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मानवाधिकार ने कहा- स्थानीय व राज्य स्तर के अफसरों की लापरवाही ही नहीं, मिलीभगत का भी अंदेशा

Jaipur News - भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पाल रोड स्थित पारा कैंसर सेंटर द्वारा 420 दिन में करीब 13 करोड़ 50 लाख के क्लेम की...

Aug 20, 2019, 10:00 AM IST
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पाल रोड स्थित पारा कैंसर सेंटर द्वारा 420 दिन में करीब 13 करोड़ 50 लाख के क्लेम की शिकायत की जांच के बाद सोमवार को मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले पर प्रसंज्ञान लिया। आयोग के कहा कि पारा कैंसर सेंटर में 6621 केस हुए, जिनमें से केवल 90 अस्वीकृत हुए। वहीं मथुरादास माथुर अस्पताल के 19 हजार केस अस्वीकृत किए गए। ऐसे में स्थानीय व राज्य स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही के साथ मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। वहीं पहले ही साल में प्राइवेट सेंटर द्वारा कैंसर के 6 हजार से अधिक मरीजों का इलाज करने का तथ्य बिना स्थानीय व राज्य के अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं है।

गौरतलब है कि एक आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत के बाद विभाग ने पहले ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा और बाद में जोन डायरेक्टर और जयपुर के डॉक्टर्स की टीम बनाकर तथ्यों की जांच कराई। इनमें 2 अगस्त को कमेटी ने जांच कर वहां के दस्तावेज और करीब 30 केस की फाइलें ली थीं।











फिर एम्स, एमडीएमएच और एमजीएच के अधीक्षक को वहां आ रहे कैंसर के मरीजों का डाटा पेश करने के लिए लिखा। कमेटी अध्यक्ष डॉ. युद्धवीरसिंह राठौड़ ने बताया कि हम जयपुर विभाग को लिखेंगे कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए कैंसर स्पेशलिस्ट को कमेटी में जोड़ें, जिससे मरीजों को दिए गए इलाज की जांच वे कर सकें।

इधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि जांच कमेटी बन चुकी है, जो सभी तथ्यों पर जांच कर निष्कर्ष प्रस्तुत करेगी। आयोग ने कहा कि आयोग स्वयं जांच करने से पूर्व कमेटी से इस संबंध में छह बिंदुओं पर तथ्यात्मक रिपोर्ट लेगा।

इन बिंदुओं पर कमेटी करेगी जांच

-पारा कैंसर सेंटर में कैंसर रोगियों को उपचार के दौरान भर्ती करना आवश्यक था या नहीं?

- भर्ती करना आवश्यक था तो क्या अस्पताल के पास इतने रोगियों को भर्ती करने का अनुज्ञा पत्र था?

- निजी अस्पताल द्वारा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करने के समय राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अस्पताल में इलाज के संबंध में जांच की जाती है अथवा नहीं? मेडिकल ऑडिट होती है अथवा नहीं?

- कैंसर के उपचार के लिए वास्तव में दवाइयां खरीदी भी गई हैं या नहीं?

- सरकारी अस्पताल व एम्स जैसे उच्च स्तरीय श्रेणी के अस्पताल में भी कैंसर रोगियों के इलाज प्राप्त करने की प्राथमिकता किन कारणों से समाप्त हुई, क्या डाॅक्टर्स द्वारा मरीजों को सरकारी अस्पताल या एम्स से निजी अस्पताल भेजा गया था?

- पारा कैंसर सेंटर भामाशाह योजना द्वारा सरकारी सहायता योजना में अत्यधिक मरीजों की चिकित्सा के आंकड़े प्राप्त हो रहे हैं, ऐसे में प्रशासन द्वारा किन कारणों से ऐसे प्रकरणों में ध्यान क्यों नहीं दिया गया?

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