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रेड लाइट एरिया की महिलाओं काे बताना चाहती हूं कि शरीर बेचने से बेहतर है खाना बनाकर बेचना : अस्मा

Jaipur News - जानते हैं मां के हाथ का खाना इतना स्वादिष्ट क्याें लगता है? क्याेंकि इसमें सारे सेंसेज जुड़ जाते हैं जाे उनकी...

Jan 24, 2020, 08:41 AM IST
Jaipur News - rajasthan news i want to tell the women of red light area that selling food is better than selling body asma
जानते हैं मां के हाथ का खाना इतना स्वादिष्ट क्याें लगता है? क्याेंकि इसमें सारे सेंसेज जुड़ जाते हैं जाे उनकी उंगलियाें के पाेराें से खाने काे जादुई जायका दे देते हैं। खाना अाैर जायका हमारी यादाें से जुड़ जाता है लेकिन हम उसे बनाने वाले काे अक्सर कमतर अांकते हैं, शायद इसलिए क्याेंकि वाे घर की महिलाएं हैं, जाे पूरे दिल से अाैर बहुत प्यार से अपनाें के लिए खाना बनाती हैं। कई परिवाराें में उन्हें खाने की मेज पर साथ बैठकर खाने की इज्जत भी नहीं दी जाती।

यह कहना था लाॅ में पीएचडी अस्मा खान का जाे लंदन में दार्जिलिंग एक्सप्रेस रेस्त्रां 25 महिलाअाें की टीम के साथ चलाती हैं। वाे शुनाली श्राॅफ अाैर कृश्णेन्दू रे के साथ काेलकता से केम्ब्रिज तक जायके के सफरनामे पर बात कर रहीं थीं। अस्मा ने बताया कि कैसे नवाब परिवार से ताल्लुक रखते हुए इकाेनाॅमिक्स में गाेल्ड मेडलिस्ट अाॅक्सफर्ड के प्राेफेसर से उनकी अरेंज्ड मैरेज हुई। कैसे वहां की सर्दियाें अाैर अकेलेपन की ठिठुरन ने उन्हें अपनी जड़ाें से जुड़ना का इशारा दिया। जिसके बाद अपनी अम्मू यानी मां अाैर कुछ रिश्तेदाराें से खाना बनाने की पूरी ट्रेनिंग ली अाैर उसी अंदाज में लंदन में खाना बनाना शुरू किया। चूंकि पति कम बाेलते थे अाैर उनके बनाए खाने की तारीफ भी मुश्किल से करते थे, उन्हाेंने नए दाेस्त बनाए। साथ ही पति के स्टूडेंट्स के लिए खाना बनाना शुरू किया।

इराक, सीरिया के बाद भारत में शुरू करेंगी कैफे

अस्मा के एक कस्टमर ने उनसे जंग वाले इलाकाें में महिलाअाें अाैर बच्चाें के हालात के बारे में बताया। अस्मा ने उसी दिन तय कर लिया कि वाे एेसे इलाकाें में कैफे शुरू करेंगी। 2019 में उत्तर इराक के कुर्दिस्तान के कैंप में अस्मा ने एक कैफे शुरू किया जिसमें 5 एेसी महिलाअाें काे शामिल किया जिनकी जिंदगी किसी न किसी रूप में जंग से छलनी हुई थीं। ये महिलाएं खाना बनाने में माहिर थीं इसलिए कैफे में खाना बनाकर उनमें नए हाैसले का संचार हुअा।

अगला कैफे वाे बांग्लादेश की उन राेहिंग्या महिलाअाें के साथ शुरू करेंगी जाे याैन हिंसा का शिकार हुईं। उसके बाद अस्मा जल्द ही काेलकता के रेड लाइट एरिया की महिलाअाें के साथ एेसा ही कैफे शुरू करेंगी ,उन्हें ये यकीन दिलाने के लिए कि शरीर बेचने से बेहतर विकल्प है जायकेदार खाना बनाकर बेचना। खाना बनाना दर्द से राहत भी देता है अाैर दिल के जख्माें का भर देता है। गाैरतलब है कि अस्मा पहली ब्रिटिश शेफ हैं जिन्हें नेटफ्लिक्स के शेफ्स टेबल में शामिल किया गया।

दार्जिलिंग एक्सप्रेस सेशन में शाेनाली श्राॅफ, कृष्णेन्दू रे अाैर अस्मा खान।

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