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खुले में छींके और खांसे नहीं, संक्रमित व्यक्ति से एक फीट की दूरी बनाकर रखें

Jaipur News - वायरस से बचाव के लिए कफ एटिकेट में बदलाव करें डॉ.रविकांत पोरवार, सीनियर फिजिशियन,...

Feb 15, 2020, 08:50 AM IST
Jaipur News - rajasthan news do not sneeze and cough in the open keep a distance of one foot from the infected person

वायरस से बचाव के लिए कफ एटिकेट में बदलाव करें

डॉ.रविकांत पोरवार, सीनियर फिजिशियन, जयपुर

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दो वायरस के जेनेटिक कंपोजिशन में बदलाव होने से बनता है नया वायरस

फैन्सी मास्क नहीं लगाएं, सर्जिकल मास्क काफी

सर्जिकल मास्क लगाने से बचाव नहीं होता है। यह भ्रांति है। जबकि साधारण व्यक्ति के लिए सर्जिकल मास्क ही पर्याप्त है। उन्हें फैन्सी मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर ही सर्जिकल मास्क पहनें। संक्रमित व्यक्ति से एक फीट की दूरी बनाए रखें। एन 95 मास्क सिर्फ हैल्थ वर्कर को पहनने चाहिए। एन 95 मास्क आरामदायक नहीं है। लंबे समय तक इसे नहीं लगाया जा सकता है। इसके लिए एक तरह का फिट टैस्ट होता है। यानी मास्क लगाते समय सांस अंदर खींचें। सांस खींचने के दौरान यह पूरी
तरह से पिचक जाए।


इस वायरस से 60-70 परसेंट लोग ग्रसित होते हैं। अन्य वायरस का असर बहुत कम है। इनसे सांस की बीमारियां ज्यादा होती हैं। श्वसन प्रकिया प्रभावित होने से निमोनिया की संभावना बढ़ती है।

साल में एक बार ही यह लगाया जाता है। अगली साल इस वायरस का स्ट्रेन नहीं बदलता है। पुराना वैक्सीन ही पर्याप्त है। स्ट्रेन बदलने पर नया वैक्सीन लगवाएं। यह इंफ्लुुजुंआ वायरस के लिए ही कारगर है। एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने से बचाव करता है।

फ्लू से बचने के लिए 5 साल से कम और 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति वैक्सीन लगवाएं। विशेष रूप से अस्थमा, हार्ट,लीवर, डायबिटीज से ग्रसित लोगों को वैक्सीनेशन करवाना चाहिए। यह वैक्सीन सामान्य फ्लू, एच1 एन1 से 80% तक बचाव करेगा।


सामान्य व्यक्ति को हाइजीन बनाए रखने के लिए पॉकेट में सेनेटाइजर रखने की जरूरत नहीं है। बार-बार पानी व साबुन से हाथ धोना पर्याप्त है। संक्रमित होने पर किसी अन्य चीज को छुए नहीं।


एक संक्रमित से दूसरे संक्रमित व्यक्ति में इंफेक्शन नहीं फैले। इसके लिए खुले में नहीं छींके, ना ही खुले में खांसें। कफ व नाक को कपड़े, टिश्यू पेपर से साफ करें।


संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए क्या करें**

कई सदियों पहले से वायरस वातावरण में मौजूद हैं। मौसम के अनुरूप ये भी इंसानों की तरह बदलाव करते हैं। यह बदलाव सरवाइवल के लिए होता है। सरवाइवल के लिए दो वायरस में म्यूटेशन (जेनेटिक कंपोजीशन में बदलाव) होने से नया वायरस पनपता है। यह बदलाव एक सामान्य प्रकिया है। कोरोना वायरस से दो से तीन परसेंट डेथ हो रही है। इस वायरस से गंभीर स्थिति होने पर डेथ की संभावना कम है। नया वायरस होने की वजह इसका ट्रांसमिशन बहुत ज्यादा है। सावधानियां बरतने की जरूरत है। यह पेनिक नहीं होना चाहिए, बल्कि विजिलेंट रहें। इसके लिए सही जानकारी की जरूरत है।


आजकल वायरस और इससे होने वाली बीमारियों से लोग डरे हुए हैं। मौसम में बदलाव के साथ वायरस पनपते हैं। सामान्य बुखार की तरह व्यक्ति में लक्षण आते हैं। कुछ दिनों बाद व्यक्ति में निमोनिया होने के साथ ही वह वेंटिलेटर तक पहुंच जाता है। जबकि वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। इससे होने वाली बीमारियों से बचाव संभव है। इसके लिए हमें कफ एटिकेट में बदलाव लाना जरूरी है। इसके लिए खांसने, छींकने और नाक फेकने की अादत में बदलाव लाएं। अक्सर खांसते, छींकते और नाक फैकते समय दूसरे व्यक्ति का ख्याल नहीं रखा जाता है।

ऐसा करते समय वे मुंह व नाक को कवर नहीं रखते हैं। खुला ही खांस और छींक देते हैं। अमूमन ऐसा नहीं होना चाहिए। इनमें ड्रॉपलेट बनती हैं। यानी वायरस के छोटे-छोटे कण समूह में होते हैं। एक फीट की दूरी तक बैठे व्यक्ति को ये प्रभावित करते हैं। ये सीधे चेहरे पर आ जाते हैं। इसके अलावा वायरस से ग्रसित व्यक्ति छींकने,खांसने के बाद कंप्यूटर, मोबाइल,दरवाजे व अन्य किसी चीज को टच करता है। उसी चीज को हैल्दी व्यक्ति छू लेता है। वह भी इस वायरस से ग्रसित हो सकता है। कफ एटिकेट में बदलाव करके ट्रांसमिशन चेन को तोड़ा जा सकता है। यह चेन तोड़कर सभी तरह के वायरस से बचाव संभव है।

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