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एकाग्रता, मजबूत मांसपेशियाें और शरीर का संतुलन बनाने के लिए करें गरुड़ासन**
अगर मन चंचल रहता है। सायटिका व गठिया का दर्द रहता है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ शरीर का संतुलन बनाए रखने वाले आसन करें। ताकि सेरेबलम मजबूत बनेगा। एकाग्रता बढ़ेगी। इसके लिए ये दो आसन भी करें।
गरुड़ासन : सीधे खड़े होकर दाहिना पैर मोड़े। इसे बांये पैर के चारो तरफ इस तरह लपेटे कि दांयीं जांघ बांयी जांघ के सामने रहें। दाहिने पंजे का ऊपरी भाग बांये पिंडली पर टिका रहे। कोहनी को मोड़ते हुए सीने के सामने लाएं। दाहिने हाथ को बांये हाथ पर इस तरह लपेट लें। बांयी कोहनी नीचे रहे। हथेलियों को मिलाकर एक साथ इस तरह रखें कि गरूड़ की चोंच जैसी आकृति बन जाएं। जितनी देर संभव हो पाएं। उतनी देर तक ऐसी स्थिति में खड़े रहें।
सावधानियां: बिना हिले-डुले खड़े रहें। संतुलन बनाकर रखें, जिन्हें चक्कर आते हैं। वे इस आसन को नहीं करें। मिर्गी पेशेंट्स यह आसन करते समय सावधानी बरतें। एक बिंदू पर ध्यान लगाते हुए संतुलन बनाए रखें।
फायदा: मांसपेशियों को मजबूत और मस्तिष्क सेरेबलम को सक्रिय बनाता है। शरीर का संतुलन बनाए रखने से एकाग्रता बढ़ती है। मन की चंचलता कम, सायटिका व गठिया में लाभ मिलता है।
वृक्षासन: वृक्ष की तरह एक पैर पर स्थिर खड़ा रहना वृक्ष्रासन कहलाता है। दोनों पैर मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। हाथ जांघों से सटे रहेंगे। दृष्टि सामने की तरफ रहेगी। अपना एक पैर दाहिने घुटने से मोड़े। तलवे को बांये जंघामूल में लगाएं। दोनों हाथों को नमस्कार मुद्रा में लेकर आएं। थोड़ी देर रुकने के बाद हाथों को सीधा कीजिए। दोनों पैरों पर खड़े हो जाएं। इसी तरह से दूसरी पैर से अभ्यास करें।
सावधानियां: जिन्हें चक्कर आने की समस्या है। वे यह आसन नहीं करें।
फायदा: जांघ व पिंडलियां की मांसपेशियां मजबूत बनेगी। यह संतुलनात्मक है। मस्तिष्क को एक्टिव रखता है। एकाग्रता बढ़ती है। दिनभर एनर्जी बनी रहने से व्यक्ति काम पर बेहतरीन तरीके से फोकस कर पाता है। उसे नींद नहीं आने की प्रॉब्लम से छुटकारा मिलता है।
सायटिका व गठिया के दर्दा में भी यह आसन करने से मिलेगा आराम