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आग में सुलगता सवाल... लाइफ लाइन स्टोर ही क्यों राख हुआ, जहां रिफंड स्टॉक और दस्तावेज रखे थे

Bhaskar News Network

May 12, 2019, 09:05 AM IST

Jaipur News - एसएमएस अस्पताल की जिस लाइफ लाइन में आग लगी थी, उसमें बीपीएल मरीजों को दिए जाने वाले लाखों रुपए के इंजेक्शन और...

Jaipur News - rajasthan news dissenting questions in the fire why was the life line store where refund stocks and documents were kept
एसएमएस अस्पताल की जिस लाइफ लाइन में आग लगी थी, उसमें बीपीएल मरीजों को दिए जाने वाले लाखों रुपए के इंजेक्शन और दवाइयां धांधली कर सरकार को रिफंड कर दी। इंजेक्शन और दवाएं मरीजों को बेच दी गई। मामले में अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी भी गठित की लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई। अब आग लगने के बाद जांच कमेटी फिर से इस दिशा में पूछताछ कर रही है। सामने यह भी आया है कि इस गड़बड़ी में जिस फार्मासिस्ट को तुरंत हटाया जाना चाहिए था, लेकिन उसे एकबारगी हटा कर कुछ ही समय बाद वापस लगा दिया गया। वहीं जांच कमेटी सदस्यों की मानें तो इस लाइफ लाइन में हर महीने लाखों रुपए की लोकल परचेज और दवाइयों की रिफंड की जाती थी, जो कि अन्य लाइफ लाइन की अपेक्षा बहुत अधिक थी। ऐसा क्यों किया गया और इन सब के पीछे किन-किन बाबू, फार्मासिस्ट, डॉक्टर और अधिकारियों का हाथ है, इसकी जांच की जा रही है। गौरतलब है कि एसएमएस अस्पताल में शुक्रवार सुबह लगी आग के बाद मुख्य भवन के प्रथम मंजिल पर बना लाइफ लाइन स्टोर पूरी तरह खाक हो गया था। इसमें लाखों रुपए की दवाइयां और दस्तावेज जल गए थे। आग के बाद चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामला संदिग्ध लगा। तुरंत जांच कमेटी गठित की गई थी।

‘गरीबों’ के हक की ये महंगी दवाएं, जो मुफ्त में देनी होती थी






इनके अलावा एक दर्जन से अधिक दवाएं, जिन्हें लेकर कमेटी पड़ताल कर रही है।

इन अधिकारियों पर ही रही है लाइफ लाइन की जिम्मेदारी


लाइफ लाइन में धांधली की ये कालिख सिद्ध हो चुकी

2018 में जब लाइफ लाइन में गड़बड़ी हुई थी तब बाबू मदन बैरवा, फार्मासिस्ट सुनील मीणा को दोषी माना गया। दोनों ही करीब पांच साल से एक ही जगह पद पर बने हुए थे। जांच में दोषी पाए जाने पर अस्पताल प्रशासन पर दबाव बना और दाेनों को लाइफ लाइन से हटा दिया गया। कुछ ही दिनों बाद सुनील मीणा को फिर से वहीं लगा दिया गया।

यूं समझें मामले को

निशुल्क दवाओं के लिए बीपीएल मरीजों के डॉक्यूमेंट लेकर बीपीएल काउंटर से दवाएं लेकर लाइफ लाइन स्टोर में रख ली जाती थी। बाद में बता दिया जाता कि मरीज दवा रिफंड कर गया, पैसा ले गया। रखी हुई दवा बिना बिल सस्ती बेच देते थे। बताया जा रहा है कि स्टोर में रखा हुआ स्टॉक अभी बचा हुआ था।



हेल्पर ने बना ली फर्म

अस्पताल में 10 साल तक हेल्पर रहे फारूख ने एक डॉक्टर के साथ मिलकर फर्म खोली और लाइफ लाइन में दवाएं सप्लाई करने लगा। खुलासा हुआ तो उसे हटा दिया गया। फारूख ने मेडिकल स्टोर खोल लिया। डेढ़ साल पहले भी अस्पताल के लाइफ लाइन इंचार्ज एक डॉक्टर को गड़बड़ी करने पर हटा दिया गया था।


28 घंटे में बनीं 3 कमेटियां... मंत्री की पहली

अधीक्षक ने 3 घंटे बाद और प्रिंसीपल ने 16 घंटे बाद बनाई तीसरी कमेटी

अधीक्षक की कमेटी ने जांच रिपोर्ट में कहा-शॉर्ट-सर्किट से लगी आग

जयपुर | एसएमएस अस्पताल में लगी आग के बाद किस पर गाज गिरेजी, यह अभी भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन डॉक्टर्स और अधिकारी अपने-अपने बचाव में जुट गए हैं। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल में महज 28 घंटे में 3 जांच कमेटियां बन गईं। एक कमेटी ने तो जांच रिपोर्ट भी सौंप दी है। वहीं इस रिपोर्ट के तुरंत बाद एक अलग कमेटी बनाई गई है, जो 2-3 दिन में रिपोर्ट देगी। दिलचस्प बात यह भी कि चिकित्सा मंत्री और चिकित्सा राज्य मंत्री ने अपनी-अपनी टीम को मामले की जांच में लगा रखा है।

मुख्यमंत्री से मिले प्रिंसीपल भंडारी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने के लिए शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल डॉ. सुधीर भंडारी मिले। हालांकि डॉ. भंडारी ने कहा कि वे निजी कारणों से गए थे। लेकिन बात यह भी सामने आ रही है कि अस्पताल में लगी आग और अन्य मामलों पर भी मुख्यमंत्री से चर्चा हुई।

आग की घटना के बाद शनिवार को मॉक ड्रिल: इंजीनियर और इलेक्ट्रिक विभाग के कर्मचारियों ने फायर सिस्टम की जांच की। ट्रॉमा, बांगड़, फ्रंट पार्किंग, धन्वन्तरि और चरक भवन में फायर सिस्टम की जांच की गई।


1. सरकारी कमेटी... शुक्रवार सुबह 10 बजे किया गठन


2. अधीक्षक कमेटी... शुक्रवार दोपहर 1 बजे बनाई गई


जांच रिपोर्ट: शॉर्ट-सर्किट से आग।

3. प्रिंसीपल कमेटी... शनिवार दोपहर 2 बजे बनी


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