिए डिलीट नहीं होंगी। सुनकर हैरान होंगे कि आपके पर्सनल डेटा की निगरानी लगातार फेसबुक कर रहा है। आपके डिलीट करने के बावजूद जानकारियों को फेसबुक अपने सिस्टम में सेव कर रहा है। इसी तरह से लगातार इंस्टाग्राम से लेकर गूगल तक आपके पर्सनल डेटा चोरी कर रहे हैं। ऐसी ही कई चौंकाने वाली बाते ‘डाटा प्रोटेक्शन एंड प्राइवेसी एंड इम्पैक्ट अॉफ पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल’ पर आयोजित अवेयरनेस वर्कशॉप में सामने आई। ये मौका था, कट्स इंटरनेशनल की ओर से आयोजित अवेयरनेस वर्कशॉप का।

पैनल डिस्कशन में कट्स इंटरनेशनल की डायरेक्टर शगुफ्ता गुप्ता ने कहा, 90 परसेंट यूजर्स पर्सनल इंर्फोमेशन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर साझा नहीं करना चाहते। यूजर्स पॉलिसी को ठीक से पढ़ते नहीं हैं, क्योंकि पॉलिसी मुश्किल और काफी पेजों में होती है।



ऐसे में जरूरी है जल्दी ही पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल सरकार लेकर आए। जिसमें सिर्फ सरकार की भागीदारी नहीं बल्कि आम लोगो की भागीदारी भी जरूरी है। डाटा एक्सजेन टेक्नोलॉजीस के फाउंडर व सीईओ अजय डाटा ने कहा, पॉलिसी लागू करने के लिए जरूरी है प्रोटेक्शन बिल में सभी बिंदुओं को अच्छे से डिफाइन किया जाए। यानी भाषा सरल हो, मातृभाषा में हो तो ज्यादा बेहतर होगा।

इन बिंदुओं पर ध्यान दें:-

- फेसबुक, इंस्टाग्राम से लेकर दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी इन्फॉर्मेशन शेयर ना करें। अपने बारे में लिमिटेड जानकारी ही इन प्लेटफार्म पर साझा करें।

- आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी सभी प्लेटफॉर्म पर साझा ना करें।

- सभी प्लेटफार्म पर अपना एक ही पहचान कार्ड ना दें। बल्कि सभी जगह अलग-अलग दें। इससे सामने वाला आपको ट्रैक नहीं कर पाएगा।

- अपना पर्सनल कॉन्टैक्ट नम्बर जहां ज्यादा जरूरी नहीं है वहां शेयर ना करें। जैसे मान लीजिए ग्रोसरी स्टोर या बड़े बड़े शॉपिंग मॉल्स में स्टोर पर आपका नम्बर मांगा जा रहा है। वहां गलत नम्बर दें।

- गूगल, फेसबुक और वॉट्सएप यूज करने के लिए वीडियो, फोटो कॉन्टैक्ट लिस्ट, एसएमएस जैसी जानकारियों को हम साझा करने पर सहमति जता देते हैं। ऐसी स्थिति यूजर के फोन में आए ओटीपी को भी ये पढ़ लेते हैं और ओटीपी के बहाने यूजर के एसएमएस की जानकारी एप्लीकेशन के पास होती है।

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