‘सुर जहां’ में गंूजा बाउल संगीत व ला रीयूनियन आइलैंड्स का ब्लूज

Jaipur News - सिटी रिपाेर्टर . जयपुर जवाहर कला केंद्र का परिसर रविवार काे बंगाल के बाउल संगीत व ला रीयूनियन अाइलैंड के...

Feb 10, 2020, 08:21 AM IST
Jaipur News - rajasthan news ganja bowl music and blues of la reunion islands in 39sur jahan39

सिटी रिपाेर्टर . जयपुर

जवाहर कला केंद्र का परिसर रविवार काे बंगाल के बाउल संगीत व ला रीयूनियन अाइलैंड के ब्लूज संगीत की स्वर लहरियाें से स्वरमय हाे गया। माैका था यहां चल रहे वर्ल्ड पीस म्यूजिक फेस्टिवल ‘सुर जहां’ के दूसरे दिन की प्रस्तुतियाें का। इस अवसर पर बंगाली वर्ल्ड म्यूजिक के लोक गायक, देबलीना भौमिक के नेतृत्व में यह प्रस्तुति दी गई। इसमें बीरभूम के साधु दास बाउल व कंगाल ख्यापा; कोलकाता के दीपानिता आचार्य और मुर्शिदाबाद के खोकन दास ने उनका साथ दिया।

बाऊल संगीत बंगाल का मूल संगीत है, जो गुरुओं द्वारा उनके शिष्यों को दिया जाता है। करीब 500 वर्ष पुराना यह संगीत मूल रूप से स्वयं की खोज का संगीत है। बाउल्स भौतिक दुनिया की निंदा करते हुए जीवन जीते हैं। वे लोगों से जाति, पंथ व धर्म के आधार पर किए गए संकीर्ण विभाजन से ऊपर उठकर प्रेम, शांति एवं सद्भाव की खोज का आग्रह करते हैं।

वाराे ने दी खुद के बनाए इंस्ट्रूमेंट पर प्रस्तुति

इसके बाद ला रीयूनियन आइलैंड्स के कलाकार वाराे के निर्देशन में वहां के ब्लूज संगीत की प्रस्तुति दी गई। वाराे ने इस माैके पर खुद के बनाए कयाम, बोबरे व राउलर जैसे इंस्ट्रमेंट की मधुर ध्वनियाें पर वहां के संगीत की स्वर लहरियाें काे जीवंत किया। उनके संगीत ने 1970 के दशक में ला रीयूनियन आइलैंड्स के स्वतंत्रता आंदोलनों तथा 1980 के पुनर्जागरण से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने की आशा व साहस के साथ-साथ उनके स्थान की सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाई।

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