पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Jaipur News Rajasthan News Kailash Mansarovar Yatra Will Be Postponed Due To Corona Online Applications Not Removed

कोरोना के चलते टलेगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, नहीं निकाले गए ऑनलाइन आवेदन

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

चीन में कोरोना के कहर के चलते इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा टलेगी। विदेश मंत्रालय ने इस साल यात्रा पर संशय जताया है। इसके चलते अब तक यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन भी नहीं निकाले गए हैं, जबकि हर साल फरवरी अंत व मार्च की शुरुआत में ही आॅनलाइन आवेदन शुरू हो जाते थे। देशभर से 4000 यात्री हिंदू धर्म की इस सबसे जटिल और कठिन धार्मिक यात्रा कैलाश मानसरोवर जाते हैं।
इनमें से करीब 150-200 यात्री राजस्थान से होते हैं।

यात्रा के राजस्थान प्रभारी राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस साल चीन में कोरोना के चलते यात्रा पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। यही कारण है कि अभी तक यात्रा के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार का विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान दो अलग-अलग मार्गों- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथु-ला दर्रा (सिक्किम) से कैलाश यात्रा का आयोजन करता है। इसके लिए चीन से वीजा लेना होता है।

राज्य सरकार ने नहीं दी पिछले साल के यात्रियों की अनुदान राशि

उधर, राजस्थान सरकार की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा कर लौटने वाले यात्रियों को दी जाने वाली एक-एक लाख रुपए की अनुदान राशि आवंटन के लिए लॉटरी निकाल दी गई है। एक करोड़ रुपए का ही बजट होने के कारण वर्ष 2019 में यात्रा करके आए सभी 141 यात्रियों में से 41 यात्रियों को अनुदान राशि नहीं मिल सकेगी। राज्य सरकार के देवस्थान विभाग ने लॉटरी निकाल कर 100 ही यात्रियों को इस राशि के लिए चयनित किया है। जबकि वर्ष 2018 में यात्रा करने वाले सभी 170 यात्रियों को इसका लाभ मिला था। ऐसे में जिन यात्रियों का चयन नहीं हुआ है उनमें रोष व्याप्त है। यात्रा के राजस्थान प्रभारी राजेंद्र कुमार अग्रवाल का कहना है कि वर्ष 2018 की यात्रा के लिए भी अनुदान राशि का बजट 1 करोड़ ही था लेकिन यात्रियों के अनुरोध पर बजट बढ़ा दिया गया था
और सभी 170 यात्रियों को अनुदान राशि का लाभ मिला था। 2019 में तो 141 यात्री ही कैलाश मानसरोवर की यात्रा करके आए हैं। इन सभी को इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। यदि सरकार बजट नहीं बढ़ना चाहती है तो फिर एक करोड़ रुपए बराबर-बराबर सभी 141 यात्रियों में बांट देना चाहिए। इसके लिए सभी यात्री सहमत हैं।

महादेव का निवास है कैलाश मानसरोवर

उल्लेखनीय है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक महत्वों के कारण जानी जाती है। हिन्दू परंपरा के अनुसार यहां भगवान शिव का निवास भी है। यहां बाबा भोलेनाथ स्वयं वीराजमान है, जहां भक्त दुरगम रास्ते को तय करके महादेव को ढोक लगाने जाते है। मिथकों का सुमेरु एवं स्वर्गीय कल्पना का सेतु भी है। ऐसी भी मान्यता है कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) ने अपना मोक्ष कैलाश पर्वत पर ही पाया था।

यात्रा में जोखिम भरी 19,500 फीट चढ़ाई

भारत सरकार का विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान दो अलग-अलग मार्गों- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथु-ला दर्रा (सिक्किम) से कैलाश यात्रा का आयोजन करता है। दोनों यात्राओं की अवधि एवं लागत राशि भी अलग-अलग है। यह यात्रा बहुत दुर्गम भी है। प्रतिकूल स्थितियों और खराब मौसम में ऊबड़-खाबड़ भू-भाग से होते हुए 19,500 फुट तक की चढ़ाई चढ़नी होती है और यह उन लोगों के लिए जोखिम भरी हो सकती है जो शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ एवं तंदुरुस्त नहीं हैं। इस कारण यात्रा से पहले दिल्ली में डीएचएलआई और आईटीबीपी की चिकित्सा जांचों के बाद ही अनुमति दी जाती है।
खबरें और भी हैं...